तारा कोल ब्लॉक नीलामी कब रद्द होगी, सरकार जवाब दे: दीपक बैज

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने नीलामी रोकने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। बैज ने तारा क्षेत्र में जंगल, हाथी अभ्यारण्य, आदिवासी अधिकारों और पर्यावरण पर संभावित प्रभाव का मुद्दा उठाते हुए नीलामी रद्द करने की मांग की।

Oct 5, 2026 - 07:53
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तारा कोल ब्लॉक नीलामी कब रद्द होगी, सरकार जवाब दे: दीपक बैज

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासी विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य सरकार से सवाल किया है कि तारा कोल ब्लॉक की नीलामी आखिर कब रद्द की जाएगी। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार की ओर से नीलामी को रोकने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। बैज ने कहा कि सरकार की चुप्पी से यह आशंका मजबूत होती है कि तारा कोल ब्लॉक को अडानी समूह को सौंपने की प्रक्रिया से सरकार पीछे नहीं हटना चाहती।

दीपक बैज ने कहा कि तारा कोल ब्लॉक लगभग 5 हजार एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें 4 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र घने जंगल का बताया जा रहा है। कांग्रेस के अनुसार, खनन परियोजना के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की आशंका है। बैज ने दावा किया कि इससे 10 लाख से अधिक पेड़ों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने लेमरू एलीफेंट रिजर्व के आसपास संभावित खनन गतिविधियों को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि इससे हाथियों के आवागमन के पारंपरिक रास्ते प्रभावित हो सकते हैं।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर राज्य सरकार के पुराने पत्राचार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 11 दिसंबर 2025 को साय सरकार ने कोयला मंत्रालय को तारा कोल ब्लॉक की नीलामी के संबंध में पत्र लिखा था। वहीं, कांग्रेस की पिछली सरकार ने 23 जून 2023 को तारा सहित नौ कोल ब्लॉकों को नीलामी से अलग रखने के लिए पत्र भेजा था। बैज ने भाजपा सरकार से सवाल किया कि जब उसने खुद तारा कोल ब्लॉक की नीलामी के लिए केंद्र को अनुशंसा की थी, तो अब नीलामी रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

दीपक बैज ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की नीतियों से हसदेव अरण्य क्षेत्र पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का आरोप है कि सरकार की नीतियां उद्योगों के हित में हैं और इनके कारण जंगल तथा आदिवासी समुदायों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।

बैज ने सरगुजा क्षेत्र के केते एक्सटेंशन कोल परियोजना का भी उल्लेख किया। कांग्रेस के अनुसार, राज्य सरकार ने केते एक्सटेंशन ओपन कास्ट कोल माइनिंग और पिट हेड कोल वॉशरी परियोजना के लिए 1742.60 हेक्टेयर वन भूमि को गैर-वन उपयोग में बदलने की अनुमति दी थी। कांग्रेस का दावा है कि इसके बाद प्रस्ताव केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय तक पहुंचा और अनुमति मिलने के बाद बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई का रास्ता साफ हुआ।

कांग्रेस ने रामगढ़ की पहाड़ियों, प्राचीन नाट्यशाला, सीता गुफा, जानकी रसोई और राम वन गमन पथ से जुड़े क्षेत्रों पर भी खनन गतिविधियों के संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई है। बैज ने कहा कि हसदेव अरण्य क्षेत्र जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण है और यहां खनन से जंगल, जलस्रोत, वन्यजीव तथा स्थानीय समुदायों की पारंपरिक आजीविका प्रभावित हो सकती है।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र में आदिवासी समुदाय लंबे समय से खनन परियोजनाओं के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं और कई ग्राम सभाओं द्वारा विरोध प्रस्ताव पारित किए जाने का दावा भी किया गया है। कांग्रेस ने सरकार से तारा कोल ब्लॉक की नीलामी पर तत्काल पुनर्विचार करने और पर्यावरण तथा आदिवासी हितों को प्राथमिकता देने की मांग की है। पार्टी ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि तारा कोल ब्लॉक की नीलामी रद्द करने को लेकर उसकी नीति क्या है।