दंतेवाड़ा के बचेली गुरुद्वारा में धूमधाम से मनाई गई बैसाखी, खालसा साजना दिवस पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

दंतेवाड़ा जिले के बचेली स्थित गुरुद्वारा साहिब में बैसाखी और खालसा साजना दिवस श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। गुरुबाणी, अरदास और लंगर के माध्यम से श्रद्धालुओं ने सेवा और एकता का संदेश ग्रहण किया।

Apr 14, 2026 - 15:29
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दंतेवाड़ा के बचेली गुरुद्वारा में धूमधाम से मनाई गई बैसाखी, खालसा साजना दिवस पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

UNITED NEWS OF ASIA. नवीन चौधरी, दंतेवाड़ा l  छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में बैसाखी का पावन पर्व श्रद्धा, उल्लास और उमंग के साथ मनाया गया। खासतौर पर बचेली स्थित श्री गुरुद्वारा साहिब बचेली में इस अवसर पर भव्य आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

बैसाखी का पर्व सिख समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि इतिहास, आस्था और वीरता का प्रतीक है। इसी दिन वर्ष 1699 में गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी, जिसने सिख धर्म को नई पहचान और शक्ति प्रदान की। यह दिन समानता, साहस और धर्म की रक्षा के संकल्प का प्रतीक है।

बचेली गुरुद्वारा में सुबह से ही धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत हो गई थी। गुरुद्वारा परिसर में विशेष दीवान सजाए गए, जहां श्रद्धालु बड़ी संख्या में एकत्रित हुए। इस दौरान निशान साहिब की सेवा की गई और सहज पाठ के भोग डाले गए। गुरुबाणी के मधुर शबद कीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया, जिससे श्रद्धालु आध्यात्मिक अनुभूति से सराबोर हो उठे।

कार्यक्रम के दौरान सभी की सुख-समृद्धि और शांति के लिए अरदास की गई। श्रद्धालुओं ने गुरु के चरणों में माथा टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद गुरु का अटूट लंगर आयोजित किया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। लंगर सेवा में सभी वर्गों के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया, जो सिख धर्म की सेवा भावना और समानता के सिद्धांत को दर्शाता है।

बैसाखी का पर्व केवल धार्मिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि कृषि के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह रबी फसल की कटाई का पर्व है, जब किसान अपनी मेहनत की फसल घर आने की खुशी में इस दिन को उत्सव के रूप में मनाते हैं।

इस अवसर पर स्थानीय लोगों ने भी बड़ी संख्या में गुरुद्वारा पहुंचकर पर्व की शुभकामनाएं दीं और कार्यक्रम में सहभागिता निभाई। आयोजन के दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं का भी विशेष ध्यान रखा गया था, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ।

बैसाखी का यह पावन पर्व हमें एकता, सेवा और मानवता का संदेश देता है। यह दिन हमें प्रेरित करता है कि हम समाज में भाईचारे और सहयोग की भावना को बढ़ावा दें और दूसरों की सेवा को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।

दंतेवाड़ा के बचेली में मनाया गया यह उत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का भी एक सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है।