छिंदवाड़ा में ‘सिलसिला एवं तलाश-ए-जौहर’ का आयोजन, अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ के बलिदान और राष्ट्रीय चेतना पर हुई चर्चा

मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी और जिला अदब गोशा छिंदवाड़ा के संयुक्त तत्वावधान में ‘सिलसिला एवं तलाश-ए-जौहर’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ के बलिदान, देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सद्भाव पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में शायरों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से इंसानियत, सामाजिक समरसता और वतनपरस्ती का संदेश दिया। ‘तलाश-ए-जौहर’ प्रतियोगिता में अयाज़ ख़ान ने उत्कृष्ट शेर प्रस्तुत किए।

Oct 28, 2026 - 10:46
 0  2
छिंदवाड़ा में ‘सिलसिला एवं तलाश-ए-जौहर’ का आयोजन, अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ के बलिदान और राष्ट्रीय चेतना पर हुई चर्चा

UNITED NEWS OF ASIA. यज्ञराज पटेल, छिंदवाड़ा l मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद और संस्कृति विभाग के तत्वावधान में जिला अदब गोशा छिंदवाड़ा द्वारा शुक्रवार, 23 अक्टूबर को हुसैन नगर स्थित शादी हॉल, पुराना बैल बाजार में ‘सिलसिला एवं तलाश-ए-जौहर’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नई साहित्यिक प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना और उर्दू शेरो-अदब के माध्यम से देशप्रेम, राष्ट्रीय चेतना, इंसानियत तथा सामाजिक समरसता के मूल्यों को प्रोत्साहित करना रहा।

कार्यक्रम के पहले चरण में दोपहर 2:30 बजे से शाम 4 बजे तक ‘तलाश-ए-जौहर’ प्रतियोगिता आयोजित हुई। इसमें प्रतिभागियों को दिए गए मिसरे ‘दिल का दरवाज़ा मुस्कुराया है’ और ‘किसी ने इतना तेरा इंतज़ार देखा है’ पर तात्कालिक शेर प्रस्तुत करने का अवसर मिला। प्रतियोगिता में अयाज़ ख़ान ने बेहतर शेर प्रस्तुत कर अपनी रचनात्मक प्रतिभा का परिचय दिया। उन्हें मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी की ओर से प्रमाणपत्र और सम्मान राशि प्रदान की जाएगी। प्रतियोगिता में निर्णायक के रूप में दीपशिखा सागर और अंजुमन मंसूरी ‘आरज़ू’ मौजूद रहीं।

इसके बाद शाम 5 बजे से ‘सिलसिला’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी की निदेशक डॉ. नुसरत मेहदी ने अपने संदेश में कहा कि उर्दू साहित्य ने हमेशा देशप्रेम, इंसानियत और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि ‘सिलसिला’ और ‘तलाश-ए-जौहर’ जैसे आयोजन साहित्य के संरक्षण-संवर्धन के साथ नई प्रतिभाओं को मंच देने तथा राष्ट्रीय चेतना और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने शहीद अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ के बलिदान को साझा सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रप्रेम की प्रेरक मिसाल बताया।

मुख्य वक्ता दीपशिखा सागर ने अमर क्रांतिकारी अशफ़ाक़उल्ला ख़ाँ के जीवन, साहस और देशभक्ति पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने रामप्रसाद बिस्मिल के साथ उनके संघर्ष और सर्वोच्च बलिदान को भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की साझा विरासत का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि उर्दू शेरो-अदब ने हमेशा वतनपरस्ती, इंसानियत और राष्ट्रीय एकता के मूल्यों को स्वर दिया है। साहित्य नई पीढ़ी को इतिहास और राष्ट्रीय मूल्यों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम है।

जिला समन्वयक मुबीन ख़ान ने कहा कि ऐसे आयोजन स्थानीय साहित्यिक प्रतिभाओं को मंच देने के साथ उर्दू भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे नई पीढ़ी साहित्यिक परंपरा और राष्ट्रीय चेतना से जुड़ती है।

कार्यक्रम में दीपशिखा सागर, सैयद हामिद अली ‘हामिद’, चंदन अयोधी ‘अश्क’, अवधेश तिवारी, विजयानंद दुबे, ओमप्रकाश ‘नयन’, अजमेरा ‘मयकश’, यूनुस शेख़, अंजुमन मंसूरी ‘आरज़ू’, अमित सोनी, स्वर्णा शेखर, शारिक़ ‘साहिल’, तरुण जैन, ओमप्रकाश ‘राकेश’, अनुराधा तिवारी और मुबीन ‘ज़ामिन’ सहित शायरों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। उनकी रचनाओं में देशप्रेम, धार्मिक सद्भाव, सामाजिक विसंगतियों, मानवीय रिश्तों, उम्मीद और जीवन के विभिन्न पहलुओं को अभिव्यक्ति मिली।

शारिक़ ‘साहिल’ ने वतन से मोहब्बत का इज़हार किया, वहीं अनुराधा तिवारी ने धर्म, जाति और भाषा से ऊपर मानवीय रिश्तों की अहमियत को अपनी रचना के माध्यम से प्रस्तुत किया। अन्य शायरों ने भी अपनी रचनाओं से श्रोताओं को साहित्य, इंसानियत और सामाजिक जिम्मेदारी के संदेश से जोड़ा।