भारतीय बचपन खतरे में
बाबा रामदेव ने कहा कि देश में हिंदू, मुस्लिम या किसी जाति विशेष के खतरे में होने की बात करने के बजाय भारतीय बचपन, देश की जवानी, वर्तमान और भविष्य पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग आंदोलनों के लिए देश के बच्चों और युवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए आंदोलन होना चाहिए, लेकिन देश की शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवालों पर भी चर्चा जरूरी है। उन्होंने व्यक्ति-केंद्रित व्यवस्था के बजाय व्यापक और जनहित आधारित व्यवस्था पर जोर दिया।
वंदे मातरम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए
राष्ट्रगीत वंदे मातरम को लेकर चल रही राजनीतिक बहस पर बाबा रामदेव ने कहा कि उन्होंने संबंधित वीडियो अभी तक नहीं देखा है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम देश की एकता और अखंडता से जुड़ा विषय है और ऐसे मुद्दों पर सभी को एकजुट होना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि राष्ट्रहित और राष्ट्रधर्म सर्वोपरि हैं तथा ऐसे विषयों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
देश की व्यवस्था पर संतुलित दृष्टिकोण जरूरी
बाबा रामदेव ने कहा कि केवल एक प्रधानमंत्री के देश की सभी समस्याएं ठीक कर देने की अपेक्षा उचित नहीं है। उन्होंने नरेंद्र मोदी की नीतियों से देश में हुए कई सकारात्मक बदलावों का उल्लेख किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि देश में सब कुछ अच्छा है, ऐसा कहना भी सही नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि देश की समस्याओं और व्यवस्थाओं को न्यायपूर्ण दृष्टि से देखने की जरूरत है। रोजगार के साथ पर्यावरण समेत कई अन्य विषय भी महत्वपूर्ण हैं।
शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था में सुधार की जरूरत
बाबा रामदेव ने शिक्षा के व्यवसायीकरण को चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि यदि देश की शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था में सुधार करना है तो समाज के सभी वर्गों को मिलकर प्रयास करना होगा।
उन्होंने सरकारी तंत्र से लाभ लेने वाले लोगों से अपील करते हुए कहा कि व्यवस्थाओं में सुधार के लिए उन्हें सरकारी स्कूलों और सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान देना चाहिए। उनका कहना था कि शिक्षा, चिकित्सा और अन्य सार्वजनिक व्यवस्थाओं में सुधार सामूहिक प्रयास से ही संभव है।
उन्होंने युवाओं और बच्चों के भविष्य को देश की सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल करने की जरूरत बताई।