भारतीय ऑटो बाजार में बड़ा बदलाव: 12 से 20 लाख की कारों की बिक्री में 33.6% उछाल, SUV-CNG और EV की बढ़ी मांग

भारतीय कार बाजार में ग्राहकों की पसंद तेजी से बदल रही है। डेलोइट इंडिया की व्हीलवॉच रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में 12 से 20 लाख रुपये की कीमत वाली कारों की बिक्री में सालाना आधार पर 33.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में भी तेज उछाल दर्ज किया गया। SUV सेगमेंट में कॉम्पैक्ट मॉडल लोकप्रिय हो रहे हैं, जबकि डीलरशिप पर वाहनों का स्टॉक बढ़ना नई चुनौती बन रहा है।

Nov 5, 2026 - 18:14
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भारतीय ऑटो बाजार में बड़ा बदलाव: 12 से 20 लाख की कारों की बिक्री में 33.6% उछाल, SUV-CNG और EV की बढ़ी मांग

UNITED NEWS OF ASIA. भारत के चार पहिया वाहन बाजार में ग्राहकों की पसंद तेजी से बदल रही है। अब कार खरीदार केवल कम कीमत और बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता नहीं दे रहे, बल्कि बेहतर फीचर्स, आधुनिक तकनीक, सुरक्षा और आराम के लिए अधिक बजट खर्च करने को तैयार हैं। डेलोइट इंडिया की ताजा ऑटो रिपोर्ट ‘व्हीलवॉच’ के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में बारह लाख से बीस लाख रुपये की कीमत वाली कारों की बिक्री में सबसे ज्यादा तेजी दर्ज की गई है।

12 से 20 लाख रुपये की कारों की बढ़ी मांग

रिपोर्ट के अनुसार, इस प्राइस रेंज की कारों की बिक्री में सालाना आधार पर 33.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। बाजार में इस सेगमेंट की हिस्सेदारी भी 1.2 प्रतिशत बढ़ी है। इसके विपरीत, सात लाख से बारह लाख रुपये की कीमत वाली कारों की मांग में 0.4 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, कुल बिक्री में इस श्रेणी की हिस्सेदारी अभी भी करीब आधी बनी हुई है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि GST 2.0 से जुड़ी नीतिगत प्राथमिकताओं के बाद पैसेंजर वाहनों की थोक बिक्री में भी तेजी आई। दूसरी तिमाही में यह सालाना आधार पर 30.7 प्रतिशत बढ़कर चौदह लाख यूनिट से अधिक हो गई। यह वृद्धि पहली तिमाही में दर्ज 25.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी से ज्यादा रही।

पेट्रोल से CNG और EV की ओर बढ़ रहे ग्राहक

ईंधन के विकल्पों को लेकर भी भारतीय ग्राहकों की सोच में बदलाव दिखाई दे रहा है। पेट्रोल कारों की बाजार हिस्सेदारी दूसरी तिमाही में 2.8 प्रतिशत घटकर 42.6 प्रतिशत रह गई। वहीं CNG वाहनों के रजिस्ट्रेशन में करीब पचास प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह आंकड़ा दो लाख तैंतीस हजार यूनिट तक पहुंच गया।

गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में CNG मॉडल की बिक्री ने पेट्रोल गाड़ियों को भी पीछे छोड़ दिया। कम रनिंग कॉस्ट और ईंधन खर्च में बचत को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है। इसके अलावा E20 फ्यूल को लेकर कुछ ग्राहकों की सतर्कता भी वैकल्पिक ईंधन वाले वाहनों की मांग को प्रभावित कर रही है।

इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में भी तेजी

इलेक्ट्रिक वाहन यानी EV सेगमेंट में भी मजबूत वृद्धि देखने को मिली है। रिपोर्ट के मुताबिक, EV रजिस्ट्रेशन लगभग दोगुने होकर करीब सत्तानवे हजार यूनिट तक पहुंच गए। इसके साथ ही बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी पहली तिमाही के छह प्रतिशत से बढ़कर 6.7 प्रतिशत हो गई। यह संकेत है कि भारतीय ग्राहक धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर भी आकर्षित हो रहे हैं।

SUV बाजार में कॉम्पैक्ट मॉडल का दबदबा

SUV सेगमेंट में कॉम्पैक्ट मॉडल की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। इनकी बाजार हिस्सेदारी में 3.3 प्रतिशत का सुधार दर्ज किया गया। ग्राहकों को छोटी SUV में बेहतर फीचर्स और प्रीमियम अनुभव मिल रहा है। इसके चलते मिड-साइज SUV की हिस्सेदारी में 1.9 प्रतिशत की गिरावट आई है। कुछ खरीदार नई मिड-साइज SUV के बजाय सेकेंड हैंड प्रीमियम ब्रांड की कारों को भी विकल्प के रूप में देख रहे हैं।

डीलरों के सामने बढ़ते स्टॉक की चुनौती

बाजार में मांग बढ़ने के बावजूद वाहन कंपनियों की थोक आपूर्ति और वास्तविक रिटेल बिक्री के बीच अंतर डीलरों के लिए चिंता का विषय बन रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, रिटेल बिक्री में 22.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, लेकिन डीलरशिप पर वाहनों का स्टॉक भी लगातार बढ़ा है। जुलाई के अंत में डीलरों के पास करीब तैंतीस से पैंतीस दिनों का स्टॉक था, जो सितंबर के अंत तक बढ़कर तैंतालीस से पैंतालीस दिनों तक पहुंच गया।

कुल मिलाकर भारतीय ऑटो बाजार में प्रीमियम कारों, कॉम्पैक्ट SUV, CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग नए रुझान तय कर रही है। आने वाले समय में कंपनियों और डीलरों के लिए ग्राहकों की बदलती पसंद के साथ उत्पादन, आपूर्ति और स्टॉक का संतुलन बनाए रखना अहम चुनौती होगा।