दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में 'कवच' प्रणाली का SIL-4 ट्रायल सफल, ट्रेन सुरक्षा तकनीक ने पास की सभी अहम परीक्षाएं

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के नागपुर मंडल में स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली 'कवच' का SIL-4 स्तर का सफल ट्रायल किया गया। परीक्षण के दौरान सिग्नल पहचान, स्वचालित ब्रेकिंग, गति नियंत्रण और आपातकालीन SOS प्रणाली का सफल परीक्षण हुआ, जिससे रेल सुरक्षा को नई मजबूती मिली।

Jul 25, 2026 - 10:47
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दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में 'कवच' प्रणाली का SIL-4 ट्रायल सफल, ट्रेन सुरक्षा तकनीक ने पास की सभी अहम परीक्षाएं

UNITED NEWS OF ASIA. हसीब अख्तर, रायपुर l भारतीय रेल की स्वदेशी अत्याधुनिक ट्रेन सुरक्षा प्रणाली 'कवच' ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। नागपुर रेल मंडल के अंतर्गत कलमना–सालवा (25 किलोमीटर) रेलखंड पर 23 जुलाई 2026 को आयोजित SIL-4 स्तर का ट्रायल सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह परीक्षण शाम 3:00 बजे से 5:30 बजे तक ब्रेकिंग मोड ऑन स्थिति में किया गया, जिसमें कवच प्रणाली की सभी प्रमुख सुरक्षा सुविधाओं का परीक्षण किया गया और सभी परिणाम पूरी तरह संतोषजनक पाए गए।

इस सफल परीक्षण के साथ भारतीय रेल की स्वदेशी सुरक्षा तकनीक ने यह साबित किया है कि भविष्य में रेल संचालन को और अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय तथा तकनीक आधारित बनाने की दिशा में कवच प्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। परीक्षण के दौरान सिग्नल पहचान, स्वचालित ब्रेकिंग, स्वचालित गति नियंत्रण और आपातकालीन SOS प्रणाली जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं का व्यवहारिक परीक्षण किया गया।

ट्रायल के दौरान सबसे पहले सिग्नल आस्पेक्ट की पहचान की क्षमता का परीक्षण किया गया। इसके बाद स्वचालित ब्रेकिंग (ऑटोमैटिक ब्रेकिंग) प्रणाली की जांच की गई, जिसमें यह सुनिश्चित किया गया कि यदि किसी कारणवश लोको पायलट समय पर ब्रेक नहीं लगा पाता है, तो कवच प्रणाली स्वयं सिग्नल की स्थिति पहचानकर ट्रेन को सुरक्षित रूप से रोक देती है। इस तकनीक के माध्यम से सिग्नल पास्ड एट डेंजर (SPAD) जैसी गंभीर घटनाओं की संभावना को प्रभावी रूप से रोका जा सकता है।

सामान्य परिस्थितियों में लाल सिग्नल मिलने पर ट्रेन रोकने की जिम्मेदारी लोको पायलट की होती है, लेकिन यदि मानवीय त्रुटि या किसी अन्य कारण से समय पर ब्रेक नहीं लगाया जा सके तो कवच प्रणाली स्वतः सक्रिय होकर ब्रेक लगाती है। इससे संभावित दुर्घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण सहायता मिलती है और रेल संचालन की सुरक्षा कई गुना बढ़ जाती है।

परीक्षण के दौरान स्वचालित गति नियंत्रण (ऑटोमैटिक स्पीड कंट्रोल) प्रणाली का भी सफल परीक्षण किया गया। इसमें यह परखा गया कि रेलखंडों और यार्डों में निर्धारित गति सीमा का पालन सुनिश्चित हो। यदि लोको पायलट निर्धारित सीमा से अधिक गति बनाए रखता है और समय पर उसे नियंत्रित नहीं कर पाता, तो कवच प्रणाली स्वतः हस्तक्षेप कर ट्रेन की गति को निर्धारित सीमा के भीतर ले आती है। इससे सुरक्षित एवं नियंत्रित रेल संचालन सुनिश्चित होता है और दुर्घटनाओं की आशंका कम होती है।

ट्रायल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आपातकालीन SOS प्रणाली का परीक्षण भी रहा। इस सुविधा का परीक्षण स्टेशन स्तर और लोको दोनों स्तरों से किया गया। यदि लोको पायलट रेलमार्ग पर किसी असामान्य या आपात स्थिति को देखता है, तो वह तत्काल SOS अलर्ट जारी कर सकता है। यह संदेश तुरंत आसपास के स्टेशनों और निकट संचालित अन्य लोकोमोटिव तक पहुंच जाता है। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित ट्रेनों में स्वचालित ब्रेकिंग की प्रक्रिया भी शुरू हो जाती है, जिससे किसी संभावित दुर्घटना को समय रहते टाला जा सकता है।

इसी प्रकार यदि स्टेशन मास्टर किसी आपात स्थिति की जानकारी प्राप्त करता है, तो वह भी SOS अलर्ट जारी कर सकता है। यह सुविधा रेल संचालन के दौरान किसी भी आकस्मिक परिस्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करती है और यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।

इस महत्वपूर्ण परीक्षण के दौरान लोको पायलट, सहायक लोको पायलट, लोको इंस्पेक्टर, उप मुख्य सिग्नल एवं दूरसंचार अभियंता (परियोजना) नागपुर तथा सहायक मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार अभियंता (परियोजना) नागपुर सहित रेलवे के कई वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने परीक्षण की प्रत्येक प्रक्रिया की निगरानी की और प्रणाली के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, कवच भारतीय रेल द्वारा विकसित पूर्णतः स्वदेशी और अत्याधुनिक ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, जिसका उद्देश्य सिग्नल उल्लंघन की रोकथाम, गति नियंत्रण, स्वचालित ब्रेकिंग तथा आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित सुरक्षा प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है। यह प्रणाली भविष्य में भारतीय रेल नेटवर्क को अधिक सुरक्षित, आधुनिक और तकनीक-संचालित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में SIL-4 स्तर के इस सफल ट्रायल से यह स्पष्ट हो गया है कि कवच प्रणाली वास्तविक परिस्थितियों में भी प्रभावी ढंग से कार्य करने में सक्षम है। आने वाले समय में इस तकनीक का व्यापक विस्तार होने से रेल यात्रियों की सुरक्षा और परिचालन की विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। रेलवे का मानना है कि स्वदेशी तकनीक पर आधारित यह प्रणाली भारतीय रेल के आधुनिकीकरण अभियान को नई गति देगी और सुरक्षित रेल संचालन के नए मानक स्थापित करेगी।