नगरी के घुटकेल में जैविक कृषि मेला, किसानों को रासायनिक खाद से होने वाले नुकसान की दी गई जानकारी

धमतरी जिले के नगरी क्षेत्र के ग्राम घुटकेल में कृषि विभाग द्वारा जैविक कृषि मेले का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में किसानों को रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अधिक उपयोग से मिट्टी की उपजाऊ क्षमता पर पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने जैविक खेती, फसल परिवर्तन और पारंपरिक कृषि पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया। कार्यक्रम में जनपद अध्यक्ष महेश गोटा, उपाध्यक्ष हृदय साहू, जनप्रतिनिधि, किसान और कृषि विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

Oct 28, 2026 - 10:51
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नगरी के घुटकेल में जैविक कृषि मेला, किसानों को रासायनिक खाद से होने वाले नुकसान की दी गई जानकारी

UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी l धमतरी जिले के नगरी क्षेत्र के ग्राम घुटकेल में कृषि विभाग द्वारा जैविक कृषि मेले का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में किसानों को जैविक खेती के फायदे, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अधिक उपयोग से होने वाले नुकसान तथा खेतों की उपजाऊ क्षमता बनाए रखने के उपायों की जानकारी दी गई। इस दौरान किसानों को पारंपरिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने और खेती में रसायनों के अनावश्यक इस्तेमाल से बचने की सलाह दी गई। कार्यक्रम में जनपद अध्यक्ष महेश गोटा सहित जनप्रतिनिधि, किसान और कृषि विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

रासायनिक खाद और कीटनाशकों के उपयोग पर दी जानकारी

कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को बताया कि अधिक उत्पादन और मुनाफे की उम्मीद में कई बार जरूरत से ज्यादा उर्वरक और कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता है। इससे फसल की शुरुआती बढ़वार अच्छी दिखाई दे सकती है, लेकिन खेती में रसायनों का असंतुलित उपयोग मिट्टी की गुणवत्ता और कृषि उत्पादन की दीर्घकालिक क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी कि फसलों में कीटों का प्रकोप होने पर बिना जानकारी के अधिक मात्रा में कीटनाशकों का उपयोग न करें। इसके बजाय कृषि विभाग के अधिकारियों से सलाह लेकर उचित उपाय अपनाएं। सही मार्गदर्शन से खेती की लागत को नियंत्रित करने और फसलों की बेहतर देखभाल करने में मदद मिल सकती है।

फसल परिवर्तन से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने पर जोर

मेले में फसल परिवर्तन के महत्व पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि लगातार एक ही प्रकार की फसल उगाने के बजाय अलग-अलग फसलों को अपनाने से मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। खरीफ की फसल की कटाई के बाद दलहन और तिलहन जैसी फसलों को शामिल करना किसानों के लिए उपयोगी विकल्प हो सकता है। इससे खेती में विविधता आती है और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में सहायता मिल सकती है। कृषि विभाग ने बताया कि फसल परिवर्तन को प्रोत्साहित करने के लिए शासन की ओर से विभिन्न योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं। किसानों को इन योजनाओं की जानकारी लेकर अपनी जमीन और परिस्थितियों के अनुसार फसल चयन करने की सलाह दी गई।

जैविक खेती और पारंपरिक पद्धतियों को बढ़ावा देने की अपील

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पहले किसान पारंपरिक और जैविक पद्धतियों से खेती करते थे। समय के साथ उत्पादन बढ़ाने की जरूरत के चलते रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग बढ़ा। अब मिट्टी की गुणवत्ता और खेती की दीर्घकालिक उत्पादकता को ध्यान में रखते हुए जैविक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना जरूरी है। किसानों से अपील की गई कि वे रासायनिक उत्पादों का इस्तेमाल आवश्यकता और विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार करें तथा जैविक विकल्पों और फसल परिवर्तन को अपनाने की दिशा में प्रयास करें।

जनप्रतिनिधि और किसान रहे उपस्थित

कार्यक्रम में जनपद अध्यक्ष महेश गोटा, उपाध्यक्ष हृदय साहू, बोरई क्षेत्र के जनपद सदस्य राजेशनाथ गोसाई, बोरई सरपंच, मैनपौर सरपंच, घुटकेल और लिखमा के सरपंच सहित बड़ी संख्या में किसान तथा कृषि विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। मेले के माध्यम से किसानों को टिकाऊ खेती, मिट्टी की उर्वरता के संरक्षण और कृषि लागत को नियंत्रित करने के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।