प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवा रायपुर में ब्रह्माकुमारीज़ के ‘शांति शिखर’ भवन का किया लोकार्पण, सात वर्षों में तैयार हुआ देश का अनोखा आध्यात्मिक रिट्रीट सेंटर
राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवा रायपुर में ब्रह्माकुमारी संस्थान के शांति शिखर रिट्रीट सेंटर ‘एकेडमी फॉर ए पीसफुल वर्ल्ड’ का उद्घाटन किया। सात वर्षों में तैयार यह भवन राजस्थानी शैली में बना विश्व का पहला गुलाबी पत्थर (पिंक स्टोन) से निर्मित ब्रह्माकुमारी रिट्रीट सेंटर है, जिसमें ध्यान, आध्यात्मिक शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा के विविध कार्यक्रम आयोजित होंगे।
UNITED NEWS OF ASIA. रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर में ब्रह्माकुमारी संस्थान के भव्य “शांति शिखर रिट्रीट सेंटर – एकेडमी फॉर ए पीसफुल वर्ल्ड” का लोकार्पण किया। नवा रायपुर के सेक्टर-20 में स्थित यह विशाल भवन सात वर्षों के कठिन परिश्रम से तैयार हुआ है। इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका, ब्रह्माकुमारी संस्थान की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी जयंती, अतिरिक्त महासचिव डॉ. राजयोगी बीके मृत्युंजय, और रायपुर क्षेत्र की संचालिका राजयोगिनी बीके सविता सहित अनेक विशिष्टजन उपस्थित रहे।
प्रधानमंत्री मोदी ने भवन का लोकार्पण करते हुए इसे “शांति, शक्ति और संस्कार का केंद्र” बताया। उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्थान समाज में आध्यात्मिकता और सद्भावना की अलख जगाने का कार्य कर रहा है। शांति शिखर भवन आने वाली पीढ़ियों को ध्यान, अनुशासन और सेवा का मार्ग दिखाएगा।
सात वर्षों की तपस्या में बना शांति शिखर
शांति शिखर की नींव 15 जनवरी 2018 को तत्कालीन क्षेत्रीय निदेशिका राजयोगिनी बीके कमला के मार्गदर्शन में रखी गई थी। वर्ष 2022 में उनके देवलोकगमन से पहले भवन का 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो गया था। जोधपुर के कारीगरों ने सात वर्षों में राजस्थानी स्थापत्य शैली में इसे तैयार किया। इसके लिए 150 से अधिक ट्रकों में जोधपुर से पिंक स्टोन लाए गए।
भवन की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए भूमि की खुदाई कर गहरी स्लैब डाली गई, जिस पर 105 फीट ऊंचा, 150 फीट चौड़ा और 225 फीट लंबा विशाल ढांचा खड़ा किया गया है। यह भवन प्रेस टेंसाइल बीम तकनीक से बना है, जो सामान्यतः बड़े पुलों में प्रयुक्त होती है।
विश्व की पहली पिंक स्टोन ब्रह्माकुमारी इमारत
यह विश्व की पहली ऐसी ब्रह्माकुमारी इमारत है जो पूरी तरह गुलाबी पत्थर (पिंक स्टोन) से निर्मित है। पांच मंजिला इस भवन में दो हजार लोगों की क्षमता वाले एसी ऑडिटोरियम, दो सेमिनार हॉल, विशाल ध्यान कक्ष, लाइब्रेरी, अतिथि कक्ष, डाइनिंग हॉल और वीडियो थिएटर जैसी आधुनिक सुविधाएं हैं।
राजयोगिनी बीके सविता के अनुसार, यह भवन लगभग दो एकड़ भूमि में फैला है और देखने में राजस्थानी शैली के राजमहल जैसा प्रतीत होता है। यहां प्रवेश करते ही शांति, दिव्यता और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।
दान और सहयोग से बनी अद्भुत इमारत
शांति शिखर का निर्माण पूर्णतः जन सहयोग और संस्थान सदस्यों के योगदान से संभव हुआ। ब्रह्माकुमारीज़ के रायपुर जोन के तहत 50 सेवाकेंद्र और 500 उपसेवाकेंद्र संचालित हैं। प्रत्येक सदस्य ने 2018 से प्रतिदिन कम से कम ₹1 का दान दिया। इस सामूहिक संकल्प से लगभग 11,000 सदस्यों के सहयोग से यह भव्य रिट्रीट सेंटर साकार हुआ।
राजयोगी ओम प्रकाश भाई और राजयोगिनी कमला के संकल्प ने इसे “शांति और सेवा के प्रतीक” के रूप में आकार दिया।
समाज के हर वर्ग के लिए कार्यक्रम
शांति शिखर में समाज के सभी वर्गों — बच्चों, युवाओं, महिलाओं और ग्रामीणों — के लिए विविध कार्यक्रम आयोजित होंगे। इनमें शामिल हैं:
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राजयोग मेडिटेशन एवं आध्यात्मिक शिक्षा के नि:शुल्क कोर्स
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स्ट्रेस मैनेजमेंट और जीवन कौशल शिविर
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महिला सशक्तिकरण और मूल्यनिष्ठ शिक्षा परियोजनाएं
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पर्यावरण संरक्षण हेतु पौधारोपण, जल-संरक्षण और जैविक खेती पर कार्यशालाएं
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हृदय रोग, डायबिटीज और नशामुक्ति पर जनजागरूकता कार्यक्रम
शांति और आत्मचिंतन का केंद्र बनेगा रिट्रीट सेंटर
शांति शिखर का उद्देश्य केवल भवन निर्माण नहीं, बल्कि आंतरिक शांति और मानवीय मूल्य पुनर्स्थापना है। यहां देश-विदेश से आने वाले लोग राजयोग ध्यान के माध्यम से तनावमुक्त जीवन, आत्मबल और सकारात्मकता का अनुभव करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने उद्बोधन में कहा — “शांति शिखर न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे भारत की आध्यात्मिक धरोहर बनेगा। यह वह स्थान होगा जहां मनुष्य स्वयं को और परमात्मा को निकट से अनुभव करेगा।”
राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी इस अवसर पर संस्थान के योगदान की सराहना करते हुए इसे “नवा रायपुर की शांति नगरी का गौरव” बताया।
शांति शिखर अब केवल एक भवन नहीं, बल्कि एक संदेश है — मानवता, अध्यात्म और शांति का।
यह रिट्रीट सेंटर आने वाले वर्षों में न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे विश्व के लिए शांति का प्रेरक केंद्र बनेगा।