सशक्त बचपन की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़, पोषण और बाल संरक्षण में बना राष्ट्रीय मॉडल

छत्तीसगढ़ में बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा और संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों के आधुनिकीकरण, कुपोषण में कमी, पोषण पखवाड़ा में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान, मिशन वात्सल्य के विस्तार और बाल विवाह रोकथाम जैसे प्रयासों से राज्य बाल विकास के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है।

Aug 6, 2026 - 16:58
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सशक्त बचपन की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़, पोषण और बाल संरक्षण में बना राष्ट्रीय मॉडल

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l बच्चों का स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और सुरक्षा किसी भी राज्य के समग्र विकास की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला मानी जाती है। इसी सोच के साथ छत्तीसगढ़ में बच्चों के सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता देते हुए अनेक योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। राज्य में आंगनबाड़ी सेवाओं के विस्तार, पोषण सुधार, बाल संरक्षण और बाल विवाह रोकथाम के क्षेत्र में हुए कार्यों ने प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

प्रदेश में 11,490 आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक स्वरूप देने का कार्य तेजी से चल रहा है। इन केंद्रों में बिल्डिंग एज लर्निंग एड (BaLA) पेंटिंग, पोषण वाटिका, खेल आधारित शिक्षण गतिविधियां और बच्चों के अनुकूल वातावरण विकसित किया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा के साथ बेहतर पोषण और सर्वांगीण विकास का अवसर मिले।

मनरेगा के अभिसरण से 2,337 नए आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण को स्वीकृति दी गई है। वहीं प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत 191 नए आंगनबाड़ी केंद्र शुरू किए गए हैं। नियद नेल्ला नार 2.0 कार्यक्रम के माध्यम से 10 जिलों के 12,964 आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों और माताओं तक विभिन्न सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। इसके साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है, जिससे सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच दोनों में सुधार हुआ है।

पोषण के क्षेत्र में भी छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की हैं। पोषण ट्रैकर ऐप के आंकड़ों के अनुसार 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों में स्टंटिंग, अंडरवेट और कम वजन के मामलों में लगातार कमी आई है। दिसंबर 2023 की तुलना में जून 2026 तक बौनापन की दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार यह सफलता नियमित मॉनिटरिंग, पोषण प्रबंधन और सामुदायिक सहभागिता का परिणाम है।

राष्ट्रीय पोषण माह और पोषण पखवाड़ा के दौरान भी छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन देशभर में उत्कृष्ट रहा। वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रति आंगनबाड़ी गतिविधियों के आधार पर राज्य ने राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान प्राप्त किया। अप्रैल 2025 के पोषण पखवाड़ा और वर्ष 2026 के दौरान आयोजित लाखों पोषण गतिविधियों ने जनजागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्थानीय स्तर पर पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के लिए रेडी-टू-ईट इकाइयों की स्थापना की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

बाल संरक्षण के क्षेत्र में मिशन वात्सल्य के तहत अनाथ, परित्यक्त और विशेष संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के लिए सेवाओं का विस्तार किया गया है। राज्य में बाल देखरेख संस्थाओं की संख्या बढ़ी है, जबकि मुख्यमंत्री बाल उदय योजना, चाइल्ड हेल्पलाइन, दत्तक ग्रहण और स्पॉन्सरशिप जैसी योजनाओं से हजारों बच्चों को लाभ मिला है। इससे जरूरतमंद बच्चों को सुरक्षित वातावरण और बेहतर भविष्य उपलब्ध कराने में सहायता मिली है।

बाल विवाह रोकथाम के क्षेत्र में भी राज्य ने महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है। बाल विवाह प्रतिरोध अधिकारियों की संख्या बढ़ाई गई है और बड़ी संख्या में बाल विवाहों को समय रहते रोका गया है। इससे बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

बच्चों के पोषण, शिक्षा, सुरक्षा और समग्र विकास को लेकर किए जा रहे ये प्रयास छत्तीसगढ़ को बाल विकास के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित कर रहे हैं। आधुनिक आंगनबाड़ी व्यवस्था, पोषण अभियान, बाल संरक्षण सेवाओं का विस्तार और सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम भविष्य की स्वस्थ, शिक्षित और सशक्त पीढ़ी तैयार करने की दिशा में मजबूत आधार तैयार कर रहे हैं।