महिला आयोग अध्यक्ष को पद से हटाने की मांग, महिला कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना

प्रदेश महिला कांग्रेस ने राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष पर पद के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए उन्हें तत्काल पद से हटाने की मांग की है। संगठन का आरोप है कि आयोग महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने के बजाय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है। साथ ही महिला कांग्रेस ने नीट आंदोलन, छात्राओं की सुरक्षा और महिला अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार और महिला आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

Jul 29, 2026 - 11:32
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महिला आयोग अध्यक्ष को पद से हटाने की मांग, महिला कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में प्रदेश महिला कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष संगीता सिन्हा ने राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें तत्काल पद से हटाने की मांग की है। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि आयोग द्वारा कांग्रेस नेताओं के सोशल मीडिया पोस्ट और बच्चियों के समर्थन में की गई टिप्पणियों पर एफआईआर के निर्देश देना महिला विरोधी कदम है।

संगीता सिन्हा ने आरोप लगाया कि राज्य महिला आयोग अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के बजाय राजनीतिक दबाव में कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि महिला आयोग का दायित्व महिलाओं और बच्चियों के साथ होने वाले अत्याचारों पर स्वतः संज्ञान लेकर न्याय दिलाना है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में आयोग की कार्यशैली इसके विपरीत दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है।

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि महिलाओं और बेटियों के अधिकारों की रक्षा करने वाले संस्थानों को निष्पक्ष होकर कार्य करना चाहिए। महिला कांग्रेस का कहना है कि जिन लोगों ने कथित रूप से बच्चियों के समर्थन में सोशल मीडिया पर अपनी बात रखी, उनके विरुद्ध कार्रवाई की मांग करना पीड़ित पक्ष की आवाज को दबाने जैसा है। संगठन ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं के विपरीत बताया।

महिला कांग्रेस ने हाल ही में सामने आए छात्राओं से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि जगदलपुर की नीट छात्रा सुरला हारिका राव नायडू की आत्महत्या और नीट पेपर लीक विरोधी आंदोलन में शामिल होने जा रही एक अन्य छात्रा की सड़क दुर्घटना में मृत्यु जैसे मामलों पर महिला आयोग की ओर से अपेक्षित सक्रियता दिखाई नहीं दी। संगठन ने इन घटनाओं पर आयोग की चुप्पी पर सवाल उठाए।

विज्ञप्ति में जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन के दौरान छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार, बल प्रयोग और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने जैसी घटनाओं पर भी महिला आयोग ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। महिला कांग्रेस ने कहा कि यदि महिलाओं और छात्राओं के अधिकारों से जुड़े मामलों में आयोग सक्रिय नहीं होता, तो उसकी भूमिका पर स्वाभाविक रूप से प्रश्न उठेंगे।

महिला कांग्रेस ने राज्य सरकार से मांग की है कि महिला आयोग की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए और यदि पद के दुरुपयोग के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदार पदाधिकारी के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाए। संगठन का कहना है कि महिला आयोग को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होकर केवल महिलाओं के अधिकारों और न्याय के पक्ष में कार्य करना चाहिए। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि महिला सुरक्षा, सम्मान और न्याय के मुद्दों पर कांग्रेस आगे भी अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी।