मजदूरों के हक-अधिकार की जानकारी पहुंचाने में श्रम विभाग नाकाम? रायगढ़ में जागरूकता और निरीक्षण पर उठे सवाल
रायगढ़ जिले में श्रमिकों को उनके अधिकारों, श्रम कानूनों और शासन की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी नहीं मिलने को लेकर श्रम विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि विभाग की जागरूकता गतिविधियां जमीनी स्तर पर पर्याप्त नहीं हैं और औद्योगिक क्षेत्रों में श्रम कानूनों के पालन को लेकर नियमित निरीक्षण एवं कार्रवाई भी प्रभावी ढंग से नहीं हो रही है। श्रमिकों ने व्यापक जागरूकता अभियान और नियमित निगरानी की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. महेंद्र अग्रवाल, रायगढ़ l रायगढ़ जिले में मजदूरों के हक-अधिकार, श्रम कानूनों और शासन की विभिन्न श्रमिक कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी श्रमिकों तक नहीं पहुंचने को लेकर श्रम विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। जिले में बड़ी संख्या में मजदूर उद्योगों, निर्माण कार्यों और अन्य क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, लेकिन आरोप है कि उनमें से कई श्रमिक आज भी अपने कानूनी अधिकारों और सरकारी योजनाओं से पूरी तरह परिचित नहीं हैं। ऐसे में श्रमिक हितों की रक्षा के लिए जिम्मेदार विभाग की जमीनी सक्रियता को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
श्रम विभाग की जिम्मेदारी श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी, कार्यस्थल पर सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा, श्रमिक कल्याण योजनाओं, पंजीयन प्रक्रिया और अन्य कानूनी अधिकारों की जानकारी उपलब्ध कराना है। इसके लिए समय-समय पर जागरूकता अभियान और श्रमिक शिविर आयोजित किए जाने की आवश्यकता होती है। हालांकि रायगढ़ में आरोप लगाया जा रहा है कि विभाग की पहुंच आम मजदूरों तक सीमित है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ औद्योगिक इलाकों में काम करने वाले अनेक श्रमिकों तक योजनाओं और अधिकारों की पर्याप्त जानकारी नहीं पहुंच पा रही है।
इस स्थिति को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जिन मजदूरों को शासन की योजनाओं और अपने अधिकारों की जानकारी ही नहीं होगी, वे उनका लाभ कैसे उठा पाएंगे। श्रमिकों का कहना है कि जमीनी स्तर पर ऐसा कोई प्रभावी और नियमित तंत्र नजर नहीं आता, जिसके माध्यम से उन्हें उनके अधिकारों की जानकारी आसानी से मिल सके। जानकारी के अभाव में कई श्रमिक सरकारी सहायता, पंजीयन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं से वंचित रह सकते हैं।
दूसरी ओर रायगढ़ जिले में विभिन्न औद्योगिक इकाइयों में बड़ी संख्या में मजदूर कार्यरत हैं। इन उद्योगों में वेतन, काम के घंटे, कार्यस्थल की सुरक्षा और श्रम कानूनों के पालन को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे मामलों में श्रम विभाग की ओर से नियमित निरीक्षण और प्रभावी कार्रवाई की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। आरोप है कि उद्योगों में श्रमिकों की वास्तविक स्थिति की निगरानी पर्याप्त स्तर पर नहीं हो रही है, जिसके कारण मजदूरों से जुड़ी समस्याएं लंबे समय तक बनी रह सकती हैं।
यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि विभाग की ओर से कभी-कभार कार्रवाई कर औपचारिकता पूरी कर ली जाती है, लेकिन इसके बाद लगातार निगरानी का अभाव दिखाई देता है। यदि ऐसा है तो इससे श्रमिक हितों की निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि इन आरोपों पर श्रम विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण होगा, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
श्रमिक हितों से जुड़े लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन और श्रम विभाग को रायगढ़ में विशेष श्रमिक जागरूकता अभियान शुरू करना चाहिए। औद्योगिक क्षेत्रों के अलावा ग्रामीण और शहरी इलाकों में नियमित श्रमिक शिविर लगाए जाने चाहिए, जहां मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी, कार्यस्थल की सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा, पंजीयन और सरकारी योजनाओं की सरल भाषा में जानकारी दी जा सके।
इसके साथ ही उद्योगों में श्रम कानूनों के पालन, मजदूरी भुगतान, काम के घंटों और सुरक्षा व्यवस्था की नियमित एवं निष्पक्ष जांच की आवश्यकता बताई जा रही है। शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के साथ लगातार निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की मांग भी उठ रही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि श्रम विभाग रायगढ़ में श्रमिक जागरूकता और निरीक्षण व्यवस्था को लेकर कितनी गंभीरता दिखाता है और मजदूरों के हक-अधिकार की जानकारी कागजों से निकलकर जमीनी स्तर तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचती है।