दर्री में 14 सितंबर से गूंजेगी भागवत ज्ञानगंगा, आचार्य हेमंत कृष्ण गोस्वामी कराएंगे कथा का रसपान

छत्तीसगढ़ के दर्री स्थित श्री दुर्गा पंडाल में 14 से 20 सितंबर 2026 तक पितृमोक्षार्थ श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य आयोजन किया जाएगा। सिंधानिया परिवार द्वारा आयोजित इस धार्मिक महोत्सव में वृंदावन धाम के कथावाचक आचार्य हेमंत कृष्ण गोस्वामी श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराएंगे। आयोजन की शुरुआत कलश यात्रा से होगी, जबकि समापन पर पूर्णाहुति हवन और बाद में विशाल महाप्रसाद भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

Sep 6, 2026 - 11:13
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दर्री में 14 सितंबर से गूंजेगी भागवत ज्ञानगंगा, आचार्य हेमंत कृष्ण गोस्वामी कराएंगे कथा का रसपान

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ के दर्री स्थित श्री दुर्गा पंडाल में 14 से 20 सितंबर 2026 तक सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य आयोजन किया जाएगा। सिंधानिया परिवार दर्री, रायपुर-छिंतोली वाले द्वारा पितृमोक्षार्थ गया श्राद्धान्तर्गत आयोजित इस धार्मिक महोत्सव में वृंदावन धाम बरसाना के सुप्रसिद्ध कथावाचक आचार्य हेमंत कृष्ण गोस्वामी व्यास पीठ पर विराजमान होकर श्रद्धालुओं को श्रीमद् भागवत कथा का रसपान कराएंगे। आयोजन का उद्देश्य समाज में धर्म, भक्ति और सनातन संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

आयोजन की जानकारी देते हुए महेंद्र सिंधानिया ने बताया कि भगवान श्री मदनमोहन, श्री श्याम बाबा, श्री हनुमान जी महाराज, कुलदेवी सफेदी माता, श्री राणीसती दादी और पितरों की कृपा एवं प्रेरणा से इस धार्मिक आयोजन का संकल्प लिया गया है। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का संदेश दिया जाएगा। सात दिनों तक श्रीमद् भागवत के विभिन्न धार्मिक एवं पौराणिक प्रसंगों का भावपूर्ण वाचन किया जाएगा।

कार्यक्रम की शुरुआत 14 सितंबर 2026 को सुबह 9 बजे श्री राधाकृष्ण पंचदेव मंदिर से निकलने वाली भव्य कलश यात्रा से होगी। इसके बाद प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक कथा का आयोजन किया जाएगा। कथा के पहले दिन श्रीमद् भागवत महात्म्य का वर्णन होगा। 15 सितंबर को सूत जी और शौनकादि ऋषियों के संवाद के साथ राजा परीक्षित के जन्म की कथा सुनाई जाएगी। 16 सितंबर को राजा परीक्षित को मिले ऋषि श्राप और वामन अवतार के प्रसंग का वर्णन होगा।

17 सितंबर को ध्रुव चरित्र, श्री राम जन्म और श्री कृष्ण जन्मोत्सव का आयोजन विशेष आकर्षण रहेगा। इस दौरान नंदोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिलेगा। 18 सितंबर को गिरिराज पूजन और गोवर्धन लीला का प्रसंग सुनाया जाएगा। 19 सितंबर को जरासंध के आक्रमण के साथ श्री कृष्ण और रुक्मणी विवाह महोत्सव का भावपूर्ण वर्णन किया जाएगा। कथा के अंतिम दिन 20 सितंबर को प्रद्युम्न जन्म, सुदामा चरित्र, पूर्णाहुति हवन और सहस्रधारा के साथ कथा का समापन होगा।

आयोजन को सफल बनाने के लिए सिंधानिया परिवार के सदस्य और सहयोगी व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। मुख्य आयोजक एवं व्यवस्थापक के रूप में बलभद्रप्रसाद गुलाबचंद सिंधानिया, महेंद्र सिंधानिया, जितेंद्र सिंधानिया और एम.के. इंटरप्राइजेस सहित परिवार के अन्य सदस्य जुड़े हैं। वहीं दर्री क्षेत्र से मनोज सिंधानिया, अमर सिंधानिया और संबंधित संस्थानों द्वारा आयोजन की व्यवस्थाओं में सहयोग किया जा रहा है। सह-आयोजकों में मयंक सिंधानिया, शिवकुमार नितेश कुमार सिंधानिया और राकेश सिंधानिया का भी योगदान रहेगा।

आयोजन के समापन अवसर पर 15 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:30 बजे से विशाल महाप्रसाद एवं भंडारे का आयोजन किया जाएगा। महेंद्र सिंधानिया एवं समस्त सिंधानिया परिवार ने सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से सपरिवार कथा में शामिल होने और आध्यात्मिक लाभ अर्जित करने की अपील की है।