महात्मा गांधी नरेगा योजना से चेतन धुर्वे बने आत्मनिर्भर किसान — सिंचाई कूप ने बदली जिंदगी, अब बारहमासी खेती से कमा रहे लाखों
कवर्धा के चेतन धुर्वे को मनरेगा से बने सिंचाई कूप ने आत्मनिर्भर किसान बना दिया। अब वे सालभर बहु-फसलीय खेती कर रहे हैं और आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) ने कवर्धा जिले के ग्राम पंचायत कुरूवा (विकासखण्ड सहसपुर लोहारा) के किसान चेतन धुर्वे के जीवन में नई रोशनी ला दी है। पहले चेतन केवल बरसाती पानी पर निर्भर रहते थे और एक फसल ही ले पाते थे, लेकिन अब मनरेगा से बने सिंचाई कूप ने उनकी किस्मत बदल दी है।
मनरेगा के तहत चेतन धुर्वे को सिंचाई कूप निर्माण के लिए ₹2.52 लाख की स्वीकृति मिली। यह कार्य 8 मई 2024 को प्रारंभ होकर 29 जून 2024 को पूरा हुआ। निर्माण में ₹1.03 लाख मजदूरी के रूप में ग्राम के जॉब कार्डधारी परिवारों को और ₹1.44 लाख सामग्री पर व्यय हुआ। इससे न केवल चेतन का जीवन बदला बल्कि गांव के कई परिवारों को भी रोजगार मिला।
कूप निर्माण से पहले चेतन मात्र 1.5 एकड़ भूमि में सीमित खेती करते थे। लेकिन अब सिंचाई सुविधा मिलने से उन्होंने खरीफ, रबी और जायद—तीनों मौसमों में फसल लेना शुरू किया है। वर्तमान में वे धान, तिलहन और सब्जी की खेती कर रहे हैं। रेगहा भूमि लेकर उन्होंने खेती का क्षेत्र बढ़ाकर 5 एकड़ कर लिया है। अब वे सालभर खेती कर रहे हैं और सब्जी बेचकर लाखों रुपये की आमदनी प्राप्त कर रहे हैं।
चेतन धुर्वे ने बताया कि पहले बारिश पर निर्भरता के कारण आर्थिक स्थिति कमजोर थी, लेकिन अब मनरेगा योजना से उनकी आय में तीन गुना तक वृद्धि हुई है। वे कहते हैं — “अब मेरे खेत में सालभर पानी रहता है, फसलें हरी रहती हैं, और परिवार खुशहाल है। मनरेगा ने हमें आत्मनिर्भर बनाया है।”
महात्मा गांधी नरेगा योजना न केवल ग्रामीणों को रोजगार दे रही है बल्कि किसानों को आत्मनिर्भरता और बहुफसली खेती की दिशा में अग्रसर कर रही है। चेतन धुर्वे की यह कहानी इस बात का सजीव उदाहरण है कि सही योजना और परिश्रम से ग्रामीण जीवन में कितना बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
अब चेतन धुर्वे का खेत हरा-भरा है, आमदनी बढ़ी है, और उनका आत्मविश्वास भी। वे कहते हैं — “अब हमें सिर्फ बारिश का इंतजार नहीं करना पड़ता, हमारे खेत में हमारी मेहनत का पानी बहता है।”