राहुल गांधी के बयानों पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का पलटवार, बोले- शास्त्रों को संदर्भ से काटकर पेश करना उचित नहीं

बेमेतरा में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राहुल गांधी द्वारा हिंदू धर्मशास्त्र और मनुस्मृति को लेकर दिए गए कथित बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। 23 अगस्त को जारी प्रेस वक्तव्य में उन्होंने आरोप लगाया कि प्राचीन शास्त्रों के संदर्भों को राजनीतिक लाभ के लिए अलग तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने मनुस्मृति के चर्चित श्लोक की व्याख्या करते हुए कहा कि इसे केवल स्त्री की परतंत्रता के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। शंकराचार्य ने राहुल गांधी से हिंदू धर्मशास्त्रों पर टिप्पणी करने से पहले उनके मूल संदर्भ और व्याख्या का अध्ययन करने तथा कथित भ्रामक प्रचार से बचने की अपील की।

Aug 29, 2026 - 07:49
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राहुल गांधी के बयानों पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का पलटवार, बोले- शास्त्रों को संदर्भ से काटकर पेश करना उचित नहीं

UNITED NEWS OF ASIA. अरुण पुरेना, बेमेतरा l बेमेतरा में राहुल गांधी द्वारा हिंदू धर्मशास्त्र और मनुस्मृति को लेकर दिए गए कथित बयानों पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। 23 अगस्त को जारी प्रेस वक्तव्य में शंकराचार्य ने राहुल गांधी पर हिंदू धर्मशास्त्रों को लेकर भ्रम फैलाने और प्राचीन शास्त्रीय संदर्भों को राजनीतिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि किसी भी प्राचीन ग्रंथ के अंश को उसके मूल संदर्भ से अलग करके प्रस्तुत करना उचित नहीं है।

प्रेस वक्तव्य में कहा गया है कि पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने मनुस्मृति और सनातन सांस्कृतिक विचारों को लेकर जो बातें कहीं, उनमें शास्त्रों की समझ को लेकर सवाल उठते हैं। शंकराचार्य के अनुसार प्राचीन धर्मशास्त्रों के श्लोकों को उनके संदर्भ से अलग करके प्रस्तुत करने से समाज में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों पर चर्चा करते समय मूल ग्रंथ, उसकी भाषा, संदर्भ और परंपरागत व्याख्याओं को ध्यान में रखना आवश्यक है।

शंकराचार्य ने मनुस्मृति के चर्चित श्लोक “पिता रक्षति कौमारे, भर्ता रक्षति यौवने…” का उल्लेख करते हुए कहा कि इसकी व्याख्या केवल स्त्री की परतंत्रता के तौर पर करना उचित नहीं है। उनके अनुसार इस संदर्भ में परिवार और समाज द्वारा स्त्री की सुरक्षा तथा दायित्व की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। उन्होंने इस श्लोक की व्याख्या करते समय उसके ऐतिहासिक और शास्त्रीय संदर्भ को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया।

वक्तव्य में सनातन परंपरा में महिलाओं की भूमिका और सम्मान का भी उल्लेख किया गया। शंकराचार्य ने कहा कि भारतीय वाङ्मय की परंपरा में नारी को केवल आश्रित के रूप में नहीं देखा गया, बल्कि उसे शक्ति और सृजन के महत्वपूर्ण स्वरूप के तौर पर भी प्रतिष्ठित किया गया है। उन्होंने भारतीय परंपरा में महिलाओं की धार्मिक और सामाजिक भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति की मूल भावना कर्तव्य और परस्पर सम्मान से जुड़ी रही है।

शंकराचार्य ने भारतीय जनता पार्टी को मनुस्मृति समर्थक बताए जाने से जुड़े कथित राजनीतिक आरोप पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत की शासन व्यवस्था संविधान के आधार पर संचालित होती है। उनके अनुसार किसी राजनीतिक दल को मनुस्मृति से जोड़कर प्रस्तुत करना राजनीतिक भ्रम पैदा करने वाला दावा है।

उन्होंने राहुल गांधी से अपील की कि हिंदू धर्मशास्त्रों और सनातन परंपरा से जुड़े विषयों पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से पहले मूल ग्रंथों, उनके संदर्भ और विभिन्न व्याख्याओं का गंभीर अध्ययन किया जाए। शंकराचार्य ने कथित असत्य और भ्रामक प्रचार से बचने की बात भी कही।

अपने वक्तव्य में उन्होंने हिंदू धर्म और शास्त्रों से जुड़े विषयों पर बिना पर्याप्त अध्ययन के टिप्पणी किए जाने पर चिंता जताई। उनका कहना है कि ऐसे बयानों से धार्मिक विषयों को लेकर समाज में भ्रम और वैमनस्य की स्थिति बन सकती है। उन्होंने राहुल गांधी से कथित धर्मविरोधी और शास्त्रविरोधी बयानबाजी से बचने की अपील करते हुए कहा कि ऐसी टिप्पणियां जारी रहने पर संत समाज और सनातन समाज की ओर से विरोध और मुखर हो सकता है।

मनुस्मृति, संविधान और हिंदू धर्मशास्त्रों को लेकर देश में जारी राजनीतिक बहस के बीच शंकराचार्य का यह वक्तव्य सामने आया है। इससे इस विषय पर धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर चल रही बहस और तेज होने की संभावना है।