स्वागत से संवर रहा बचपन, आंगनबाड़ी केंद्र बन रहे बच्चों के सर्वांगीण विकास की पहली पाठशाला
छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी केंद्रों को प्रारंभिक शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य और बाल विकास के समग्र केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। बलरामपुर जिले के स्कूल पारा भनौरा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र ने स्वागत चार्ट, खेल-आधारित शिक्षण और पौष्टिक आहार जैसी नवाचारी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास का प्रेरक मॉडल प्रस्तुत किया है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l बच्चों के जीवन के शुरुआती वर्ष उनके व्यक्तित्व और भविष्य की मजबूत नींव तैयार करते हैं। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी केंद्रों को केवल पोषण वितरण तक सीमित न रखकर प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार और बाल विकास के समग्र केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। राज्यभर के आंगनबाड़ी केंद्रों में नवाचार आधारित गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को सीखने के लिए सुरक्षित, आनंदमय और प्रेरणादायक वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है।
बलरामपुर जिले के स्कूल पारा भनौरा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र इस दिशा में एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है। यहां नन्हे बच्चों के लिए सीखने, खेलने, संवाद करने और आत्मविश्वास विकसित करने का ऐसा वातावरण तैयार किया गया है, जिससे वे प्रारंभिक शिक्षा को आनंद के साथ अपनाते हैं।
इस केंद्र की सबसे विशेष पहल स्वागत चार्ट है। केंद्र में आने वाला प्रत्येक बच्चा अपनी पसंद के अनुसार चार्ट पर बने विकल्पों में से किसी एक का चयन करता है। इनमें गले मिलना, ताली देना, हाथ मिलाना, मुट्ठी मिलाना, कोहनी मिलाना और नमस्ते जैसे विकल्प शामिल हैं। बच्चा जिस तरीके को चुनता है, उसी शैली में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उसका स्वागत करती हैं। इस पहल से बच्चों का संकोच कम होता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और वे केंद्र में प्रवेश करते ही उत्साह के साथ गतिविधियों में शामिल हो जाते हैं। इससे उनके सामाजिक व्यवहार, संवाद कौशल और भावनात्मक विकास को भी प्रोत्साहन मिल रहा है।
केंद्र में प्रतिदिन प्रार्थना, स्वागत गीत, समूह गतिविधियां, शैक्षणिक खेल, कहानी-कथन, चित्र पहचान, रंग पहचान, अक्षर एवं अंक ज्ञान जैसी विविध गतिविधियां संचालित की जाती हैं। यहां पारंपरिक रटने की पद्धति के स्थान पर खेल और गतिविधि आधारित शिक्षण को अपनाया गया है। गीत, कविताओं, लयात्मक अभ्यास और रचनात्मक खेलों के माध्यम से बच्चे सहज रूप से नई बातें सीख रहे हैं। इससे उनके मानसिक, भाषाई, सामाजिक और बौद्धिक विकास के साथ-साथ नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और समूह में कार्य करने की आदत भी विकसित हो रही है।
बच्चों के पोषण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। केंद्र में निर्धारित मेन्यू के अनुसार पौष्टिक नाश्ता और गर्म पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जाता है, जिससे बच्चों को आवश्यक पोषक तत्व और ऊर्जा मिलती है। इसके अलावा बच्चों की नियमित ऊंचाई, वजन, स्वास्थ्य स्थिति और विकास की निगरानी की जाती है। गर्भवती एवं धात्री माताओं को भी संतुलित आहार, स्वच्छता, स्तनपान, टीकाकरण और शिशु देखभाल से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी देकर जागरूक किया जा रहा है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं बच्चों के लिए परिवार जैसा स्नेहपूर्ण और सुरक्षित वातावरण तैयार करती हैं। यही कारण है कि बच्चे बिना किसी झिझक के केंद्र में आते हैं और पूरे उत्साह के साथ सीखने की प्रक्रिया में भाग लेते हैं। अभिभावकों का कहना है कि खेल-आधारित शिक्षण, आत्मीय व्यवहार और स्वागत चार्ट जैसी गतिविधियों ने बच्चों में सीखने के प्रति रुचि और आत्मविश्वास दोनों बढ़ाया है। बच्चे घर लौटकर गीत, कविताएं और दिनभर सीखी गई नई बातें उत्साहपूर्वक साझा करते हैं।
स्कूल पारा भनौरा का आंगनबाड़ी केंद्र यह साबित करता है कि यदि बच्चों को स्नेहपूर्ण वातावरण, नवाचारी शिक्षण पद्धति और संतुलित पोषण मिले, तो उनकी प्रारंभिक शिक्षा अधिक प्रभावी बन सकती है। ऐसे आंगनबाड़ी केंद्र आज बाल विकास, स्वास्थ्य, पोषण और संस्कार के सशक्त मॉडल के रूप में उभर रहे हैं तथा बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव तैयार कर रहे हैं।