सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ में पूर्ण हुए 5,92,508 आवासों की संख्या प्रमुख राज्यों की सूची में सबसे अधिक रही। इसी अवधि में मध्यप्रदेश में 4,90,185, महाराष्ट्र में 4,42,074, बिहार में 2,63,151, राजस्थान में 2,02,234, ओडिशा में 1,61,256, असम में 1,35,426 और गुजरात में 1,23,451 आवास पूर्ण होने की जानकारी दी गई है। इन आंकड़ों ने छत्तीसगढ़ में पीएम आवास योजना के क्रियान्वयन को लेकर राजनीतिक बहस को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
छत्तीसगढ़ में योजना के तहत आवास पूर्ण होने के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2016-17 में 136 आवास पूर्ण हुए थे। 2017-18 में यह संख्या बढ़कर 3,65,867 और 2018-19 में 3,41,378 हो गई। इसके बाद 2019-20 में 34,587, 2020-21 में 59,684, 2021-22 में 23,289 और 2022-23 में 33,688 आवास पूर्ण किए गए। वर्ष 2023-24 में आवास निर्माण की रफ्तार बढ़ी और 1,54,789 आवास पूर्ण हुए। 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 2,52,771 हो गई।
सबसे बड़ी बढ़ोतरी 2025-26 में दर्ज हुई, जब 5,92,508 आवास पूर्ण होने का आंकड़ा सामने आया। वहीं 2026-27 के लिए छत्तीसगढ़ को 3,65,179 आवासों का लक्ष्य निर्धारित किए जाने की जानकारी दी गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अब तक 1,98,414 आवास पूर्ण हो चुके हैं। यह निर्धारित लक्ष्य का करीब 54.3 प्रतिशत है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत केंद्र सरकार ने आवास प्लस सूची को अपडेट करने और पात्र ग्रामीण परिवारों की पहचान की व्यवस्था भी आगे बढ़ाई है।
विभागीय आंकड़ों में पुराने अधूरे आवासों, स्थायी प्रतीक्षा सूची और आवास प्लस के तहत स्वीकृत तथा पूर्ण किए गए मकानों का भी विवरण शामिल है। वर्ष 2016 से 2023 तक के शेष अधूरे आवासों में बड़ी संख्या में आवास पूर्ण किए जाने की जानकारी दी गई है। स्थायी प्रतीक्षा सूची और आवास प्लस में शामिल परिवारों के लिए भी स्वीकृति तथा निर्माण की प्रक्रिया जारी रहने की बात सामने आई है।
इसके अलावा पीएम जनमन योजना के तहत भी छत्तीसगढ़ में 34,461 आवास स्वीकृत किए जाने और इनमें से 24,025 आवास पूर्ण होने की जानकारी दी गई है। विशेष परियोजना के तहत 5,662 आवासों को स्वीकृति मिली, जिनमें 524 आवास पूर्ण बताए गए हैं। मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत भी स्वीकृत और पूर्ण आवासों का अलग आंकड़ा जारी किया गया है।
पीएम आवास योजना को लेकर विजय शर्मा और भूपेश बघेल के बीच प्रस्तावित बहस ऐसे समय हो रही है, जब योजना के निर्माण संबंधी आंकड़े राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गए हैं। एक ओर सरकार इन आंकड़ों के आधार पर योजना की प्रगति को सामने रख रही है, वहीं विपक्ष की ओर से योजना के क्रियान्वयन और पूर्ववर्ती वर्षों के प्रदर्शन को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की बहस में इन सरकारी आंकड़ों के साथ-साथ अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में आवास निर्माण की स्थिति भी प्रमुख मुद्दा बन सकती है।