नक्सल दहशत से पर्यटन तक सातधार का सफर, बारिश में सैलानियों से गुलजार हुआ जलप्रपात
दंतेवाड़ा जिले में कभी नक्सली दहशत और सुरक्षा चुनौतियों के कारण लोगों की पहुंच से दूर रहा सातधार जलप्रपात अब पर्यटन का आकर्षण बन रहा है। बारसूर से करीब 20 किलोमीटर दूर तलकुड़ी गांव के पास इंद्रावती नदी पर स्थित सातधार बारिश के मौसम में बेहद खूबसूरत नजर आता है। वर्ष 2021 से पर्यटकों के लिए खुलने के बाद यहां धीरे-धीरे पर्यटन गतिविधियां बढ़ी हैं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि सातधार को बेहतर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने से रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर पैदा होंगे।
UNITED NEWS OF ASIA. नवीन चौधरी, दंतेवाड़ा l जिस इलाके में कभी नक्सली दहशत और सुरक्षा कारणों के चलते आम लोगों का पहुंचना मुश्किल था, आज वही क्षेत्र अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के कारण पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। दंतेवाड़ा जिले के बारसूर से करीब 20 किलोमीटर दूर तलकुड़ी गांव के पास इंद्रावती नदी पर स्थित सातधार जलप्रपात बारिश के मौसम में अपनी खूबसूरती के चरम पर पहुंच जाता है। नदी का बढ़ा हुआ जलस्तर, आसपास की हरियाली, पहाड़ियां और चट्टानों के बीच बहता पानी यहां आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है।
सातधार तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को सुरक्षा के लिहाज से तैनात सीआरपीएफ कैंप के क्षेत्र से होकर गुजरना पड़ता है। एक समय ऐसा था जब नक्सली गतिविधियों के कारण इस पूरे इलाके में आम लोगों की आवाजाही बेहद सीमित थी। सुरक्षा चुनौतियों के चलते सातधार जैसे प्राकृतिक स्थलों तक पहुंचना भी आसान नहीं था और पर्यटन की संभावनाएं पूरी तरह विकसित नहीं हो पाई थीं।
नक्सल दहशत के साए में रहा यह क्षेत्र लंबे समय तक जंगल और पहाड़ी इलाकों में सक्रिय नक्सली गतिविधियों से प्रभावित रहा। सुरक्षा कारणों से यहां आम लोगों की आवाजाही पर भी असर पड़ा। प्राकृतिक संपदा से भरपूर होने के बावजूद क्षेत्र पर्यटन के नक्शे पर अपनी संभावनाओं के अनुरूप पहचान नहीं बना सका। हालात में बदलाव के साथ अब सातधार की तस्वीर भी बदलती नजर आ रही है।
वर्ष 2021 से सातधार क्षेत्र को पर्यटकों के लिए खोला गया। इसके बाद धीरे-धीरे यहां पर्यटन गतिविधियां बढ़ने लगीं। खासकर बारिश के मौसम में जलप्रपात का स्वरूप बेहद आकर्षक हो जाता है। इंद्रावती नदी में पानी का प्रवाह बढ़ने के साथ सातधार के अलग-अलग हिस्सों से बहता पानी प्राकृतिक दृश्य को और मनमोहक बना देता है।
बारिश के दौरान चारों ओर फैली हरियाली और पहाड़ी क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता पर्यटकों को अपनी ओर खींचती है। स्थानीय लोगों के साथ अब दूसरे क्षेत्रों से आने वाले पर्यटक भी सातधार पहुंच रहे हैं। कई लोग यहां बारिश के मौसम में नदी और जलप्रपात के मनमोहक दृश्य का आनंद लेने पहुंचते हैं।
सातधार क्षेत्र में बढ़ती पर्यटकों की आवाजाही दंतेवाड़ा की बदलती तस्वीर को भी सामने रखती है। जिस इलाके की पहचान कभी नक्सली दहशत और सुरक्षा चुनौतियों से जुड़ी थी, वही क्षेत्र अब प्राकृतिक पर्यटन की संभावनाओं के कारण चर्चा में है। सुरक्षा व्यवस्था के बीच पर्यटकों की आवाजाही बढ़ना क्षेत्र में आए बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सातधार को योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाए तो यहां पर्यटन को और बढ़ावा मिल सकता है। पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं, पहुंच मार्ग, आवश्यक आधारभूत ढांचा और अन्य सुविधाएं विकसित होने से क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है। इससे तलकुड़ी गांव सहित आसपास के ग्रामीणों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
सातधार की प्राकृतिक खूबसूरती के साथ क्षेत्र की बदलती सामाजिक और सुरक्षा स्थिति भी इसे खास बनाती है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र की पहचान से पर्यटन स्थल की ओर बढ़ता सातधार अब दंतेवाड़ा की नई तस्वीर पेश कर रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस प्राकृतिक धरोहर को विकसित कर दंतेवाड़ा के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।