विश्व स्तनपान सप्ताह शुरू, जन्म के पहले घंटे में स्तनपान और छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने पर जोर

प्रदेशभर में विश्व स्तनपान सप्ताह की शुरुआत के साथ स्वास्थ्य विभाग ने नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया है। जन्म के पहले घंटे में स्तनपान और पहले छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

Aug 5, 2026 - 12:13
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विश्व स्तनपान सप्ताह शुरू, जन्म के पहले घंटे में स्तनपान और छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने पर जोर

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l नवजात शिशुओं को स्वस्थ जीवन की मजबूत शुरुआत देने और मातृ-शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से प्रदेशभर में विश्व स्तनपान सप्ताह की शुरुआत हो गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सप्ताहभर अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों तथा समुदाय स्तर पर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अभियान के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और उनके परिजनों को स्तनपान के महत्व और इसके वैज्ञानिक लाभों की जानकारी दी जा रही है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, शिशु के जन्म के पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना और जीवन के पहले छह माह तक केवल मां का दूध पिलाना उसके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। मां का पहला गाढ़ा पीला दूध, जिसे कोलोस्ट्रम कहा जाता है, नवजात के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच का कार्य करता है। यह शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, संक्रमण से बचाने और कुपोषण के खतरे को कम करने में अहम भूमिका निभाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि छह माह तक केवल स्तनपान कराने के बाद बच्चे को उम्र के अनुरूप ऊपरी आहार देना शुरू करना चाहिए, लेकिन इसके साथ दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखने की सलाह दी जाती है। इससे बच्चे के संपूर्ण विकास को बेहतर समर्थन मिलता है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, स्तनपान केवल नवजात के लिए ही नहीं बल्कि मां के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। इससे प्रसव के बाद शरीर को तेजी से सामान्य स्थिति में आने में मदद मिलती है, कुछ गंभीर बीमारियों का जोखिम कम होता है तथा मां और शिशु के बीच भावनात्मक जुड़ाव भी मजबूत होता है।

विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान स्वास्थ्य संस्थानों में धात्री एवं गर्भवती महिलाओं की काउंसलिंग, समूह चर्चा, स्वास्थ्य शिक्षा सत्र, प्रश्नोत्तर कार्यक्रम और व्यवहारिक प्रशिक्षण आयोजित किए जा रहे हैं। चिकित्सक, स्टाफ नर्स, एएनएम, मितानिन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और अन्य स्वास्थ्यकर्मी माताओं को सही स्तनपान तकनीक, नवजात की देखभाल तथा स्तनपान से जुड़े आम भ्रमों का वैज्ञानिक समाधान भी बता रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि स्तनपान को केवल मां की जिम्मेदारी न मानकर पूरे परिवार की साझा जिम्मेदारी समझें। परिवार का सहयोग, सकारात्मक वातावरण और सही जानकारी प्रत्येक नवजात को स्वस्थ जीवन की बेहतर शुरुआत देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विभाग का मानना है कि जनजागरूकता और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और सशक्त बनाया जा सकता है तथा कुपोषण मुक्त एवं स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।