भारत की 7.8% GDP ग्रोथ से IMF प्रभावित, भारतीय अर्थव्यवस्था को बताया दुनिया के विकास का प्रमुख इंजन

भारत की रियल GDP ग्रोथ 7.8 प्रतिशत रहने के बाद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन की सराहना की है। IMF के अनुसार सर्विस सेक्टर, निर्यात और मजबूत घरेलू मांग ने आर्थिक वृद्धि को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संगठन ने भारत के नए सांख्यिकीय सुधारों का भी स्वागत किया है।

Sep 11, 2026 - 10:29
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भारत की 7.8% GDP ग्रोथ से IMF प्रभावित, भारतीय अर्थव्यवस्था को बताया दुनिया के विकास का प्रमुख इंजन

UNITED NEWS OF ASIA. भारत की अर्थव्यवस्था ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच एक बार फिर मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में भारत की रियल GDP ग्रोथ 7.8 प्रतिशत रहने के बाद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF ने भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन की सराहना की है। IMF के अनुसार भारत की आर्थिक वृद्धि उसकी उम्मीदों से बेहतर रही है और देश की अर्थव्यवस्था वैश्विक स्तर पर तेजी से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। इस प्रदर्शन ने वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बीच भारत की आर्थिक क्षमता को रेखांकित किया है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रवक्ता जूली कोजैक ने भारत की आर्थिक वृद्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 7.8 प्रतिशत की वृद्धि उनके स्टाफ की अपेक्षाओं से काफी अधिक रही। उनके मुताबिक इस मजबूत प्रदर्शन में सर्विस सेक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। भारत में सेवाक्षेत्र लंबे समय से आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख आधार बना हुआ है और इस क्षेत्र में आई तेजी का सीधा असर देश की समग्र आर्थिक वृद्धि पर दिखाई दिया है।

भारत की GDP वृद्धि को गति देने वाले प्रमुख कारकों में निर्यात में बढ़ोतरी और मजबूत घरेलू मांग भी शामिल हैं। वैश्विक स्तर पर आर्थिक गतिविधियों में चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था को घरेलू बाजार से मजबूती मिली है। इसके साथ ही सेवाओं और अन्य क्षेत्रों से जुड़े निर्यात में वृद्धि ने भी आर्थिक गतिविधियों को सहारा दिया। IMF की ओर से भारत के प्रदर्शन को लेकर सकारात्मक टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाएं आर्थिक सुस्ती और वैश्विक अनिश्चितताओं से प्रभावित हैं।

भारत की अर्थव्यवस्था में सर्विस सेक्टर का योगदान लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है। सूचना प्रौद्योगिकी, कारोबारी सेवाओं और अन्य सेवा आधारित गतिविधियों ने देश की आर्थिक गतिविधियों को गति देने में भूमिका निभाई है। मजबूत घरेलू खपत और वैश्विक मांग के बीच सेवाक्षेत्र की गतिविधियों में तेजी को भारत की आर्थिक वृद्धि के प्रमुख आधारों में माना जा रहा है। 7.8 प्रतिशत की वास्तविक GDP वृद्धि का आंकड़ा इसी व्यापक आर्थिक गतिविधि को दर्शाता है।

IMF ने केवल भारत की GDP वृद्धि की सराहना ही नहीं की, बल्कि देश में किए जा रहे सांख्यिकीय सुधारों का भी स्वागत किया है। भारत सरकार ने GDP से जुड़े नए आंकड़ों में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक यानी IIP और उत्पादक मूल्य सूचकांक यानी PPI जैसे नए आंकड़ों को शामिल किया है। इन बदलावों का उद्देश्य आर्थिक गतिविधियों को मापने और देश की अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति को अधिक सटीक तरीके से समझने में मदद करना है।

सांख्यिकीय आंकड़ों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होती है। बेहतर आंकड़ों से सरकार, नीति निर्माता, अर्थशास्त्री और अन्य विशेषज्ञ आर्थिक परिस्थितियों का अधिक प्रभावी ढंग से आकलन कर सकते हैं। IMF ने भारत की डेटा गुणवत्ता में सुधार के प्रयासों का स्वागत करते हुए इसे आर्थिक गतिविधियों के बेहतर मूल्यांकन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना है।

भारत की 7.8 प्रतिशत GDP वृद्धि को वैश्विक अर्थव्यवस्था के मौजूदा माहौल में महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। सर्विस सेक्टर की मजबूती, निर्यात में वृद्धि, घरेलू मांग और बेहतर सांख्यिकीय व्यवस्था भारतीय अर्थव्यवस्था की तस्वीर को मजबूत बनाते हैं। हालांकि GDP के आंकड़े आर्थिक प्रदर्शन की एक अवधि को दर्शाते हैं और भविष्य की वृद्धि कई घरेलू तथा वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। फिलहाल IMF की सकारात्मक प्रतिक्रिया ने भारत की आर्थिक वृद्धि और सुधारों को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चा को जरूर मजबूती दी है।