ओरछा में कन्या छात्रावास निर्माण की जमीन पर विवाद, ग्रामीणों ने वैकल्पिक स्थल का दिया प्रस्ताव
नारायणपुर जिले के ओरछा मुख्यालय में कन्या छात्रावास निर्माण के लिए चयनित जमीन को लेकर विवाद सामने आया है। ग्रामीण मंगतूराम उसेंडी ने जमीन पर अपने परिवार के पूर्वजों के समय से उपयोग का दावा किया है। ग्रामीण छात्रावास निर्माण के विरोध में नहीं हैं, बल्कि विवादित जमीन के बदले दूसरी जगह निर्माण की मांग कर रहे हैं। अबूझमाड़ क्षेत्र असर्वेक्षित होने के कारण जमीन के स्वामित्व और पट्टे से जुड़ा मामला जटिल बना हुआ है। प्रशासन दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने का प्रयास कर रहा है।
UNITED NEWS OF ASIA. संतोष मजुमदार, नारायणपुर l नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र के ओरछा मुख्यालय में कन्या छात्रावास निर्माण के लिए चयनित जमीन को लेकर विवाद सामने आया है। प्रशासन की ओर से बच्चों की सुविधा और शिक्षा को ध्यान में रखते हुए छात्रावास निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है, लेकिन इसी बीच एक ग्रामीण परिवार ने निर्माण के लिए चुनी गई जमीन पर लंबे समय से उपयोग का दावा किया है। इस विवाद के कारण छात्रावास निर्माण को लेकर स्थिति फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सकी है।
ग्रामीण मंगतूराम उसेंडी का कहना है कि जिस जमीन पर कन्या छात्रावास का निर्माण प्रस्तावित है, उसका उपयोग उनके परिवार द्वारा पूर्वजों के समय से किया जाता रहा है। ग्रामीणों के अनुसार उन्होंने कभी छात्रावास निर्माण का विरोध नहीं किया है। उनका कहना है कि बच्चों के लिए छात्रावास की आवश्यकता और इसके महत्व को वे समझते हैं, लेकिन जमीन को लेकर विवाद की स्थिति में प्रशासन को किसी दूसरे स्थान का चयन करना चाहिए।
इसी मांग को लेकर ग्रामीणों ने 18 जून को विशेष ग्रामसभा आयोजित की और कलेक्टर को आवेदन सौंपा। ग्रामसभा अध्यक्ष बंजाराम उसेंडी, गोयल दामाराम उसेंडी और पटेल रमेश उसेंडी ने पेसा कानून का हवाला देते हुए ग्रामसभा की सहमति के महत्व की बात कही है। ग्रामीणों का प्रस्ताव है कि प्रशासन विवादित जमीन के स्थान पर किसी अन्य उपयुक्त भूमि का चयन करे और वहां छात्रावास का निर्माण कराया जाए। ग्रामीणों ने इसके लिए प्रशासन को सहयोग देने की बात भी कही है।
वहीं प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार संबंधित भूमि शासकीय रिकॉर्ड में दर्ज है। अबूझमाड़ क्षेत्र लंबे समय से असर्वेक्षित क्षेत्र रहा है, जिसके कारण यहां जमीन के स्वामित्व और पट्टे से जुड़े मामले सामान्य क्षेत्रों की तुलना में अलग और जटिल हैं। प्रशासन के अनुसार क्षेत्र में किसी व्यक्ति के पास जमीन का वैध पट्टा नहीं है। ऐसे में शासकीय रिकॉर्ड और स्थानीय स्तर पर लंबे समय से जमीन के उपयोग के दावों के बीच संतुलन बनाना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।
जनहित को देखते हुए कन्या छात्रावास का निर्माण प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। दूसरी ओर ग्रामीणों की आपत्ति को भी नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है। फिलहाल मामले को कलेक्टर के समक्ष विचाराधीन बताया जा रहा है और दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है। यदि वैकल्पिक स्थल पर सहमति बनती है तो छात्रावास निर्माण का रास्ता आसान हो सकता है। अब सभी की नजर प्रशासन के आगामी निर्णय पर टिकी है।