चिरायु टीम की पहल से तीन माह के मासूम का सफल ऑपरेशन, जन्मजात कटे होंठ से मिली राहत

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) के तहत रायगढ़ के तीन माह के शिशु का जन्मजात कटे होंठ का सफल और निःशुल्क ऑपरेशन कराया गया। उपचार के बाद शिशु सामान्य रूप से स्तनपान कर रहा है।

Jul 22, 2026 - 13:04
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चिरायु टीम की पहल से तीन माह के मासूम का सफल ऑपरेशन, जन्मजात कटे होंठ से मिली राहत

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) के तहत स्वास्थ्य विभाग बच्चों में जन्मजात विकारों की समय पर पहचान कर उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। इसी अभियान के तहत रायगढ़ जिले के विकासखंड पुसौर के ग्राम कंवरिहा में तीन माह के एक शिशु का जन्मजात कटे होंठ (क्लेफ्ट लिप) का सफल और निःशुल्क ऑपरेशन कराया गया। उपचार के बाद अब शिशु पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य रूप से स्तनपान कर रहा है।

जानकारी के अनुसार, ग्राम कंवरिहा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में आयोजित नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान चिरायु टीम ने तीन माह के शिशु गौरांश सिदार की जांच की। परीक्षण के दौरान टीम ने पाया कि शिशु जन्मजात क्लेफ्ट लिप से पीड़ित है। समस्या की गंभीरता को देखते हुए चिरायु टीम ने तत्काल उच्च चिकित्सा संस्थान में रेफर करने की प्रक्रिया शुरू की।

चिरायु टीम में शामिल डॉ. रेनुका नायक, फार्मासिस्ट त्रिदेव राज, एएनएम निन्नी जांगड़े और लैब टेक्नीशियन प्रिया माझी ने शिशु के परिजनों को बीमारी के बारे में विस्तार से जानकारी दी और आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया। इसके बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पुसौर के समन्वय से शिशु को रायपुर स्थित कालड़ा हॉस्पिटल भेजा गया, जहां उसका जन्मजात कटे होंठ का सफल ऑपरेशन पूरी तरह निःशुल्क किया गया।

ऑपरेशन के बाद शिशु की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ। अब वह बिना किसी कठिनाई के सामान्य रूप से स्तनपान कर रहा है। शिशु के परिजनों ने समय पर बीमारी की पहचान, उचित परामर्श और निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराने के लिए चिरायु टीम तथा स्वास्थ्य विभाग का आभार व्यक्त किया।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) का उद्देश्य जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच कर जन्मजात विकारों, बीमारियों, पोषण संबंधी कमियों और विकासात्मक समस्याओं की समय रहते पहचान करना है। इस योजना के अंतर्गत 44 प्रकार की जन्मजात विकृतियों और गंभीर बीमारियों का निःशुल्क उपचार कराया जाता है।

इन बीमारियों में जन्मजात हृदय रोग, कटे होंठ एवं तालु (क्लेफ्ट लिप एवं पैलेट), जन्मजात मोतियाबिंद, सुनने और बोलने की समस्या सहित कई अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं शामिल हैं। चिरायु की विशेषज्ञ मेडिकल टीमें नियमित रूप से आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में जाकर बच्चों की स्वास्थ्य जांच करती हैं।

यदि किसी बच्चे में गंभीर बीमारी या जन्मजात विकार पाया जाता है तो उसे उच्च चिकित्सा संस्थान में रेफर कर विशेषज्ञों की निगरानी में निःशुल्क ऑपरेशन और उपचार उपलब्ध कराया जाता है। इस पहल से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी महंगे इलाज की सुविधा बिना किसी खर्च के मिल रही है।

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि समय पर जांच और उपचार से बच्चों का बेहतर शारीरिक एवं मानसिक विकास सुनिश्चित किया जा सकता है। चिरायु कार्यक्रम प्रदेश के हजारों बच्चों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चों को समय रहते गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।