धान खरीदी की अवधि घटाने पर डॉ. लक्ष्मी ध्रुव ने सरकार को घेरा, कहा- भाजपा का किसान विरोधी चेहरा बेनकाब
सिहावा की पूर्व विधायक डॉ. लक्ष्मी ध्रुव ने छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार पर धान खरीदी की अवधि घटाने को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले जहां किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए तीन महीने का समय मिलता था, वहीं अब खरीदी अवधि घटाकर पंद्रह नवंबर से पंद्रह जनवरी तक कर दी गई है। ध्रुव ने मौसम की मार से प्रभावित किसानों की परेशानी का हवाला देते हुए खरीदी की अवधि बढ़ाने की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी l छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की अवधि को लेकर सियासत तेज हो गई है। सिहावा की पूर्व विधायक डॉ. लक्ष्मी ध्रुव ने भाजपा सरकार पर किसानों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि पहले किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए लगभग तीन महीने का समय मिलता था, लेकिन अब खरीदी की अवधि घटाकर दो महीने कर दी गई है। उनके मुताबिक, सरकार का यह फैसला किसानों की मुश्किलें बढ़ाने वाला है।
डॉ. लक्ष्मी ध्रुव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने किसानों से धान तीन हजार पांच सौ रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदने का वादा पूरा नहीं किया और अब खरीदी के लिए मिलने वाले समय में भी कटौती कर दी है। उन्होंने कहा कि मौसम की मार से किसान पहले ही परेशान हैं। ऐसे समय में खरीदी की अवधि कम करना उनकी समस्याओं को और बढ़ा सकता है।
मौसम की मार से परेशान किसानों की बढ़ सकती है मुश्किल
पूर्व विधायक ने कहा कि चक्रवाती परिस्थितियों और मौसम में बदलाव के कारण किसानों की फसल प्रभावित हुई है। कई किसानों की फसल अभी खेतों में हरी है और पूरी तरह पक नहीं पाई है, जबकि कुछ किसानों को फसल खराब होने की चिंता सता रही है। ऐसे में किसानों को अपनी उपज तैयार करने और सुरक्षित रखने के लिए अतिरिक्त समय की जरूरत है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसान मौसम की चुनौतियों से जूझ रहे हैं, तब सरकार को धान खरीदी की अवधि बढ़ानी चाहिए थी। इसके विपरीत खरीदी का समय कम करने से किसानों पर फसल बेचने का दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने इसे भाजपा सरकार की किसान विरोधी सोच का उदाहरण बताया।
समर्थन मूल्य और किसानों के वादों पर भी उठाए सवाल
डॉ. ध्रुव ने पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उस समय भी किसान आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में किसानों को धान का बेहतर मूल्य मिला और किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के प्रयास किए गए।
उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के दौरान धान खरीदी की दर तीन हजार एक सौ रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंची थी। वहीं भाजपा सरकार द्वारा तीन हजार दो सौ रुपये प्रति क्विंटल की दर का वादा किए जाने के बावजूद अब तक इसमें अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है। उन्होंने भाजपा सरकार पर किसानों से किए गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया।
खरीदी की अवधि बढ़ाने की मांग
पूर्व विधायक ने कहा कि किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए। मौसम की स्थिति और फसल की वास्तविक परिपक्वता को ध्यान में रखते हुए धान खरीदी की अवधि बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि किसी भी किसान को जल्दबाजी में अपनी उपज बेचने के लिए मजबूर न होना पड़े।
डॉ. लक्ष्मी ध्रुव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि धान खरीदी की अवधि में कटौती का फैसला किसानों के हितों के विपरीत है। हालांकि, यह पूरी प्रतिक्रिया पूर्व विधायक द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोपों और उनके दावों पर आधारित है। सरकार की ओर से इस मामले में आधिकारिक पक्ष सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।