डोंगरगढ़ के खालसा स्कूल में छात्र से मारपीट का मामला, सुनने की शक्ति प्रभावित, शिक्षिका गिरफ्तार

राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में खालसा पब्लिक स्कूल की इंचार्ज शिक्षिका को छात्र से मारपीट के मामले में गिरफ्तार किया गया है। घटना में छात्र की सुनने की क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है।

Apr 12, 2026 - 19:54
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डोंगरगढ़ के खालसा स्कूल में छात्र से मारपीट का मामला, सुनने की शक्ति प्रभावित, शिक्षिका गिरफ्तार

UNITED NEWS OF ASIA. नेमिश अग्रवाल, राजनांदगांव। राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ से एक गंभीर और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां खालसा पब्लिक स्कूल में एक छात्र के साथ कथित रूप से की गई मारपीट ने उसकी जिंदगी पर गहरा असर डाल दिया। इस मामले में पुलिस ने इंचार्ज शिक्षिका प्रियंका सिंह को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जबकि दूसरी आरोपी शिक्षिका अभी फरार बताई जा रही है।

घटना 2 जुलाई 2025 की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, कक्षा 7वीं के छात्र सार्थक सहारे से एसएसटी की किताब निकालने में देरी हो गई थी। इस पर उसकी क्लास टीचर नम्रता साहू ने पहले उसे डांटा और फिर इंचार्ज शिक्षिका प्रियंका सिंह को बुलाया। आरोप है कि दोनों शिक्षिकाओं ने कक्षा में आकर छात्र के दोनों कानों पर जोरदार थप्पड़ मारे।

इस मारपीट का असर इतना गंभीर था कि छात्र के कानों को गहरी चोट पहुंची और उसकी सुनने की क्षमता स्थायी रूप से प्रभावित हो गई। घटना के बाद छात्र और उसके परिवार पर मानसिक और भावनात्मक रूप से गहरा असर पड़ा।

पीड़ित छात्र के पिता सुधाकर सहारे ने इस मामले की शिकायत थाना डोंगरगढ़ में दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 574/2025 के तहत बीएनएस की धारा 117(2), 117(3) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया और जांच शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस को पर्याप्त साक्ष्य मिले, जिसके आधार पर 11 अप्रैल 2026 को इंचार्ज शिक्षिका प्रियंका सिंह को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में है। पुलिस ने बताया कि दूसरी आरोपी शिक्षिका नम्रता साहू फरार है और उसकी तलाश जारी है।

पुलिस अधिकारी के अनुसार, इस मामले की जांच गंभीरता से की गई और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। इस पूरी कार्रवाई को पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर के मार्गदर्शन और एसडीओपी स्तर की निगरानी में अंजाम दिया गया।

यह घटना न केवल स्कूलों में छात्रों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े करती है, बल्कि शिक्षकों की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता पर भी गंभीर चिंतन की आवश्यकता को उजागर करती है। बच्चों के साथ इस तरह की हिंसा उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर लंबे समय तक नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।

स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने इस घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त नियम और निगरानी व्यवस्था लागू करने की जरूरत पर भी जोर दिया जा रहा है।

कुल मिलाकर, यह मामला शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन और संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता को रेखांकित करता है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।