साइबर अपराध के खिलाफ छत्तीसगढ़ में नई पहल, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने ‘साइबर संकल्प’ का किया शुभारंभ
रायपुर के पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने 9 मॉड्यूल वाले ‘साइबर संकल्प’ वीडियो पाठ्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में 500 से अधिक विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर संपर्क करने और जागरूकता को गांव-गांव तक पहुंचाने की अपील की गई। एक करोड़ रुपये से अधिक की डिजिटल अरेस्ट ठगी के पीड़ित ने अनुभव साझा किया और समय पर सूचना देने से 60 लाख रुपये वापस मिलने की जानकारी दी।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में बढ़ते साइबर अपराधों के खिलाफ जन-जागरूकता को मजबूत करने के उद्देश्य से पुलिस द्वारा चलाए जा रहे साइबर जागृति अभियान को नई गति मिली है। रायपुर के पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने ‘साइबर संकल्प’ नाम से तैयार किए गए 9 मॉड्यूल वाले वीडियो पाठ्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय और रायपुर के विभिन्न महाविद्यालयों के 500 से अधिक विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया और साइबर अपराध, डिजिटल सुरक्षा तथा ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव को लेकर संवाद किया।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि डिजिटल तकनीक आज बैंकिंग, खरीदारी, शिक्षा, व्यापार और सरकारी सेवाओं समेत जीवन के कई क्षेत्रों का अहम हिस्सा बन चुकी है। डिजिटल सुविधाओं के विस्तार के साथ साइबर अपराध के नए तरीके भी सामने आ रहे हैं। ऐसे में डिजिटल तकनीक का उपयोग करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक होना जरूरी है। ‘साइबर संकल्प’ के तहत तैयार किए गए 9 वीडियो मॉड्यूल में साइबर ठगी के अलग-अलग तरीकों, डिजिटल सुरक्षा और बचाव के व्यावहारिक उपायों की जानकारी सरल भाषा में दी जाएगी। प्रत्येक मॉड्यूल करीब 5 से 6 मिनट का बताया गया है।
कार्यक्रम के दौरान विजय शर्मा ने विद्यार्थियों से स्वयं साइबर सुरक्षा के उपाय सीखने और परिवार तथा समाज के अन्य लोगों को भी जागरूक करने की अपील की। उन्होंने कहा कि साइबर जागरूकता को केवल शहरों तक सीमित न रखते हुए गांव-गांव तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने सोशल मीडिया, फर्जी कॉल, ओटीपी, बैंकिंग धोखाधड़ी, संदिग्ध लिंक और डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों को लेकर लोगों को सतर्क रहने का संदेश दिया।
विजय शर्मा ने साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल कार्रवाई के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी होती है तो घबराने या देरी करने के बजाय तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए। शुरुआती समय में पुलिस को सूचना मिलने से ठगी की रकम को रोकने और उसे पीड़ित तक वापस पहुंचाने की कार्रवाई में मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम में एक साइबर ठगी के पीड़ित ने भी अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि उन्हें एक करोड़ रुपये से अधिक की डिजिटल अरेस्ट ठगी का सामना करना पड़ा था। समय रहते पुलिस से संपर्क करने के कारण गोल्डन ऑवर में कार्रवाई संभव हुई और कथित रूप से 60 लाख रुपये की राशि वापस प्राप्त की जा सकी। इस अनुभव के माध्यम से विद्यार्थियों को समझाया गया कि साइबर धोखाधड़ी होने के बाद शुरुआती समय में शिकायत करना बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।
कार्यक्रम में साइबर क्राइम वालंटियर पहल की जानकारी भी दी गई। केंद्रीय गृह मंत्रालय और इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) की इस पहल के माध्यम से नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने और साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता फैलाने पर जोर दिया जा रहा है। विद्यार्थियों से भी साइबर सुरक्षा के दूत के रूप में अपने आसपास के लोगों को जागरूक करने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अमित कुमार, पुलिस आयुक्त रायपुर डॉ. संजीव शुक्ला, पुलिस महानिरीक्षक प्रशांत अग्रवाल, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अमित तुकाराम कांबले, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला सहित पुलिस और विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक तथा विद्यार्थी मौजूद रहे। अधिकारियों ने साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप और उनसे बचाव के जरूरी उपायों की जानकारी दी। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ पुलिस का साइबर जागृति अभियान 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चलाया जा रहा है, जिसके तहत प्रदेशभर में साइबर सुरक्षा को लेकर जन-जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।