तुकाम गांव में तीन साल से बरामदे में चल रहा सरकारी प्राथमिक स्कूल, बच्चों को नहीं मिली अपनी छत

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के मानपुर विकासखंड के तुकाम गांव में सरकारी प्राथमिक स्कूल पिछले तीन वर्षों से एक आदिवासी ग्रामीण के घर के बरामदे में संचालित होने का मामला सामने आया है। स्कूल की अपनी इमारत नहीं होने के कारण बच्चों को बरामदे में पढ़ाई करनी पड़ रही है। स्कूल में शौचालय और पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था नहीं होने का भी दावा किया गया है। मध्याह्न भोजन के लिए बच्चों को करीब 150 मीटर और शौचालय के लिए करीब 100 मीटर दूर जाना पड़ता है। मकान मालिक द्वारा तीन वर्षों से स्कूल संचालन के लिए किराया नहीं लेने की बात भी सामने आई है।

Oct 1, 2026 - 19:40
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तुकाम गांव में तीन साल से बरामदे में चल रहा सरकारी प्राथमिक स्कूल, बच्चों को नहीं मिली अपनी छत

UNITED NEWS OF ASIA. जावेद शेख़, मानपुर l जिले के मानपुर विकासखंड के तुकाम गांव से सरकारी प्राथमिक स्कूल की व्यवस्था को लेकर एक मामला सामने आया है। यहां स्कूल की अपनी इमारत नहीं होने के कारण पिछले तीन वर्षों से बच्चों की कक्षाएं एक आदिवासी ग्रामीण के घर के बरामदे में संचालित होने की बात सामने आई है। स्कूल के लिए भवन नहीं होने के चलते बच्चों को बरामदे में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है।

तुकाम गांव छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सीमा से लगे क्षेत्र में स्थित है। यहां संचालित प्राथमिक स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के लिए स्कूल भवन, शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्रस्तुत जानकारी के अनुसार बीते तीन वर्षों से बच्चों की पढ़ाई इसी ग्रामीण के घर के बरामदे में चल रही है।

स्कूल भवन नहीं होने के कारण बच्चों को मौसम की परिस्थितियों के बीच पढ़ाई करनी पड़ती है। बारिश और तेज धूप के दौरान बरामदे में कक्षाएं संचालित होने से विद्यार्थियों को परेशानी होने की बात सामने आई है। स्कूल में पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने का भी दावा किया गया है।

शौचालय की सुविधा भी स्कूल परिसर में उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी गई है। इसके चलते बच्चों को शौचालय जाने के लिए करीब 100 मीटर दूर जाना पड़ता है। वहीं दोपहर के समय मध्याह्न भोजन के लिए विद्यार्थियों को करीब 150 मीटर दूर जाना पड़ता है। छोटे बच्चों के लिए इस तरह की व्यवस्था उनकी रोजमर्रा की पढ़ाई और सुविधा से जुड़े सवाल खड़े करती है।

इन परिस्थितियों के बीच जिस ग्रामीण के घर के बरामदे में स्कूल संचालित हो रहा है, उसकी भूमिका भी सामने आई है। जानकारी के अनुसार मकान मालिक ने पिछले तीन वर्षों से स्कूल संचालन के लिए प्रशासन से किसी तरह का किराया नहीं लिया है। ग्रामीण द्वारा स्कूल के संचालन के लिए अपना बरामदा उपलब्ध कराए जाने को स्थानीय स्तर पर सहयोग के रूप में देखा जा रहा है।

मामले में शाला समिति अध्यक्ष बरसाय नेताम और विद्यार्थियों की भी प्रतिक्रिया सामने आने की बात कही गई है। वहीं मकान मालिक मानी जाड़े से भी स्कूल संचालन और मौजूदा व्यवस्था को लेकर जानकारी ली गई है।

तुकाम गांव में सामने आई यह स्थिति सीमांत और ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े करती है। एक तरफ बच्चों को शिक्षा से जोड़ने की कोशिश की जा रही है, वहीं दूसरी ओर स्कूल भवन, शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाओं की कमी की बात सामने आ रही है।

स्थानीय स्तर पर अब सवाल यह उठ रहा है कि तीन वर्षों से बरामदे में संचालित हो रहे इस प्राथमिक स्कूल के लिए स्थायी भवन कब उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही बच्चों के लिए स्कूल परिसर में शौचालय, पेयजल और मध्याह्न भोजन से जुड़ी सुविधाएं कब सुनिश्चित होंगी।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्कूल भवन की अनुपलब्धता और बच्चों की सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं सामने आई हैं। इन दावों पर प्रशासन की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।