Ayodhya Ramlala Aarti Live Darshan 2 January: श्री रामलला का दिव्य श्रृंगार और भव्य दर्शन
अयोध्या में विराजमान प्रभु श्री रामलला का 2 जनवरी को भव्य श्रृंगार और आरती सम्पन्न हुई। दिन में चार बार भोग और पूजा-अर्चना होती है। सुबह से संध्या तक भक्तों को अलौकिक दर्शन का अवसर मिलता है।
UNITED NEWS OF ASIA. अयोध्या। विश्व प्रसिद्ध श्री राम जन्मभूमि पर विराजमान प्रभु श्री रामलला का 2 जनवरी, विक्रम संवत 2082 के अनुसार, भव्य श्रृंगार और आरती सम्पन्न हुआ। इस दिन का शुभ अवसर शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि में आया। रामलला का श्रृंगार और पूजन प्रतिदिन की भांति दिव्य रूप में किया जाता है, जिसमें फूलों की माला और वस्त्रों का विशेष चयन किया जाता है।
सुबह 6:30 बजे की आरती से दिन की शुरुआत होती है। आरती के पहले रामलला को जगाया जाता है, इसके बाद उन्हें स्नान कराया जाता है और वस्त्र पहनाए जाते हैं। गर्मियों में रामलला को हल्के सूती वस्त्र और सर्दियों में ऊनी और स्वेटर पहनाए जाते हैं। इस प्रकार मौसम और समय के अनुसार भगवान का श्रृंगार किया जाता है।
रामलला को प्रतिदिन चार समय भोग चढ़ाया जाता है। सुबह बाल भोग से दिन की शुरुआत होती है, दोपहर 12 बजे भोग आरती होती है और शाम साढ़े सात बजे संध्या आरती सम्पन्न होती है। इसके बाद 8:30 बजे शयन कराया जाता है। रामलला के दर्शन सुबह 6:30 से 7:30 बजे तक किए जा सकते हैं।
भक्तों के लिए यह दिन खास होता है क्योंकि रामलला का श्रृंगार न केवल सुंदर और भव्य होता है, बल्कि इसमें विशेष व्यंजन और फूलों की माला भी शामिल होती है। रामलला के लिए परोसे जाने वाले व्यंजन राम मंदिर की रसोई में बनते हैं और दिन के अलग-अलग समय पर भोग के रूप में चढ़ाए जाते हैं।
इस दिन के भव्य दर्शन में भक्तों को अलौकिक अनुभव होता है। मंदिर परिसर में फूलों की महक, दीपक और भव्य सजावट भक्तों को आध्यात्मिक आनंद और शांति प्रदान करती है। रामलला के दर्शन करने वाले भक्त इस दिव्य अवसर को श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ अनुभव करते हैं।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के कर्मचारियों और पुजारियों द्वारा भगवान का श्रृंगार और भोग विधिपूर्वक किया जाता है। भक्तों को ऑनलाइन लाइव दर्शन का विकल्प भी उपलब्ध है, जिससे वे घर बैठे ही प्रभु के दर्शन कर सकते हैं।
अयोध्या का यह दिव्य दृश्य न केवल स्थानीय लोगों के लिए, बल्कि देशभर और विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष महत्व रखता है। 2 जनवरी को हुए इस भव्य श्रृंगार और आरती ने एक बार फिर भक्तों के हृदय में आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति की भावना भर दी।