गरियाबंद में वन संरक्षण की दो तस्वीरें: टाइगर रिजर्व में सख्ती, पथर्री जंगल में अवैध कटाई के आरोप
गरियाबंद जिले में वन संरक्षण को लेकर दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आई हैं। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन विभाग अवैध शिकार और वन्यजीव तस्करी के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहा है, जबकि सामान्य वन मंडल के अंतर्गत पथर्री जंगल में अवैध पेड़ कटाई के आरोपों ने वन संरक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने नियमित गश्त और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. राधे पटेल, गरियाबंद l जिले में वन संरक्षण को लेकर दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आई हैं। एक ओर उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन विभाग वन्यजीव तस्करों और अवैध शिकार पर लगातार सख्ती बरत रहा है, वहीं दूसरी ओर सामान्य वन मंडल के अंतर्गत आने वाले पथर्री जंगल में अवैध पेड़ कटाई के आरोपों ने वन सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में एंटी-पोचिंग टीम की सक्रियता के चलते वन्यजीव तस्करी और अवैध शिकार के कई मामलों में प्रभावी कार्रवाई की गई है। लगातार निगरानी, जंगलों में गश्त और विशेष अभियान के कारण वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर विभाग की कार्यशैली की सराहना भी हो रही है। इससे संरक्षित क्षेत्र में वन्यजीवों और जैव विविधता की सुरक्षा को मजबूती मिली है।
इसके विपरीत, सामान्य वन मंडल के अंतर्गत ग्राम पंचायत बोईरगांव के पथर्री जंगल में अवैध पेड़ कटाई की शिकायतें सामने आई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जंगल क्षेत्र में नियमित गश्त नहीं होने के कारण पेड़ों की लगातार कटाई की जा रही है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो जंगलों का अस्तित्व और वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास दोनों गंभीर संकट में पड़ सकते हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि जिस तरह उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में एंटी-पोचिंग टीम और नियमित निगरानी के माध्यम से वन संरक्षण किया जा रहा है, उसी प्रकार सामान्य वन मंडल के संवेदनशील क्षेत्रों में भी सख्त निगरानी व्यवस्था लागू की जाए। उनका कहना है कि नियमित गश्त, दोषियों पर कार्रवाई और प्रभावी निगरानी से ही अवैध कटाई पर रोक लगाई जा सकती है।
मामले पर सामान्य वन मंडल के एसडीओ मनोज चंद्राकर ने कहा कि यदि जांच में अवैध पेड़ कटाई की पुष्टि होती है तो संबंधित बीट गार्ड और जिम्मेदार वनकर्मियों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने रेंजर आर.के. साहू को तत्काल मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करने और तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
वन विभाग की ओर से शुरू की गई जांच के बाद अब सभी की निगाहें आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों और अवैध कटाई में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जा सकते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि वन संरक्षण के लिए पूरे जिले में समान रूप से प्रभावी निगरानी व्यवस्था लागू करना आवश्यक है, ताकि जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।