तंत्र क्रिया के आरोप में छात्र को टीसी देने के मामले में आयोग ने लिया संज्ञान, पढ़ाई जारी रखने के निर्देश
प्रयास विद्यालय रायपुर में कक्षा 9वीं के छात्र को टीसी देकर विद्यालय से बाहर किए जाने के मामले में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने संज्ञान लिया है। पालक के आवेदन में छात्र पर तंत्र क्रिया में संलिप्त होने का आरोप लगाए जाने की बात कही गई है, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है। आयोग ने टीसी निरस्त कर छात्र की पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी रखने के निर्देश दिए हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l प्रयास विद्यालय, रायपुर में कक्षा 9वीं के एक छात्र को टीसी जारी कर विद्यालय से बाहर किए जाने के मामले में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने गंभीरता से संज्ञान लिया है। मामला आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के संज्ञान में आने के बाद आयोग ने छात्र के शैक्षणिक हित को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। पालक की ओर से दिए गए आवेदन में छात्र को विद्यालय से निष्कासित कर टीसी जारी किए जाने की शिकायत की गई है।
आवेदन में यह आरोप भी सामने आया है कि छात्र के तंत्र क्रिया में संलिप्त होने के कथित आरोप के चलते उसके खिलाफ विद्यालय स्तर पर कार्रवाई की गई। हालांकि, छात्र के तंत्र क्रिया में संलिप्त होने संबंधी आरोप की कोई पुष्टि नहीं हुई है। पालक ने आरोप लगाया कि छात्र को समुचित जानकारी दिए बिना कक्षा से बाहर कर टीसी प्रदान की गई। इसके बाद पालक ने विद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच और उचित कार्रवाई की मांग आयोग के समक्ष रखी।
आवेदन का अवलोकन करने के बाद आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 की धारा 13(1)(ज) एवं धारा 14 के तहत प्रकरण का संज्ञान लिया। आयोग की ओर से सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, रायपुर को मामले की विस्तृत जांच कर तथ्यात्मक और लिखित प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने मामले से जुड़े सभी तथ्यों और विद्यालय स्तर पर की गई कार्रवाई की जांच करने को कहा है।
आयोग की अध्यक्ष ने सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास से दूरभाष पर चर्चा कर मामले में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए। आयोग की ओर से छात्र की टीसी निरस्त करने और उसकी पढ़ाई दोबारा जारी रखने के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच और अंतिम निराकरण की प्रक्रिया के दौरान छात्र की शिक्षा किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
मामले की सुनवाई और तथ्यों की जांच के लिए प्रयास विद्यालय, रायपुर के प्राचार्य एवं अधीक्षक को आयोग की आपातकालीन खंडपीठ के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। दोनों अधिकारियों को 21 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे आयोग कार्यालय में संबंधित दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर अपना पक्ष प्रस्तुत करना होगा। आयोग इस दौरान विद्यालय प्रबंधन की ओर से छात्र को टीसी जारी किए जाने के कारणों और अपनाई गई प्रक्रिया से संबंधित जानकारी लेगा।
आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने निर्देशित किया है कि प्रकरण के अंतिम निराकरण तक छात्र के शैक्षणिक हितों को प्राथमिकता दी जाए और उसकी पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी रखी जाए। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर की जाएगी। फिलहाल आयोग की ओर से छात्र की शिक्षा जारी रखने और पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।