पोड़ी में एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न, वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों की दी गई जानकारी
कृषि विज्ञान केंद्र कवर्धा एवं साइटोलाइफ एग्रीटेक मुंबई के संयुक्त प्रयास से ग्राम पोड़ी में एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण आयोजित किया गया, जिसमें किसानों को वैज्ञानिक खेती व मिट्टी स्वास्थ्य की जानकारी दी गई।
UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा। कृषि विज्ञान केंद्र, कवर्धा एवं साइटोलाइफ एग्रीटेक, मुंबई के संयुक्त तत्वावधान में विकासखंड कवर्धा के ग्राम पोड़ी में एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, फसल रोग प्रबंधन तथा मिट्टी स्वास्थ्य सुधार की नवीन तकनीकों से अवगत कराना था, जिससे उत्पादन एवं आय में वृद्धि की जा सके।
कार्यक्रम के दौरान किसानों के खेतों से मिट्टी के नमूने एकत्र कर मिट्टी परीक्षण किया गया। परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर कृषकों को उनकी भूमि के अनुसार उर्वरक एवं सुधारात्मक उपायों की वैज्ञानिक अनुशंसा दी गई। कृषि विज्ञान केंद्र, कवर्धा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. बी. पी. त्रिपाठी ने गन्ना फसल में लगने वाले प्रमुख रोगों एवं कीटों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने गन्ने के लाल सड़न रोग, चाबुक कंडवा तथा तना छेदक कीट के समन्वित प्रबंधन की विधियों को सरल भाषा में समझाया।
डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि लाल सड़न रोग गन्ना उत्पादन में भारी नुकसान पहुंचाता है, जिसकी रोकथाम के लिए टेबुकोनाजोल से बीज उपचार, रोग प्रतिरोधी किस्मों का चयन तथा संतुलित उर्वरक प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने किसानों से समय पर रोग पहचान और वैज्ञानिक सलाह अपनाने की अपील की।
कार्यक्रम में डॉ. बी. एस. परिहार ने गन्ने की उन्नत किस्मों, आधुनिक सस्य क्रियाओं, उर्वरक प्रबंधन एवं खरपतवार नियंत्रण की तकनीकों पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उन्नत किस्मों के चयन और वैज्ञानिक खेती से लागत कम कर अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
इस अवसर पर साइटोलाइफ एग्रीटेक, मुंबई के सीईओ डॉ. अमित त्रिपाठी स्वयं उपस्थित रहे। उन्होंने मिट्टी परीक्षण के निष्कर्ष साझा करते हुए बताया कि अधिकांश कृषकों की मिट्टी में विद्युत लवणीयता अधिक पाई गई है तथा ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा अत्यंत कम (0.1 से 0.3 प्रतिशत) है, जबकि इसका आदर्श स्तर 3 से 5 प्रतिशत होना चाहिए। उन्होंने जैविक पदार्थों के उपयोग, हरी खाद, कम्पोस्ट और संतुलित पोषण अपनाने पर जोर दिया।
किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को उपयोगी बताते हुए कहा कि इस तरह के वैज्ञानिक प्रशिक्षण से खेती की समस्याओं को समझने और समाधान पाने में काफी मदद मिलती है। कार्यक्रम से क्षेत्र के किसानों में आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि अपनाने के प्रति जागरूकता बढ़ी है।