बैठक में मेले की संपूर्ण रूपरेखा, कार्यक्रमों की तिथि, व्यवस्थाओं और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। जानकारी के अनुसार मावली मेला का शुभारंभ 10 मार्च को सुबह देवी-देवताओं के आगमन के साथ होगा। इसके पश्चात पूजा-अर्चना का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जो स्थानीय आस्था और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
बताया गया कि 10 मार्च को ही रात्रि 8 बजे पारंपरिक माड़िया नाचा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें आसपास के गांवों से कलाकार भाग लेंगे। वहीं 11 मार्च को 84 परगना के देवी-देवताओं द्वारा मेला स्थल की ढाई परिक्रमा की जाएगी, जो इस मेले की विशेष और आकर्षक परंपरा मानी जाती है।
12 मार्च की रात्रि 8 बजे से भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें लोक कलाकारों द्वारा पारंपरिक नृत्य, गीत एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी। मेला का समापन 13 मार्च को विधिवत रूप से किया जाएगा।
बैठक में यह भी तय किया गया कि 10 मार्च की सुबह देवी-देवताओं का आगमन स्थानीय दंतेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना के पश्चात मेला स्थल पर होगा। आयोजन समिति द्वारा धार्मिक परंपराओं के अनुरूप सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी।
मेला स्थल में पेयजल, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा को लेकर भी विशेष चर्चा की गई। इसके साथ ही दूर-दराज से पहुंचने वाले व्यापारियों के लिए स्थान आवंटन की व्यवस्था पर मेला समिति द्वारा विशेष ध्यान देने का निर्णय लिया गया, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
बैठक में छोटेडोंगर क्षेत्र अंतर्गत 9 ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधि, पुलिस विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। इसी बैठक में मेला के संचालन के लिए विधिवत मेला समिति का गठन भी किया गया।
मेला समिति में अध्यक्ष सोनसिंग कोर्राम, उपाध्यक्ष भारत भुटान एवं मीना मांझी, कोषाध्यक्ष संध्या पवार, सचिव पवन कुलदीप तथा संरक्षक के रूप में लिखराम बेलसरिया और चमरा राम मांझी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा बेदूराम पात्र, सुखराम पात्र, गणेश सिंह बघेल, सुकदेव नाग, काशीराम नाग, देवल पात्र को सलाहकार के रूप में तथा संतोष मजूमदार और बोधन नाग को मीडिया प्रभारी नियुक्त किया गया है। विशेष सलाहकार के रूप में सोमनाथ मांझी और राकेश उसेड़ी को शामिल किया गया है।
गौरतलब है कि छोटेडोंगर का मावली मेला पूरे क्षेत्र में अत्यंत प्रसिद्ध है। इस मेले में न केवल नारायणपुर जिला बल्कि कांकेर, कोंडागांव, जगदलपुर, राजनांदगांव, दल्ली राजहरा तथा पखांजूर सहित अनेक क्षेत्रों से व्यापारी एवं श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
मावली मेला धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय व्यापार का प्रमुख केंद्र माना जाता है। आयोजन समिति और ग्राम पंचायत ने सभी ग्रामीणों से अपील की है कि वे मेले को सफल बनाने में सहयोग करें और परंपराओं के साथ शांति एवं सौहार्द बनाए रखें।