अमरवाड़ा महाविद्यालय में तुलसी जयंती पर हुआ विशेष समारोह, विद्यार्थियों ने किया रामचरितमानस की चौपाइयों का गायन

शासकीय स्नातक महाविद्यालय अमरवाड़ा में हिंदी विभाग के तत्वावधान में संत गोस्वामी तुलसीदास की जयंती के अवसर पर विशेष समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में तुलसीदास के साहित्य, भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सामाजिक समरसता में योगदान पर वक्ताओं ने विचार रखे। विद्यार्थियों ने रामचरितमानस की दोहा-चौपाइयों का गायन भी किया।

Aug 20, 2026 - 12:30
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अमरवाड़ा महाविद्यालय में तुलसी जयंती पर हुआ विशेष समारोह, विद्यार्थियों ने किया रामचरितमानस की चौपाइयों का गायन

UNITED NEWS OF ASIA. यज्ञ राज पटेल, छिंदवाड़ा l शासकीय स्नातक महाविद्यालय, अमरवाड़ा में हिंदी विभाग के तत्वावधान में महान संत एवं कवि गोस्वामी तुलसीदास की जयंती के अवसर पर विशेष समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं संत तुलसीदास के छायाचित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर किया गया। समारोह में महाविद्यालय के प्राचार्य, प्राध्यापकगण, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ. आर. एन. झारिया ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास केवल कवि नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों के महान ध्वजवाहक थे। उन्होंने ‘रामचरितमानस’ के माध्यम से समाज को मर्यादा, आचरण और कर्तव्यपरायणता का मार्ग दिखाया, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने युवा पीढ़ी से तुलसीदास के साहित्य से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में नैतिक मूल्यों और अनुशासन को अपनाने का आह्वान किया।

तुलसीदास के साहित्य से मिलती है राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा

कार्यक्रम में कैप्टन डॉ. अरविंद धुर्वे ने तुलसीदास के जीवन और साहित्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संत तुलसीदास की रचनाएं अनुशासन, समर्पण और राष्ट्र-निर्माण की प्रेरणा देती हैं। उनके विचार आज भी समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

डॉ. विजय गुर्वे ने कहा कि तुलसीदास का काव्य समरसता और लोक कल्याण का काव्य है। उन्होंने जनभाषा में ‘रामचरितमानस’ की रचना कर ज्ञान और भक्ति के संदेश को घर-घर तक पहुंचाया। उनकी रचनाओं में भारतीय समाज और संस्कृति के विभिन्न मूल्यों का सुंदर समावेश देखने को मिलता है।

विद्यार्थियों ने किया रामचरितमानस की चौपाइयों का गायन

समारोह के दौरान महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने ‘रामचरितमानस’ की दोहा-चौपाइयों का गायन प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण निर्मित किया। उपस्थितजनों ने विद्यार्थियों के प्रयास की सराहना की।

कार्यक्रम का मंच संचालन अरुण डेहरिया ने किया। उन्होंने कहा कि तुलसीदास ने अपनी वाणी और साहित्य के माध्यम से समाज को जो दिशा प्रदान की, वह आज भी प्रेरणादायी है। वर्तमान समय में उनके विचारों और साहित्य को स्मरण करना तथा युवा पीढ़ी तक उनके संदेश को पहुंचाना आवश्यक है।

समारोह के अंत में शिवांशी मालवीय ने आभार प्रदर्शन किया। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी प्राध्यापकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा और समारोह गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।