आवारा कुत्तों से बचने तालाब में कूदा हिरण, ग्रामीणों और वन विभाग ने बचाई जान
गरियाबंद जिले के मैनपुर क्षेत्र में आवारा कुत्तों के हमले से बचने के लिए एक हिरण तालाब में कूद गया। ग्रामीणों की सतर्कता और वन विभाग की त्वरित कार्रवाई से हिरण का सफल रेस्क्यू कर उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया।
UNITED NEWS OF ASIA. राधे पटेल, गरियाबंद l जिले के मैनपुर क्षेत्र में मानवता और वन्यजीव संरक्षण की एक प्रेरणादायक मिसाल सामने आई। आवारा कुत्तों के हमले से जान बचाने के लिए एक हिरण तालाब में कूद गया, जहां ग्रामीणों की सतर्कता और वन विभाग की त्वरित कार्रवाई से उसकी जान बचाई जा सकी। घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि वन्यजीवों की सुरक्षा में स्थानीय लोगों की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है।
जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह करीब 6:30 बजे गौरघाट और छुईया के बीच बीट क्रमांक 995 के समीप सामान्य वन मंडल से लगे जंगल में करीब तीन से चार वर्ष का एक हिरण आवारा कुत्तों के झुंड के निशाने पर आ गया। जान बचाने के लिए हिरण तेजी से भागता हुआ छुईया स्थित शासकीय आवास कॉलोनी के पीछे बने तालाब में कूद गया। कुत्तों का झुंड लंबे समय तक तालाब के किनारे डटा रहा, जिससे हिरण भय के कारण बाहर नहीं निकल सका।
इसी दौरान सुबह टहलने निकले ग्रामीणों की नजर तालाब में फंसे हिरण पर पड़ी। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए ग्रामीणों ने पहले आवारा कुत्तों को वहां से भगाया और फिर तुरंत वन विभाग को सूचना दी। समय पर मिली जानकारी के कारण वन विभाग की टीम बिना देरी किए मौके पर पहुंच गई।
डिप्टी रेंजर अघन राम सोरी के नेतृत्व में वन विभाग के कर्मचारियों ने पूरी सावधानी और सतर्कता के साथ हिरण का रेस्क्यू किया। सबसे पहले उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि हिरण को कोई गंभीर चोट नहीं लगी है। इसके बाद वन विभाग ने उसे सुरक्षित रूप से उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यदि सूचना मिलने में थोड़ी भी देरी होती, तो आवारा कुत्तों का झुंड दोबारा हिरण पर हमला कर सकता था, जिससे उसकी जान को गंभीर खतरा हो सकता था। अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि यदि जंगल या गांव के आसपास कोई वन्यजीव संकट में दिखाई दे, तो स्वयं उसे पकड़ने या बचाने का प्रयास न करें। इसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दें, ताकि प्रशिक्षित टीम सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर सके।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या जंगलों के आसपास रहने वाले हिरण, खरगोश और अन्य छोटे वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। कई मामलों में कुत्तों के हमलों के कारण वन्यजीवों की मौत भी हो चुकी है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन और वन विभाग के साथ आम नागरिकों की सतर्कता भी बेहद जरूरी है।
मैनपुर की यह घटना वन्यजीव संरक्षण के प्रति समाज की जिम्मेदारी का सकारात्मक उदाहरण है। ग्रामीणों की जागरूकता और वन विभाग की त्वरित कार्रवाई से इस बार एक बेजुबान वन्यजीव की जान बच गई। यह घटना इस बात का संदेश देती है कि यदि नागरिक समय पर सूचना दें और जिम्मेदारी निभाएं, तो कई वन्यजीवों को असमय मौत से बचाया जा सकता है।