बिहार की 48 वर्षीय महिला की अंबेडकर अस्पताल में सफल बाईपास सर्जरी, 500 से अधिक शुगर के बाद किया गया ऑपरेशन

रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय में बिहार के मधुबनी जिले की 48 वर्षीय महिला की सफल कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी की गई। मरीज के हृदय की तीनों प्रमुख धमनियों में गंभीर ब्लॉकेज था और पंपिंग क्षमता करीब 40 प्रतिशत थी। ब्लड शुगर 500 mg/dL से अधिक होने के कारण पहले उसे नियंत्रित किया गया, जिसके बाद बीटिंग हार्ट CABG की गई। आयुष्मान योजना के तहत हुए उपचार के बाद मरीज की रिकवरी अच्छी रही और दूसरे दिन से वह चलने लगी।

Sep 3, 2026 - 08:29
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बिहार की 48 वर्षीय महिला की अंबेडकर अस्पताल में सफल बाईपास सर्जरी, 500 से अधिक शुगर के बाद किया गया ऑपरेशन

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में बिहार के मधुबनी जिले की 48 वर्षीय महिला की सफल कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी (CABG) की गई। मरीज के हृदय की तीनों प्रमुख कोरोनरी धमनियों में गंभीर ब्लॉकेज था, जिसे चिकित्सकीय भाषा में ट्रिपल वेसल डिजीज कहा जाता है। इसके साथ ही मरीज के हृदय की पंपिंग क्षमता करीब 40 प्रतिशत थी। विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. कृष्णकांत साहू और उनकी टीम ने मरीज की बीटिंग हार्ट कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी सफलतापूर्वक की। इस प्रक्रिया में बाईपास के लिए मैमरी आर्टरी का इस्तेमाल किया गया, जिसे लंबे समय तक प्रभावी रहने वाले आर्टेरियल ग्राफ्ट के तौर पर माना जाता है।

मरीज की सर्जरी मिडलाइन स्टर्नोटोमी तकनीक से की गई, जिसमें सीने की मध्य हड्डी यानी स्टर्नम को सावधानीपूर्वक खोलकर हृदय तक पहुंच बनाई जाती है। कोरोनरी बाईपास सर्जरी में यह एक स्थापित ऑपरेटिव तकनीक है। सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी भी अच्छी रही। ऑपरेशन के दिन ही मरीज होश में आ गई और शाम को हल्का नाश्ता किया। इसके बाद ऑपरेशन के दूसरे दिन से ही उसने चलना-फिरना शुरू कर दिया। अस्पताल के अनुसार अब मरीज की स्थिति अच्छी है और उसे डिस्चार्ज किया जा रहा है।

मरीज के उपचार में सबसे बड़ी चुनौती उसका अत्यधिक अनियंत्रित ब्लड शुगर था। अस्पताल में भर्ती किए जाने के समय उसका ब्लड शुगर 500 mg/dL से अधिक था। ऐसी स्थिति में तत्काल बाईपास सर्जरी करना जोखिमपूर्ण हो सकता था। चिकित्सकीय टीम ने पहले ब्लड शुगर को नियंत्रित किया और मरीज की स्थिति को सर्जरी के लिए उपयुक्त बनाने के बाद ही ऑपरेशन किया। इस सावधानी के बाद बीटिंग हार्ट CABG की प्रक्रिया पूरी की गई।

मरीज के अनुसार करीब डेढ़ महीने पहले उसे पहली बार सीने में दर्द हुआ था। मधुबनी में चिकित्सकीय परामर्श लेने के बाद हृदय संबंधी विशेषज्ञ सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे गैस और एसिडिटी की दवाएं दी गई थीं। कुछ दिनों बाद दोबारा सीने में दर्द होने पर परिजन उसे दरभंगा के बड़े अस्पताल ले गए। वहां एंजियोग्राफी में हृदय की तीनों प्रमुख धमनियों में ब्लॉकेज का पता चला और बाईपास सर्जरी की सलाह दी गई। परिवार पटना में ऑपरेशन कराने की तैयारी कर रहा था, तभी रायपुर में रहने वाले रिश्तेदार ने अंबेडकर अस्पताल के हार्ट सर्जरी विभाग की जानकारी दी। इसके बाद एंजियोग्राफी की सीडी लेकर परिजन रायपुर पहुंचे।

डॉ. कृष्णकांत साहू के अनुसार मरीज बिहार की निवासी थी, इसलिए यह जानना जरूरी था कि बिहार के आयुष्मान कार्ड के आधार पर छत्तीसगढ़ में उपचार का लाभ मिल सकेगा या नहीं। आयुष्मान योजना कार्यालय से पुष्टि होने के बाद मरीज को अंबेडकर अस्पताल में भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। इस तरह आयुष्मान योजना के तहत उसकी जटिल हृदय सर्जरी संभव हो सकी।

डॉ. साहू ने बताया कि अनियंत्रित मधुमेह, बढ़ता वजन, तंबाकू का सेवन, पारिवारिक इतिहास, निष्क्रिय जीवनशैली और अस्वास्थ्यकर खान-पान जैसी स्थितियां महिलाओं में भी कम उम्र में हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकती हैं। उन्होंने महिलाओं से सीने में दर्द, सांस फूलना या अत्यधिक थकान जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करने और समय पर चिकित्सकीय जांच कराने की अपील की। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार यहां ओपन हार्ट सर्जरी, कोरोनरी बाईपास, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी की सुविधाएं उपलब्ध हैं। डीन डॉ. विवेक चौधरी और अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने कहा कि बिहार सहित आसपास के राज्यों से भी मरीज जटिल हृदय उपचार के लिए यहां पहुंच रहे हैं, जो संस्थान की चिकित्सा सेवाओं के प्रति बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।