रायपुर में भक्ति और उल्लास के बीच संपन्न हुई भगवान श्रीजगन्नाथ की बाहुड़ा रथयात्रा, हजारों श्रद्धालुओं ने खींचा रथ
रायपुर के गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ सेवा समिति के तत्वावधान में भगवान श्रीजगन्नाथ, भगवान श्रीबलभद्र और देवी सुभद्रा की बाहुड़ा रथयात्रा श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुई। हजारों श्रद्धालुओं ने रथ खींचकर भगवान के दर्शन किए। विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि भगवान श्रीजगन्नाथ कलियुग में समरसता, सेवा और लोककल्याण के प्रतीक हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l राजधानी रायपुर में भगवान श्रीजगन्नाथ महाप्रभु की पावन बाहुड़ा रथयात्रा श्रद्धा, आस्था और भक्ति के अद्भुत वातावरण के बीच भव्य रूप से संपन्न हुई। श्री जगन्नाथ सेवा समिति, गायत्री नगर (शंकर नगर) के तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान श्रीजगन्नाथ, भगवान श्रीबलभद्र और देवी सुभद्रा के दिव्य दर्शन किए। नौ दिवसीय प्रवास के बाद भगवान श्रीजगन्नाथ अपने मौसी घर गुंडिचा मंदिर से पुनः अपने मूल निवास श्रीजगन्नाथ मंदिर लौटे। पूरे मार्ग में "जय जगन्नाथ" के जयघोष, भजन-कीर्तन और हरिनाम संकीर्तन से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
दोपहर तीन बजे बाहुड़ा रथयात्रा का शुभारंभ हुआ। भगवान श्रीबलभद्र तालध्वज रथ, देवी सुभद्रा देवदलन रथ तथा भगवान श्रीजगन्नाथ महाप्रभु नंदीघोष रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए निकले। हजारों श्रद्धालुओं ने श्रद्धा के साथ रथ की रस्सियां खींचीं और इसे अपने जीवन का सौभाग्य माना। यात्रा मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया। कई स्थानों पर आरती, भजन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
बाहुड़ा रथयात्रा भगवान श्रीजगन्नाथ की वार्षिक रथयात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीजगन्नाथ, भगवान श्रीबलभद्र और देवी सुभद्रा रथयात्रा के दौरान नौ दिनों तक मौसी घर गुंडिचा मंदिर में विराजमान रहते हैं। इस अवधि में श्रद्धालु विशेष पूजा-अर्चना कर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। निर्धारित समय पूरा होने के बाद भगवान की वापसी यात्रा को बाहुड़ा रथयात्रा कहा जाता है, जिसका धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व है।
मौसी मंदिर में नौ दिनों तक प्रतिदिन विशेष पूजा-अर्चना, महाआरती, भजन-कीर्तन, छप्पन भोग और महाप्रसाद का आयोजन किया गया। सुबह से देर रात तक बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते रहे और भगवान के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। समिति द्वारा धार्मिक अनुष्ठानों का सुव्यवस्थित संचालन किया गया, जिससे श्रद्धालुओं को शांतिपूर्ण वातावरण में दर्शन और पूजा का अवसर मिला।
रथयात्रा के दौरान समिति ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की थीं। पूरे रथ मार्ग को आकर्षक सजावट से सुसज्जित किया गया था। पेयजल, चिकित्सा सहायता, यातायात नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और स्वयंसेवकों की तैनाती जैसी आवश्यक व्यवस्थाओं के कारण आयोजन पूरी तरह अनुशासित और व्यवस्थित रहा। प्रशासन और पुलिस की सक्रिय भागीदारी से श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।
इस अवसर पर उत्तर विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं श्री जगन्नाथ सेवा समिति के अध्यक्ष पुरंदर मिश्रा ने कहा कि भगवान श्रीजगन्नाथ कलियुग में समरसता, सेवा, करुणा और लोककल्याण के साक्षात प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि बाहुड़ा रथयात्रा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि समाज में प्रेम, भाईचारे और मानव सेवा का संदेश देने वाला महापर्व है। उनके अनुसार भगवान श्रीजगन्नाथ की कृपा से समाज में समानता, सद्भाव और सेवा की भावना को नई प्रेरणा मिलती है।
पुरंदर मिश्रा ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले श्रद्धालुओं, स्वयंसेवकों, प्रशासन, पुलिस, मीडिया तथा समिति के सभी पदाधिकारियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग से यह आयोजन हर वर्ष और अधिक भव्य स्वरूप में संपन्न हो रहा है तथा प्रदेशभर से श्रद्धालु इसमें शामिल होने के लिए रायपुर पहुंच रहे हैं।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, संगठन महामंत्री पवन साय, कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष रामप्रताप सिंह, भाजपा रायपुर शहर जिला अध्यक्ष रमेश सिंह ठाकुर, सदन तिवारी, महिला बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू, जिला पंचायत उपाध्यक्ष किरण साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने भगवान श्रीजगन्नाथ के दर्शन कर प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि की कामना की।
धार्मिक आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा, बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हुए। जगह-जगह भजन मंडलियों ने संकीर्तन प्रस्तुत किया, जिससे श्रद्धालु भक्तिरस में डूबे नजर आए। पूरे मार्ग में भगवान के स्वागत के लिए विशेष तोरण द्वार, फूलों की सजावट और रंगोली बनाई गई थी। श्रद्धालुओं ने भगवान की एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार किया और रथ के दर्शन को अपने जीवन का सौभाग्य बताया।
रायपुर में आयोजित भगवान श्रीजगन्नाथ की रथयात्रा और बाहुड़ा रथयात्रा अब केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। हर वर्ष इस आयोजन में श्रद्धालुओं की बढ़ती भागीदारी यह दर्शाती है कि भगवान श्रीजगन्नाथ के प्रति लोगों की आस्था लगातार मजबूत हो रही है। यह आयोजन सामाजिक समरसता, सेवा, सहयोग और आध्यात्मिक चेतना का संदेश भी देता है।
समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि आने वाले वर्षों में भी रथयात्रा और बाहुड़ा रथयात्रा को और अधिक व्यवस्थित तथा भव्य बनाने के प्रयास जारी रहेंगे, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु इस दिव्य आयोजन का हिस्सा बन सकें। इस वर्ष की बाहुड़ा रथयात्रा ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि भगवान श्रीजगन्नाथ के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था आज भी समाज को एक सूत्र में बांधने की शक्ति रखती है। भक्ति, सेवा, समर्पण और सांस्कृतिक एकता का संदेश देती यह दिव्य यात्रा रायपुरवासियों के लिए लंबे समय तक यादगार बनी रहेगी।