संभागीय सरस मेला का शुभारंभ, ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को मिलेगा नया बाजार

कवर्धा के भोरमदेव मंदिर चौरा में पांच दिवसीय संभागीय सरस मेले का शुभारंभ हुआ। मेले में स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार जैविक खाद्य सामग्री, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री की जा रही है। आयोजन का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को बाजार उपलब्ध कराना और उद्यमिता को बढ़ावा देना है।

Aug 3, 2026 - 17:41
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संभागीय सरस मेला का शुभारंभ, ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को मिलेगा नया बाजार

UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा। भोरमदेव मंदिर चौरा में आयोजित पांच दिवसीय संभागीय सरस मेले का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। यह मेला राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत संचालित स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और विपणन का बेहतर मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। मेले में ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार जैविक खाद्य सामग्री, हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद, घरेलू उपयोग की वस्तुएं और स्थानीय वनोपज आधारित उत्पाद आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि संभागीय सरस मेला ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराते हैं और उनके उत्पादों को व्यापक बाजार मिलता है। इससे न केवल महिलाओं की आय में वृद्धि होती है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होती है।

उद्घाटन के बाद उपमुख्यमंत्री ने मेले में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने महिला समूहों से उनके उत्पादों की जानकारी ली और विभिन्न स्टॉलों से खरीदारी कर महिलाओं का उत्साहवर्धन किया। इस दौरान उन्होंने महिला उद्यमियों को सफल व्यवसाय के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

कलेक्टर गोपाल वर्मा ने बताया कि यह मेला 6 अगस्त की शाम तक चलेगा। सावन माह में विश्व प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर के समीप आयोजित यह आयोजन केवल खरीदारी का अवसर नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास का उत्सव है। मेले में 50 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जहां मिलेट आधारित पौष्टिक खाद्य सामग्री, जैविक मसाले, पापड़, अचार, ब्लैक राइस, महुआ उत्पाद, हस्तनिर्मित बैग, अगरबत्ती, दोना-पत्तल, बांस एवं बेंत से बने उत्पाद, पारंपरिक परिधान और सजावटी वस्तुएं बेहद किफायती दरों पर उपलब्ध हैं।

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि सरस मेले का मुख्य उद्देश्य स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों के लिए स्थायी बाजार उपलब्ध कराना है। उन्होंने जिलेवासियों से अपील की कि वे भोरमदेव मंदिर के दर्शन के साथ मेले का भी भ्रमण करें और स्थानीय उत्पादों की खरीदारी कर ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग करें।

मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भी लोगों का भरपूर मनोरंजन किया। प्रसिद्ध पंडवानी गायिका तरुणा साहू ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं स्वामी आत्मानंद इंग्लिश स्कूल बोड़ला के विद्यार्थियों ने शिव तांडव नृत्य प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं और दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।

संभागीय सरस मेले में कबीरधाम, दुर्ग, बालोद, राजनांदगांव, बेमेतरा, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई सहित दुर्ग संभाग के विभिन्न जिलों के स्व-सहायता समूह भाग ले रहे हैं। महिला समूहों द्वारा तैयार गुणवत्तापूर्ण और स्वदेशी उत्पादों को देखने और खरीदने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।

यह मेला ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, कौशल और आत्मनिर्भरता का सशक्त उदाहरण बनकर उभर रहा है। स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ-साथ यह आयोजन 'वोकल फॉर लोकल' और महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मेले का आयोजन 6 अगस्त तक प्रतिदिन जारी रहेगा, जहां परिवार और मित्रों के साथ पहुंचकर लोग खरीदारी के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आनंद ले सकते हैं।