चिरमिरी की लेखिका मल्लिका रुद्रा का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज

चिरमिरी की लेखिका और डीएवी पब्लिक स्कूल की हिंदी शिक्षिका मल्लिका रुद्रा ने AAINA Heritage World Record Project में सहभागिता कर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में स्थान बनाया है। ‘सात आयाम जीवन के’ विषय पर आयोजित इस अभियान में देश-विदेश के 775 साहित्यकारों, कवियों और रचनाकारों ने डिजिटल माध्यम से रचनात्मक सहभागिता की। मल्लिका रुद्रा ने ‘रिश्ते और भावनात्मक संबंध’ आयाम पर ‘मेरा वसंत’ कविता प्रस्तुत की।

Aug 19, 2026 - 10:44
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चिरमिरी की लेखिका मल्लिका रुद्रा का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज

UNITED NEWS OF ASIA. जमील अंसारी, कोरिया l चिरमिरी के साहित्यिक क्षेत्र के लिए गौरव का अवसर सामने आया है। चिरमिरी की लेखिका एवं डीएवी पब्लिक स्कूल की हिंदी शिक्षिका मल्लिका रुद्रा का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ है। उन्होंने वैश्विक साहित्यिक मंच AAINA के AAINA Heritage World Record Project में सहभागिता कर यह उपलब्धि हासिल की है।

‘सात आयाम जीवन के’ विषय पर आयोजित इस अभिनव साहित्यिक अभियान में देश-विदेश के 775 साहित्यकारों, कवियों और रचनाकारों ने डिजिटल माध्यम से अपनी रचनात्मक सहभागिता दर्ज कराई। सामूहिक रचनात्मक प्रयास के माध्यम से इस परियोजना ने विश्व कीर्तिमान स्थापित किया और गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में स्थान प्राप्त किया।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना का नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय काव्यप्रेमी मंच की संस्थापक-अध्यक्ष और AAINA की संस्थापक डॉ. ममता सैनी ने किया। उनके मार्गदर्शन में आयोजित यह अभियान साहित्य, संस्कृति और आधुनिक तकनीक के समन्वय का उदाहरण बना।

‘मेरा वसंत’ कविता ने बनाई पहचान

मल्लिका रुद्रा ने ‘सात आयाम जीवन के’ में से ‘रिश्ते और भावनात्मक संबंध’ आयाम को चुना और इस विषय पर ‘मेरा वसंत’ शीर्षक से कविता प्रस्तुत की। उनकी कविता में स्त्री के आत्मसम्मान, भावनात्मक संसार और अनकहे प्रेम को संवेदनशीलता के साथ अभिव्यक्त किया गया है।

कविता में स्त्रियों के जीवन से जुड़े भावनात्मक पक्षों को उनके स्वाभिमान और वसंत के प्रतीक से जोड़ा गया है। रचना में स्त्री की इच्छाओं, संवेदनाओं और आत्मसम्मान को साहित्यिक अभिव्यक्ति दी गई है। इस रचना का संरक्षण AAINA प्रोजेक्ट के माध्यम से किया गया है।

इस परियोजना की खासियत साहित्य और तकनीक का संयोजन भी रहा। प्रतिभागियों की रचनाओं को डिजिटल माध्यम से प्रस्तुत किया गया और परियोजना में AI के माध्यम से रचनाओं के सत्यापन की प्रक्रिया अपनाई गई। इससे पारंपरिक साहित्यिक सृजन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का प्रयास किया गया।

व्याकरण पुस्तक से भी बनाई पहचान

मल्लिका रुद्रा की साहित्यिक उपलब्धियों के साथ उनकी व्याकरण संबंधी पुस्तक भी देश-विदेश में पहचान बना चुकी है। उनकी पुस्तक से बड़ी संख्या में विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। साहित्य के क्षेत्र में भी उनकी रचनाएं विशेष रूप से स्त्री-विमर्श से जुड़े विषयों को अभिव्यक्ति देने का प्रयास करती हैं।

गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज होने पर मल्लिका रुद्रा ने कहा कि साहित्य समाज की चेतना, संस्कृति और मानवीय मूल्यों का जीवंत दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि यदि साहित्य को तकनीक के माध्यम से संरक्षित और दुनिया तक पहुंचाया जाए, तो अधिक से अधिक लोग साहित्य से जुड़ सकते हैं।

चिरमिरी की इस उपलब्धि से साहित्यिक और शैक्षणिक क्षेत्र में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों ने मल्लिका रुद्रा को इस उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल साहित्यिक भविष्य की कामना की है।