तारापुर सरपंच-पंच विवाद ने लिया राजनीतिक रंग, घनश्याम निषाद और राजू डनसेना की गिरफ्तारी के विरोध में ग्रामीणों का प्रदर्शन
रायगढ़ जिले के तारापुर में सरपंच और पंचों के बीच अविश्वास प्रस्ताव को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक रंग लेता नजर आ रहा है। सरपंच डिग्री लाल सिदार की शिकायत पर एसटी-एससी एक्ट के तहत कार्रवाई के बाद घनश्याम निषाद और राजू डनसेना की गिरफ्तारी के विरोध में उनके परिजन और ग्रामीण कोतरा रोड थाने पहुंचे। खरसिया विधायक और पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने भी ग्रामीणों के समर्थन में आरोपियों को छोड़ने की मांग की।
UNITED NEWS OF ASIA. महेंद्र अग्रवाल, रायगढ़ l जिले के खरसिया विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत तारापुर में सरपंच और पंचों के बीच अविश्वास प्रस्ताव को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक रूप लेता नजर आ रहा है। सरपंच डिग्री लाल सिदार की शिकायत पर पुलिस द्वारा घनश्याम निषाद और राजू डनसेना के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर एसटी-एससी एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए दोनों की गिरफ्तारी के बाद मामला और गरमा गया है। आरोपियों के परिजन और ग्रामीण पुलिस कार्रवाई को गलत बताते हुए कोतरा रोड थाने पहुंचे और दोनों को छोड़ने की मांग की।
बताया जा रहा है कि तारापुर ग्राम पंचायत में सरपंच और पंचों के बीच पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा है। इस विवाद की शुरुआत सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की मांग से होने की बात सामने आई थी। घनश्याम निषाद और राजू डनसेना की ओर से अविश्वास प्रस्ताव की मांग किए जाने के बाद दोनों पक्षों के बीच मतभेद बढ़ने का दावा किया जा रहा है। इसी बीच सरपंच डिग्री लाल सिदार ने दोनों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने प्रकरण दर्ज किया।
पुलिस कार्रवाई के बाद घनश्याम निषाद और राजू डनसेना के परिजन तथा स्थानीय ग्रामीण कोतरा रोड थाने पहुंचे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि दोनों के खिलाफ की गई कार्रवाई उचित नहीं है। उन्होंने पुलिस से दोनों को रिहा करने की मांग की। इस दौरान मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया और खरसिया विधायक तथा पूर्व मंत्री उमेश पटेल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ ग्रामीणों के समर्थन में थाने पहुंचे।
उमेश पटेल और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोपियों के परिजनों और ग्रामीणों की मांग का समर्थन करते हुए घनश्याम निषाद और राजू डनसेना को छोड़ने की मांग की। थाने के बाहर इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन भी किया गया। विधायक और कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना था कि मामले की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए और ग्रामीणों की ओर से उठाई जा रही आपत्तियों को भी गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
वहीं दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि कार्रवाई दर्ज एफआईआर और उसमें लगाए गए आरोपों के आधार पर की गई है। पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह ने कहा कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर के अनुसार मामले की जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब तारापुर पंचायत का विवाद स्थानीय राजनीतिक मुद्दे के रूप में भी सामने आ रहा है। एक ओर सरपंच की शिकायत के आधार पर पुलिस कार्रवाई हुई है, वहीं दूसरी ओर आरोपियों के परिजन और ग्रामीण इसे गलत बताते हुए विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं के समर्थन में थाने पहुंचने से मामले को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है। शिकायत में लगाए गए आरोपों और पुलिस कार्रवाई को लेकर दोनों पक्षों की अलग-अलग दलीलें सामने आ रही हैं। ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच पूरी होने और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। तारापुर में सरपंच और पंचों के बीच शुरू हुआ यह विवाद अब पंचायत स्तर से निकलकर पुलिस और राजनीतिक मंच तक पहुंच गया है, जिस पर क्षेत्र की नजर बनी हुई है।