जांजगीर-चांपा गैंगरेप केस में बड़ा फैसला, चारों आरोपियों को 20-20 साल सश्रम कारावास

जांजगीर-चांपा में सामूहिक दुष्कर्म के मामले में कोर्ट ने चारों आरोपियों को 20-20 साल सश्रम कारावास और 50-50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। पुलिस की सशक्त विवेचना से पीड़िता को न्याय मिला।

Apr 9, 2026 - 15:01
 0  35
जांजगीर-चांपा गैंगरेप केस में बड़ा फैसला, चारों आरोपियों को 20-20 साल सश्रम कारावास

UNITED NEWS OF ASIA. हितेश पाण्डेय, जांजगीर।  छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में सामूहिक दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में न्यायालय ने कड़ा फैसला सुनाते हुए चारों आरोपियों को 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास और 50-50 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। इस निर्णय से पीड़िता और उसके परिवार को न्याय मिला है, वहीं समाज में अपराधियों के खिलाफ सख्त संदेश भी गया है।

यह मामला 18 मई 2025 का है, जब थाना चाम्पा क्षेत्र में एक युवती के साथ चार आरोपियों द्वारा सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया गया था। जानकारी के अनुसार, आरोपी पीड़िता के परिचित थे और घटना वाले दिन वे उसके घर पहुंचे थे। घर में भोजन करने के बाद, जब पीड़िता के पिता सो गए, तब आरोपियों ने युवती को जबरन दूसरे कमरे में ले जाकर अपराध को अंजाम दिया और फरार हो गए।

घटना की सूचना पीड़िता की मां द्वारा थाना चाम्पा पुलिस को दी गई, जिसके बाद तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हर पहलू पर बारीकी से विवेचना की।

जांच के दौरान घटनास्थल का फोरेंसिक विशेषज्ञों द्वारा निरीक्षण कराया गया और महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच में आरोपियों की उपस्थिति की पुष्टि हुई। इसके साथ ही साइबर सेल की मदद से आरोपियों के मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रैक की गई, जिससे घटना के समय उनकी मौजूदगी स्पष्ट हुई।

घटना के बाद आरोपी फरार हो गए थे और नेपाल भागने की कोशिश में थे। थाना चाम्पा के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक जयप्रकाश गुप्ता के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई, जिसने आरोपियों का पीछा करते हुए कोरबा जिले के करतला क्षेत्र के घने जंगलों से सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजते हुए मामले की विस्तृत जांच पूरी की और सशक्त साक्ष्यों के साथ न्यायालय में चार्जशीट प्रस्तुत की। कोर्ट ने मामले की त्वरित सुनवाई करते हुए प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर चारों आरोपियों को दोषी करार दिया और उन्हें कड़ी सजा सुनाई।

इस पूरे प्रकरण में निरीक्षक जयप्रकाश गुप्ता, सहायक उप निरीक्षक अरुण कुमार सिंह, मुकेश कुमार पांडेय, प्रधान आरक्षक वीरेंद्र कुमार टंडन सहित अन्य पुलिसकर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनकी सक्रियता और पेशेवर जांच के चलते यह मामला मजबूत बना और न्यायालय में दोषसिद्धि संभव हो सकी।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई और न्यायालय के इस फैसले से आमजन में कानून व्यवस्था के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है। यह मामला दर्शाता है कि सशक्त जांच और ठोस साक्ष्यों के आधार पर अपराधियों को सजा दिलाई जा सकती है, जिससे समाज में न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता बनी रहती है।