मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने दी राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएँ, कहा — “छत्तीसगढ़ न्याय, समानता और सेवा की राह पर अग्रसर”

छत्तीसगढ़ राज्य की रजत जयंती के अवसर पर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि राज्य स्थापना दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि न्याय, समानता और सेवा की दिशा में निरंतर प्रगति का प्रतीक है। उन्होंने न्यायपालिका की पारदर्शिता, तकनीकी सुधार और जनहित में सक्रिय भूमिका को राज्य की सच्ची उपलब्धि बताया।

Nov 1, 2025 - 12:15
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मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने दी राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएँ, कहा — “छत्तीसगढ़ न्याय, समानता और सेवा की राह पर अग्रसर”

UNITED NEWS OF ASIA. अरुण पुरेना, बेमेतरा/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। राज्य की रजत जयंती पर जारी अपने संदेश में उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ न्याय, समानता और सेवा के सिद्धांतों पर निरंतर आगे बढ़ रहा है। यह दिन केवल उत्सव का नहीं, बल्कि आत्ममूल्यांकन और संवैधानिक दायित्वों के प्रति समर्पण की प्रेरणा देने वाला अवसर है।

 

मुख्य न्यायाधीश ने कहा —

“राज्य स्थापना दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि विकास की दिशा में केवल आर्थिक प्रगति पर्याप्त नहीं होती, बल्कि न्याय और समानता का सुदृढ़ तंत्र ही किसी राज्य को सच्चे अर्थों में समृद्ध बनाता है।”

उन्होंने अपने संदेश में न्यायपालिका की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उच्च न्यायालय की सर्वोच्च प्राथमिकता हर नागरिक को त्वरित, सुलभ और निष्पक्ष न्याय उपलब्ध कराना है। न्यायमूर्ति सिन्हा ने कहा कि न्यायालय को केवल कानून का प्रहरी नहीं, बल्कि समाज के विश्वास और न्याय के स्तंभ के रूप में देखा जाना चाहिए।

न्यायपालिका में सुधार और नवाचार की दिशा में कदम

मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने पिछले वर्षों में न्यायिक व्यवस्था को अधिक कुशल और पारदर्शी बनाने के लिए कई अभिनव पहल की हैं। डिजिटल फाइलिंग सिस्टम, ई-कोर्ट परियोजना और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी तकनीकी व्यवस्थाओं के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को भी न्याय सुलभ हो सका है।

उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में तकनीकीकरण और पारदर्शिता से न केवल समय की बचत हो रही है बल्कि न्याय में आम लोगों की भागीदारी भी बढ़ी है। न्यायमूर्ति सिन्हा के अनुसार, अब राज्य के ग्रामीण अंचलों तक विधिक सहायता तंत्र को सुदृढ़ करने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि हर जरूरतमंद व्यक्ति को न्याय की पहुंच सुनिश्चित की जा सके।

जनहित के मामलों में सक्रिय भूमिका

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने कहा कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने जनहित याचिकाओं (PIL) के माध्यम से कई सामाजिक, पर्यावरणीय और मानवाधिकार संबंधी मुद्दों में स्वतः संज्ञान लेकर नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की है।

उन्होंने कहा कि न्यायपालिका का यह कर्तव्य है कि वह कमजोर वर्गों, श्रमिकों, महिलाओं, बच्चों और समाज के उपेक्षित वर्गों की आवाज बने। न्यायालय ने सदैव इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाई है, जिससे राज्य में विधिक चेतना और विश्वास का वातावरण सुदृढ़ हुआ है।

समानता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा ही सर्वोच्च लक्ष्य

अपने संदेश में न्यायमूर्ति सिन्हा ने कहा कि राज्य के विकास की असली सफलता तब है जब प्रत्येक नागरिक को समान अवसर, समान अधिकार और समान न्याय मिले। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के लिए संविधान सर्वोच्च मार्गदर्शक है और उसकी प्रत्येक पहल इसी भावना से प्रेरित होती है।

उन्होंने कहा —

“छत्तीसगढ़ न्याय और सेवा की उस परंपरा को आगे बढ़ा रहा है जिसकी नींव समानता, संवैधानिकता और मानवीय गरिमा पर टिकी है। न्यायालय की यह प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों को भी इन मूल्यों की रक्षा के लिए प्रेरित करती रहेगी।”

न्यायिक समुदाय के प्रति आभार और प्रेरणा का संदेश

मुख्य न्यायाधीश ने न्यायपालिका से जुड़े सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, अधिवक्ताओं और न्यायिक सेवाओं के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायालय की उपलब्धियाँ उनके समर्पण और निष्ठा का परिणाम हैं। उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था को सशक्त और जनोन्मुख बनाने के लिए सभी का सहयोग आवश्यक है।

उन्होंने आगे कहा कि उच्च न्यायालय का लक्ष्य केवल निर्णय देना नहीं, बल्कि समाज में विश्वास, न्याय और सेवा की संस्कृति को प्रोत्साहित करना है। न्यायालय की यह भूमिका शासन, प्रशासन और जनता के बीच सामंजस्य का सेतु बनने की दिशा में कार्य करती है।

“जय छत्तीसगढ़” के साथ दिया प्रेरक संदेश

संदेश के अंत में न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने कहा —

“राज्य स्थापना दिवस हमें यह अवसर देता है कि हम अपने दायित्वों का पुनः मूल्यांकन करें और न्याय, समानता तथा सम्मान के मार्ग पर दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ें। यही हमारी संवैधानिक प्रतिबद्धता और सच्ची देशभक्ति है। जय छत्तीसगढ़।”

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का यह संदेश न केवल न्यायपालिका की उपलब्धियों का स्मरण कराता है, बल्कि राज्य के समग्र विकास में न्याय, संवेदना और समानता की अनिवार्य भूमिका को भी रेखांकित करता है।