समान नागरिक संहिता-2026 पर अल्पसंख्यक आयोग का मंथन, मुस्लिम, सिख, मसीही, जैन और बौद्ध समाज ने दिए सुझाव

छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने समान नागरिक संहिता-2026 को लेकर विभिन्न अल्पसंख्यक समाजों के प्रतिनिधियों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया। बैठक में विवाह पंजीयन, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों पर समाजों की राय और सुझाव लिए गए। आयोग इन सुझावों को संकलित कर समान नागरिक संहिता समिति के समक्ष प्रस्तुत करेगा।

Sep 5, 2026 - 10:38
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समान नागरिक संहिता-2026 पर अल्पसंख्यक आयोग का मंथन, मुस्लिम, सिख, मसीही, जैन और बौद्ध समाज ने दिए सुझाव

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l समान नागरिक संहिता यानी UCC-2026 को लेकर छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने विभिन्न अल्पसंख्यक समाजों के प्रतिनिधियों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया। खालसा स्कूल स्थित माता सुंदरी सभागार में आयोजित बैठक की अध्यक्षता राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा ने की। बैठक का उद्देश्य समान नागरिक संहिता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विभिन्न समाजों की राय, सुझाव और व्यावहारिक पक्ष को समझना तथा प्राप्त सुझावों को संकलित कर समान नागरिक संहिता समिति के समक्ष प्रस्तुत करना रहा।

विचार-विमर्श के दौरान विवाह एवं विवाह पंजीयन, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार एवं विरासत और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषय प्रमुख रूप से चर्चा में रहे। लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर अधिकांश समाजों के प्रतिनिधियों ने असहमति जताई। प्रतिनिधियों का कहना था कि इस विषय में किसी भी कानूनी प्रावधान पर विचार करते समय भारतीय पारिवारिक व्यवस्था, सामाजिक मूल्यों और विभिन्न समुदायों की मान्यताओं को ध्यान में रखना जरूरी है।

विवाह पंजीयन के संबंध में प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि विवाह के बाद पंजीयन को अनिवार्य बनाने की दिशा में स्पष्ट और सरल व्यवस्था तैयार की जानी चाहिए। उनका कहना था कि प्रत्येक जिले में विवाह पंजीयन के लिए सक्षम अधिकारी की व्यवस्था हो और आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। पंजीयन प्रक्रिया को सरकारी स्तर पर सरल, सुगम और पारदर्शी बनाने पर भी जोर दिया गया।

तलाक और वैवाहिक विवादों के विषय में समाज प्रमुखों ने कहा कि पति-पत्नी के बीच उत्पन्न विवादों को आपसी संवाद तथा सामाजिक स्तर पर समाधान की संभावनाओं के माध्यम से सुलझाने को भी महत्व दिया जाना चाहिए। विवाह विच्छेद की स्थिति में दोनों पक्षों के अधिकारों और हितों को ध्यान में रखते हुए न्यायसंगत और व्यवहारिक प्रावधान बनाने का सुझाव दिया गया।

भरण-पोषण को लेकर भी प्रतिनिधियों ने अपनी राय रखी। उनका कहना था कि अलगाव या तलाक की स्थिति में आर्थिक रूप से प्रभावित पक्ष के हितों की रक्षा जरूरी है, लेकिन व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो न्यायसंगत और व्यवहारिक होने के साथ दोनों पक्षों के अधिकारों के संतुलन पर आधारित हो। उत्तराधिकार और विरासत के मुद्दे पर प्रतिनिधियों ने भारत की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि कानून समानता और न्याय के उद्देश्य को मजबूत करने के साथ देश की विविधता में एकता की पहचान को भी सुरक्षित रखे।

बैठक में यह सुझाव भी सामने आया कि समान नागरिक संहिता का प्रारूप तैयार होने के बाद विभिन्न धर्मों और समाजों के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ एक बार फिर चर्चा की जाए, ताकि अंतिम प्रारूप तैयार करने से पहले व्यावहारिक चिंताओं और सुझावों को समुचित रूप से शामिल किया जा सके।

अमरजीत सिंह छाबड़ा ने कहा कि आयोग को विचार-विमर्श के दौरान विभिन्न समाजों से प्राप्त राय और सुझावों को संकलित किया जाएगा। इसके आधार पर विस्तृत ड्राफ्ट और सुझाव पत्र तैयार कर समान नागरिक संहिता समिति को भेजा जाएगा। बैठक में मुस्लिम समाज से मखमूर इकबाल खान, मौलाना इरशाद अली, रियाज अशरफी और मौलाना डॉ. जहीरूद्दीन सहित सिख, मसीही, जैन और बौद्ध समाज के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे। आयोग के अनुसार यह पहल UCC को लेकर अल्पसंख्यक समाजों की राय को एक मंच पर लाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।