बैटरी चालित ट्राइसाइकिल से बदली नर्मेश की जिंदगी, आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बने मोहला के दिव्यांग हितग्राही

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के मंझियापुर निवासी नर्मेश कुमार धावड़े को समाज कल्याण विभाग की योजना के तहत बैटरी चालित ट्राइसाइकिल मिलने से उनका जीवन पूरी तरह बदल गया है। अब वे अपनी परचून दुकान स्वयं संचालित कर रहे हैं और अन्य दिव्यांगजनों के लिए आत्मनिर्भरता की प्रेरणा बन गए हैं।

Jul 28, 2026 - 15:40
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बैटरी चालित ट्राइसाइकिल से बदली नर्मेश की जिंदगी, आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बने मोहला के दिव्यांग हितग्राही

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ शासन की दिव्यांगजन हितैषी योजनाएं जरूरतमंद लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के विकासखंड मोहला स्थित ग्राम मंझियापुर निवासी नर्मेश कुमार धावड़े इसका प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आए हैं। 76 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद उन्होंने परिस्थितियों के आगे हार नहीं मानी और आज बैटरी चालित ट्राइसाइकिल की मदद से आत्मनिर्भर जीवन जीते हुए अन्य लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं।

नर्मेश कुमार धावड़े गांव में एक छोटी परचून दुकान संचालित करते हैं। इसी दुकान से उनके परिवार का जीवनयापन होता है। हालांकि दिव्यांगता के कारण उन्हें प्रतिदिन दुकान तक पहुंचने और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। कई बार उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे आत्मविश्वास भी प्रभावित होता था। सामाजिक चुनौतियों और नकारात्मक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने हौसले को कमजोर नहीं होने दिया और आत्मनिर्भर बनने का संकल्प बनाए रखा।

इसी दौरान उन्हें समाज कल्याण विभाग की उस योजना की जानकारी मिली, जिसके तहत 70 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले पात्र हितग्राहियों को बैटरी चालित ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन प्रस्तुत किया। आवेदन की जांच के बाद जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें बैटरी चालित ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई।

ट्राइसाइकिल मिलने के बाद नर्मेश के जीवन में उल्लेखनीय परिवर्तन आया। अब वे बिना किसी सहायता के अपनी दुकान तक आसानी से पहुंचते हैं, आवश्यक सामान की खरीदारी कर लेते हैं और अपने दैनिक कार्य स्वयं करते हैं। इससे न केवल उनकी कार्यक्षमता बढ़ी है, बल्कि उनकी आय में भी वृद्धि हुई है। परिवार को आर्थिक मजबूती मिली है और आत्मनिर्भर जीवन जीने का आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

नर्मेश बताते हैं कि पहले घर से बाहर निकलना भी चुनौतीपूर्ण था, लेकिन अब वे नियमित रूप से अपने व्यवसाय का संचालन कर रहे हैं। उनका मानना है कि दिव्यांगता किसी व्यक्ति की कमजोरी नहीं होती, बल्कि आत्मविश्वास, इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास के बल पर हर चुनौती का सामना किया जा सकता है। वे अन्य दिव्यांगजनों को भी जीवन में आगे बढ़ने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करते हैं।

आज नर्मेश अपने क्षेत्र में दिव्यांगजनों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुके हैं। वे लोगों को शिक्षा, आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान का महत्व समझाते हैं तथा कठिन परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं हारने का संदेश देते हैं। उनका मानना है कि यदि सही समय पर सरकारी योजनाओं का लाभ मिले, तो दिव्यांगजन भी समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर सम्मानपूर्वक जीवन जी सकते हैं।

नर्मेश कुमार धावड़े ने इस सकारात्मक बदलाव के लिए छत्तीसगढ़ शासन, जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं ने उनके जीवन को नई दिशा दी है। बैटरी चालित ट्राइसाइकिल उनके लिए केवल एक साधन नहीं, बल्कि सम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक जरूरतमंद दिव्यांगजनों तक पहुंचे, ताकि वे भी स्वावलंबी बनकर सम्मानजनक जीवन जी सकें।