बालोद के ठेकवाडीह में मिला इतिहास का खजाना, गोंड शासकों की वंशावली और ब्रिटिशकालीन दस्तावेज उजागर
बालोद जिले के ठेकवाडीह गांव में ज्ञान भारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के दौरान दुर्लभ ऐतिहासिक दस्तावेज मिले हैं। इनमें गोंड शासकों की वंशावली और ब्रिटिशकालीन अभिलेख शामिल हैं, जिन्हें अब संरक्षित और डिजिटाइज किया जाएगा।
UNITED NEWS OF ASIA. सुनील साहू, बालोद l छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से इतिहास प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। जिले के गुरूर विकासखंड अंतर्गत ग्राम ठेकवाडीह में चल रहे “ज्ञान भारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण” के दौरान दुर्लभ और ऐतिहासिक पांडुलिपियों का खजाना मिला है। इन दस्तावेजों में गोंड शासकों की विस्तृत वंशावली और ब्रिटिश शासनकाल से जुड़े महत्वपूर्ण अभिलेख शामिल हैं, जो क्षेत्र के समृद्ध अतीत को उजागर करते हैं।
डिप्टी कलेक्टर एवं सहायक नोडल अधिकारी प्राची ठाकुर ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि सर्वेक्षण टीम को यह महत्वपूर्ण सामग्री ग्राम ठेकवाडीह निवासी डॉ. प्रकाश पतंगीवार के माध्यम से प्राप्त हुई। डॉ. पतंगीवार ने अपने पास सुरक्षित रखी प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियों को प्रशासन के सामने प्रस्तुत किया, जिससे इस ऐतिहासिक खोज का मार्ग प्रशस्त हुआ।
प्राप्त दस्तावेजों की विशेषता यह है कि इनमें गोंड शासकों की वंशावली का विस्तार से उल्लेख किया गया है। गोंड राजाओं का इतिहास मध्य भारत के आदिवासी शासन की एक महत्वपूर्ण कड़ी रहा है, लेकिन इसके प्रमाणिक दस्तावेज बहुत कम उपलब्ध हैं। ऐसे में यह खोज इतिहासकारों के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत साबित हो सकती है।
इसके अलावा, इन पांडुलिपियों में ब्रिटिश शासनकाल से जुड़े कई प्रशासनिक और सामाजिक अभिलेख भी शामिल हैं। ये दस्तावेज उस समय की शासन व्यवस्था, राजस्व प्रणाली और सामाजिक ढांचे को समझने में मदद करेंगे। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि स्थानीय स्तर पर ब्रिटिश शासन का प्रभाव किस प्रकार रहा और किस तरह की व्यवस्थाएं लागू की गई थीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की पांडुलिपियां न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होती हैं, बल्कि वे स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और प्रशासनिक प्रणाली की भी झलक प्रस्तुत करती हैं। ठेकवाडीह में मिली यह सामग्री क्षेत्रीय इतिहास को प्रमाणिक रूप से समझने में एक नई दिशा दे सकती है।
प्रशासन ने इन अमूल्य दस्तावेजों के संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए इनके डिजिटलीकरण की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। इससे इन पांडुलिपियों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा और शोधकर्ताओं को भी आसानी से इन तक पहुंच मिल सकेगी। डिजिटल स्वरूप में उपलब्ध होने से यह धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुलभ होगी।
ज्ञान भारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के तहत जिले में लगातार कार्य जारी है। इस अभियान का उद्देश्य देशभर में बिखरी हुई प्राचीन पांडुलिपियों को खोजकर उनका संरक्षण करना है। बालोद जिले में इस दिशा में मिल रही सफलता से यह उम्मीद बढ़ गई है कि आगे भी कई और महत्वपूर्ण दस्तावेज सामने आएंगे।
इस खोज ने न केवल बालोद जिले का गौरव बढ़ाया है, बल्कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के इतिहास को समृद्ध करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। स्थानीय प्रशासन और नागरिकों के सहयोग से इस तरह की ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने का प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय है।