बरतोरी में सरकारी जमीन पर मुरूम खनन के बाद राखड़ से भराई का आरोप, पर्यावरण और जलस्रोतों पर उठे सवाल

तिल्दा-नेवरा क्षेत्र के ग्राम बरतोरी में विकास मैटेलिक स्पंज आयरन उद्योग के सामने स्थित लगभग तीन से चार एकड़ जमीन पर पहले मुरूम खनन और अब राखड़ से भराई किए जाने के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि राखड़ डालने के दौरान उड़ती धूल से परेशानी हो रही है और मुरूम खनन के बाद बने गड्ढे में जमा पानी मवेशियों के उपयोग में आता था। जमीन के स्वामित्व, खनन की अनुमति और राखड़ भराई की वैधता की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। ग्रामीणों ने संबंधित विभागों से संयुक्त जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

Oct 28, 2026 - 10:17
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बरतोरी में सरकारी जमीन पर मुरूम खनन के बाद राखड़ से भराई का आरोप, पर्यावरण और जलस्रोतों पर उठे सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. अशोक मिश्रा, तिल्दा-नेवरा। ग्राम पंचायत बरतोरी में सरकारी जमीन पर मुरूम खनन के बाद राखड़ से भराई किए जाने के आरोपों ने पर्यावरण और प्रशासनिक निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, विकास मैटेलिक स्पंज आयरन उद्योग के सामने स्थित लगभग तीन से चार एकड़ जमीन पर पहले मुरूम की खुदाई की गई और अब उसी स्थान पर राखड़ डाली जा रही है। ग्रामीणों ने मामले की जांच कर जमीन के उपयोग और संबंधित गतिविधियों की वैधता स्पष्ट करने की मांग की है।

मुरूम खनन के बाद राखड़ भराई का आरोप

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित जमीन से बड़े पैमाने पर मुरूम निकाला गया और उसकी बिक्री से आर्थिक लाभ कमाया गया। हालांकि, जमीन के वास्तविक स्वामित्व, खनन की मात्रा, मुरूम की बिक्री और इसके लिए आवश्यक अनुमति से संबंधित तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में राजस्व और खनिज विभाग द्वारा जमीन के रिकॉर्ड तथा खनन संबंधी दस्तावेजों की जांच किया जाना महत्वपूर्ण है।

ग्रामीणों के मुताबिक, मुरूम खनन के बाद बने स्थान पर अब राखड़ डालकर भराई की जा रही है। इस गतिविधि को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि राखड़ कहां से लाई जा रही है और उसे डालने के लिए संबंधित विभागों से अनुमति ली गई है या नहीं। इन सवालों का जवाब आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

उड़ती राखड़ से ग्रामीणों की परेशानी

स्थानीय लोगों का कहना है कि राखड़ डालने के दौरान धूल हवा में फैलती है, जिससे आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने आंखों में जलन सहित अन्य दिक्कतों की आशंका जताई है। ऐसे में राखड़ की प्रकृति, उसके सुरक्षित निस्तारण और आसपास की वायु गुणवत्ता की जांच जरूरी मानी जा रही है। यदि धूल का फैलाव अधिक है, तो उसे नियंत्रित करने के लिए आवश्यक उपाय किए जाने चाहिए।

मवेशियों के जलस्रोत पर भी चिंता

ग्रामीणों के अनुसार, मुरूम खनन के बाद बने गड्ढे में बारिश का पानी जमा होता था, जिसका उपयोग आसपास के मवेशी करते थे। अब राखड़ से भराई होने के कारण उस स्थान पर पानी जमा होने की संभावना कम हो सकती है। ग्रामीणों ने जलस्रोतों की स्थिति और पानी की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है, ताकि मवेशियों के लिए उपलब्ध पानी पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का पता लगाया जा सके।

संयुक्त जांच की मांग

मामले में ग्रामीणों ने राजस्व विभाग, खनिज विभाग, ग्राम पंचायत और पर्यावरण विभाग से संयुक्त निरीक्षण कराने की मांग की है। उनकी मांग है कि जमीन के स्वामित्व संबंधी रिकॉर्ड, मुरूम खनन की अनुमति, खनिज राजस्व और राखड़ भराई से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाए। साथ ही, धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने और जलस्रोतों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।

फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करते हैं या नहीं। जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही यह तय हो सकेगा कि नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं और आगे क्या कार्रवाई की जानी चाहिए।