भारत का दोटूक रुख: बिना वीटो पावर के UNSC की स्थायी सदस्यता मंजूर नहीं, ‘सेकंड क्लास स्टेटस’ से इनकार

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता को लेकर भारत ने स्पष्ट किया है कि वह बिना वीटो पावर के स्थायी सदस्यता स्वीकार नहीं करेगा। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वथनेनी ने बिना वीटो अधिकार वाली स्थायी सदस्यता को दूसरे दर्जे की व्यवस्था बताया। भारत सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार, समान अधिकार और बेहतर क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की मांग कर रहा है। इसके साथ ही भारत 2028-29 के कार्यकाल के लिए अस्थायी सदस्यता हासिल करने की दिशा में भी प्रयासरत है।

Oct 27, 2026 - 15:42
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भारत का दोटूक रुख: बिना वीटो पावर के UNSC की स्थायी सदस्यता मंजूर नहीं, ‘सेकंड क्लास स्टेटस’ से इनकार

UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता को लेकर भारत ने अपना रुख एक बार फिर स्पष्ट किया है। भारत का कहना है कि सुरक्षा परिषद में सुधार के बाद नए स्थायी सदस्यों को मौजूदा पांच स्थायी सदस्यों के समान अधिकार मिलने चाहिए। भारत बिना वीटो पावर वाली स्थायी सदस्यता को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वथनेनी ने ऐसी व्यवस्था को ‘सेकंड क्लास’ यानी दूसरे दर्जे की सदस्यता करार दिया।

वीटो पावर पर भारत का स्पष्ट रुख

संयुक्त राष्ट्र महासभा में अंतर-सरकारी वार्ता की पूर्ण बैठक के दौरान वीटो पावर के मुद्दे पर भारत ने अपना पक्ष रखा। राजदूत हरीश पर्वथनेनी के अनुसार, जब तक सुरक्षा परिषद में वीटो पावर की व्यवस्था मौजूद है, तब तक सुधार के बाद बनने वाली परिषद के सभी स्थायी सदस्यों को समान अधिकार दिए जाने चाहिए। भारत का मानना है कि नए स्थायी सदस्यों को वीटो से वंचित रखने पर सुरक्षा परिषद में पहले से मौजूद असमानता बनी रहेगी।

भारत ने चेतावनी दी है कि बिना वीटो अधिकार वाले दीर्घकालिक सदस्यों की अलग श्रेणी बनाने से परिषद की मौजूदा शक्ति संरचना में वास्तविक बदलाव नहीं होगा। इससे अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे पांच स्थायी सदस्यों की निर्णय लेने की शक्ति पर भी खास असर नहीं पड़ेगा।

भारत क्यों चाहता है सुरक्षा परिषद में सुधार?

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थापना वर्ष 1945 में हुई थी। भारत का मानना है कि वर्तमान वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए परिषद की संरचना में बदलाव जरूरी है। दुनिया में कई देशों की भूमिका और प्रभाव बढ़ा है, लेकिन सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता की व्यवस्था में व्यापक बदलाव नहीं हुआ है।

भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी, दोनों श्रेणियों में सदस्यों की संख्या बढ़ाने की मांग करता रहा है। भारत के अनुसार, सुधार केवल सदस्यों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, सदस्यता की श्रेणियां, परिषद का आकार और उसकी कार्यप्रणाली जैसे मुद्दों को भी शामिल किया जाना चाहिए।

लिखित प्रस्तावों और समय-सीमा पर जोर

भारत ने सुरक्षा परिषद में सुधार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए स्पष्ट समय-सीमा और ठोस लक्ष्यों के साथ बातचीत की मांग की है। भारत का पक्ष है कि लिखित प्रस्तावों के आधार पर सार्थक चर्चा होनी चाहिए, ताकि सुधार की प्रक्रिया अनिश्चितकाल तक लंबित न रहे। भारत चाहता है कि संयुक्त राष्ट्र की निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रभावी बने।

क्या है वीटो पावर?

वीटो पावर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों—अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस—को प्राप्त विशेष अधिकार है। इसके तहत कोई स्थायी सदस्य महत्वपूर्ण गैर-प्रक्रियात्मक प्रस्ताव को रोक सकता है, भले ही परिषद के अधिकांश सदस्य उसका समर्थन कर रहे हों। इसी विशेषाधिकार को लेकर सुरक्षा परिषद की संरचना में समानता और प्रतिनिधित्व पर लंबे समय से बहस होती रही है।

2028-29 की अस्थायी सदस्यता पर भी नजर

स्थायी सदस्यता के साथ भारत 2028-29 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट हासिल करने का भी प्रयास कर रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एशिया-प्रशांत समूह की सीट के लिए भारत और ताजिकिस्तान के बीच मुकाबला होना है। हालांकि, भारत की दीर्घकालिक प्राथमिकता सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता और समान अधिकार हासिल करना है। भारत का कहना है कि परिषद में वास्तविक सुधार तभी संभव है, जब नए स्थायी सदस्यों को मौजूदा स्थायी सदस्यों के बराबर अधिकार दिए जाएं।