बेमेतरा में फार्मासिस्ट बना डॉक्टर, बेखौफ कर रहा मरीजों का इलाज, सीएमएचओ से हुई शिकायत

बेमेतरा जिले के ग्राम जेवरा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ फार्मासिस्ट द्वारा डॉक्टर बनकर इलाज करने और दवा पर्ची लिखने का मामला सामने आया है। समाजसेवी की शिकायत पर सीएमएचओ ने जांच के आदेश दिए हैं।

Jan 13, 2026 - 17:08
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बेमेतरा में फार्मासिस्ट बना डॉक्टर, बेखौफ कर रहा मरीजों का इलाज, सीएमएचओ से हुई शिकायत

UNITED NEWS OF ASIA. अरुण पुरेना बेमेतरा | बेमेतरा जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक फार्मासिस्ट डॉक्टर बनकर मरीजों का इलाज करता हुआ पाया गया। मामला जिले के ग्राम जेवरा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का है, जहां पदस्थ फार्मासिस्ट नियमों को ताक पर रखकर खुलेआम मरीजों का उपचार कर रहा है और उन्हें दवाइयों की पर्ची भी लिख रहा है।

जानकारी के अनुसार, फार्मासिस्ट अपने केबिन में बैठकर मरीजों की जांच कर रहा था, जो कि उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। इस लापरवाही से न केवल मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है, बल्कि अस्पताल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों की नियमित मॉनिटरिंग व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसे संवेदनशील संस्थान में इस तरह की अनियमितता स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती नजर आ रही है।

मामले को लेकर एक समाजसेवी ने पूरे घटनाक्रम की लिखित शिकायत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) बेमेतरा से की है। शिकायत पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि फार्मासिस्ट न सिर्फ मरीजों का इलाज कर रहा है, बल्कि दवाइयों का प्रिस्क्रिप्शन भी खुद लिख रहा है, जो कि कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है।

इस पूरे मामले पर सीएमएचओ डॉ. अमृतलाल रोहडेलकर ने संज्ञान लेते हुए कहा है कि शिकायत प्राप्त हुई है और इसे गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने बताया कि संबंधित बीएमओ (ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर) को पूरे प्रकरण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

सीएमएचओ ने यह भी स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत प्रत्येक कर्मचारी की जिम्मेदारियां तय होती हैं और किसी भी कर्मचारी द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्य करना स्वीकार्य नहीं है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर एक बार फिर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। ग्रामीण क्षेत्र के मरीज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भरोसा कर इलाज के लिए पहुंचते हैं, ऐसे में इस तरह की लापरवाही उनकी जान के लिए खतरा बन सकती है। अब देखना होगा कि जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग क्या ठोस कार्रवाई करता है।