बालोद में विकसित भारत रोजगार व आजीविका गारंटी मिशन-ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) योजना से 125 दिनों का रोजगार
बालोद जिले में ग्रामीणों के लिए विकसित भारत रोजगार व आजीविका गारंटी मिशन-ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) योजना लागू की गई। अब ग्रामीणों को वर्ष में 125 दिनों का रोजगार मिलेगा। योजना में समय पर भुगतान, धान की फसल के दौरान सरकारी काम बंद रखने और जल संरक्षण जैसे विशेष प्रावधान शामिल हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. परस साहू, बालोद। शासन की महत्वाकांक्षी नई योजना विकसित भारत रोजगार व आजीविका गारंटी मिशन-ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) अधिनियम को बालोद जिले के ग्रामीणों ने बड़े उत्साह के साथ स्वीकार किया है। यह योजना मनरेगा का आधुनिक और उन्नत रूप है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ाना और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करना है।
बालोद जिले के ग्राम तरौद में योजना के क्रियान्वयन से ग्रामीणों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। ग्राम के निवासियों ने बताया कि पहले मनरेगा में 100 दिनों का रोजगार मिलता था, जिसे अब बढ़ाकर 125 दिनों का किया गया है। सबसे बड़ी खासियत इसका समय पर भुगतान है। मजदूर अब काम करने के एक सप्ताह के भीतर ही मजदूरी प्राप्त कर सकेंगे। साथ ही, यदि काम उपलब्ध न हो, तो भत्ते का प्रावधान सुरक्षा कवच के रूप में ग्रामीणों को सुनिश्चित किया गया है।
ग्राम में डबरी निर्माण, तालाबों के सुदृढ़ीकरण और नहर-नाली निर्माण से जल स्तर में सुधार होगा, जिससे खेती को सीधा लाभ मिलेगा। इसके अलावा, योजना में विशेष प्रावधान है कि पीक सीजन (धान की फसल) के दौरान 60 दिनों तक सरकारी काम बंद रहेगा, जिससे किसान और मजदूर दोनों के लिए खेती और रोजगार में संतुलन बना रहेगा।
ग्रामवासियों ने योजना की सराहना करते हुए शासन-प्रशासन का धन्यवाद ज्ञापित किया। उनका कहना है कि जब गांव में ही रोजगार, समय पर भुगतान और मूलभूत संरचनाएं उपलब्ध होंगी, तो कोई भी अन्यत्र काम की तलाश में नहीं जाएगा। इस योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, पलायन रुकेगा और स्थानीय विकास को गति मिलेगी।
विकसित भारत जी राम जी योजना न केवल रोजगार के अवसर बढ़ा रही है, बल्कि जल संरक्षण और कृषि कार्य में भी मदद कर रही है। ग्राम तरौद के ग्रामीणों की प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि यह योजना वास्तव में उनके जीवन और आजीविका में सकारात्मक बदलाव ला रही है। शासन की यह पहल ग्रामीण विकास और किसान सशक्तिकरण के लिए एक ठोस कदम साबित हो रही है।