बीजापुर से 140 नक्सली भैरमगढ़ से जगदलपुर पहुँचे, कल CM विष्णुदेव साय और डिप्टी CM विजय शर्मा के समक्ष आत्मसमर्पण करेंगे
बीजापुर के 140 नक्सली भैरमगढ़ से जगदलपुर रवाना, कल मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के समक्ष आत्मसमर्पण करेंगे। इनमें महिला और केंद्रीय कमेटी के सदस्य भी शामिल हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. पी सतीश कुमार, बीजापुर/जगदलपुर| छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता की खबर सामने आई है। माड़ डिविजन से लगभग 140 नक्सली आत्मसमर्पण के लिए भैरमगढ़ स्थित इंद्रावती नदी पार कर जगदलपुर पहुँचे। यह बड़ी संख्या में नक्सलियों का मुख्यधारा में लौटना राज्य की सुरक्षा और शांति व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, आत्मसमर्पण के लिए आए नक्सलियों में सेंट्रल कमेटी मेंबर रूपेश @आसन्ना, माड़ डिविजन से सचिव रणिता, दो SZCM मेंबर और 15 DVC मेंबर शामिल हैं। इसके अलावा 121 अन्य नक्सली (ACM/Janmilitia) भी इस समूह में शामिल थे। कुल 140 नक्सलियों के पास लगभग 70 हथियार (Automatic/CM) थे।
नक्सली सुबह भैरमगढ़ पहुँचे और तीन बसों में बैठकर भारी सुरक्षा के बीच जगदलपुर के लिए रवाना किए गए। इस दौरान बसों के आगे-पीछे अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए गए। इस समूह में कई महिलाएं और लड़कियां भी शामिल थीं, जो नक्सलवादी विचारधारा को छोड़ मुख्यधारा में लौट रही हैं।
जगदलपुर पुलिस लाइन में कल, 17 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के समक्ष यह नक्सली आत्मसमर्पण करेंगे। इसमें माड़ डिविजन के लगभग सौ से अधिक नक्सली और कांकेर क्षेत्र की बटालियन नंबर 5 के नक्सली शामिल होंगे।
यह आत्मसमर्पण समारोह न केवल नक्सलवाद के खिलाफ राज्य की नीति में एक महत्वपूर्ण घटना है, बल्कि इससे स्थानीय समुदायों में सुरक्षा, शांति और विकास के प्रयासों को भी बल मिलेगा। पुलिस और प्रशासन ने आत्मसमर्पण प्रक्रिया को सुरक्षित और शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न कराने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।
विशेष सुरक्षा के बीच जगदलपुर पहुंचने के बाद नक्सलियों का रजिस्ट्रेशन और हथियारों की सुरक्षित जप्ती की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। राज्य सरकार ने आश्वासन दिया है कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को पुनर्वास और मुख्यधारा में लौटने के लिए सभी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी।
इस कदम को राज्य और केंद्र सरकार की नक्सल विरोधी नीति में बड़ी सफलता माना जा रहा है और इसे सुरक्षा बलों, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय समुदाय के संयुक्त प्रयासों का परिणाम बताया जा रहा है।