दुर्ग में 'मोर गांव मोर पानी' अभियान: वर्षा जल संरक्षण और भूजल रिचार्ज की अभिनव पहल
दुर्ग जिले में 'मोर गांव मोर पानी' अभियान के तहत पाटन और धमधा विकासखंड के 15 ग्रामों में वर्षा जल संरक्षण और भूजल रिचार्ज के लिए इंजेक्शन वेल, सोख्ता गड्ढे और जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य गांवों को जल-सुरक्षित बनाना है।
UNITED NEWS OF ASIA. रोहिताश सिंह भुवाल, दुर्ग l जलवायु परिवर्तन, लगातार गिरते भूजल स्तर और भविष्य की जल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दुर्ग जिला प्रशासन ने 'मोर गांव मोर पानी' अभियान के तहत वर्षा जल संरक्षण और भूजल रिचार्ज की अभिनव पहल शुरू की है। कलेक्टर अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजरंग कुमार दुबे के नेतृत्व में वाटरएड इंडिया के सहयोग से यह अभियान पाटन और धमधा विकासखंड के चयनित गांवों में संचालित किया जा रहा है।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल का अधिकतम संचयन कर भूजल स्तर को बढ़ाना तथा चयनित गांवों को चरणबद्ध तरीके से जल-सुरक्षित ग्राम (Water Secure Villages) के रूप में विकसित करना है। मानसून शुरू होने से पहले ही जल संरक्षण से जुड़ी प्रमुख संरचनाओं का निर्माण पूरा कर लिया गया, ताकि इस वर्ष होने वाली बारिश का अधिकतम लाभ ग्रामीणों को मिल सके।
अभियान के तहत चयनित गांवों में 6 इंजेक्शन वेल तैयार किए गए हैं। इन वेलों के माध्यम से वर्षा जल को वैज्ञानिक तरीके से सीधे भूजल स्तर तक पहुंचाया जाएगा। इन संरचनाओं से लगभग 9,324 वर्गमीटर जलग्रहण क्षेत्र का वर्षा जल भूजल में पुनर्भारित होगा, जिससे आसपास के 47 पेयजल स्रोतों के जलस्तर को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
ग्राम घुघुवा, पतोरा, चुन्कत्ता, सेलूद, गोंडपेंड्री और फेकारी में स्थापित इंजेक्शन वेल भविष्य में लाखों लीटर वर्षा जल को भूजल में पहुंचाने का कार्य करेंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट कम होने की संभावना बढ़ेगी और लंबे समय तक जल उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।
जल संरक्षण के साथ-साथ घरेलू एवं सामुदायिक अपशिष्ट जल के वैज्ञानिक प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। ग्राम सेलूद और गोंडपेंड्री में लगभग 75 घरेलू सोख्ता संरचनाओं का निर्माण किया गया है। इसके अलावा विभिन्न गांवों में 5 सामुदायिक सोख्ता गड्ढे हैंडपंपों के पास बनाए गए हैं, ताकि व्यर्थ बहने वाले पानी का उपयोग भूजल पुनर्भरण में किया जा सके। इससे जलभराव की समस्या कम होगी और स्वच्छता को भी बढ़ावा मिलेगा।
अभियान को जन-आंदोलन का रूप देने के लिए ग्राम पंचायतों में नियमित बैठकें, जनजागरूकता अभियान और जल संरक्षण से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। 'रिड्यूस वाटर वेस्टेज' अभियान के माध्यम से ग्रामीणों को पानी का विवेकपूर्ण उपयोग, वर्षा जल संचयन और प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
यह पहल पाटन विकासखंड की 7 और धमधा विकासखंड की 8 ग्राम पंचायतों, यानी कुल 15 ग्राम पंचायतों में लागू की जा रही है। आगामी चरण में 10 नई जल संरक्षण संरचनाएं, 150 घरेलू सोख्ता गड्ढे तथा 25 सामुदायिक सोख्ता गड्ढों के निर्माण की योजना तैयार की गई है। साथ ही तालाबों और अन्य जल स्रोतों के संरक्षण एवं वैज्ञानिक प्रबंधन को भी और मजबूत किया जाएगा।
जिला प्रशासन और वाटरएड इंडिया का लक्ष्य सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाना है, ताकि आने वाले वर्षों में ये गांव जल सुरक्षा के क्षेत्र में प्रदेश के लिए मॉडल ग्राम के रूप में स्थापित हो सकें।