आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के अनुसार विभिन्न जिलों में विद्यालयों के निरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई कि माहवारी के दौरान जरूरत पड़ने पर कई स्थानों पर छात्राओं को सेनेटरी पैड आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाते। ऐसी स्थिति में छात्राओं को असुविधा का सामना करना पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए विद्यालय परिसरों में मासिक धर्म स्वच्छता से जुड़ी आवश्यक सुविधाओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
आयोग ने अनुशंसा की है कि प्रत्येक कन्या एवं सहशिक्षा विद्यालय में सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन जैसी सुविधा उपलब्ध कराई जाए। विद्यालय परिसर में विशेष रूप से शौचालय क्षेत्र के आसपास मशीन स्थापित होने से छात्राओं को आवश्यकता पड़ने पर आसानी से सेनेटरी पैड मिल सकेगा। इससे उन्हें सुविधा के लिए दूसरे लोगों पर निर्भर रहने या असहज परिस्थितियों का सामना करने की आवश्यकता कम होगी।
डॉ. वर्णिका शर्मा ने यह भी अनुशंसा की है कि छात्राओं को आवश्यकता के समय सहयोग और उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए महिला शिक्षिका या अधीक्षिका की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। विशेष रूप से आवासीय बालिका छात्रावासों और आश्रमों में ऐसी व्यवस्था को उपयोगी बताया गया है, जहां छात्राएं लंबे समय तक परिसर में रहती हैं और उन्हें स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक सुविधाओं की नियमित जरूरत हो सकती है।
इस संबंध में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने महिला एवं बाल विकास विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग तथा आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव या सचिव को अनुशंसा भेजी है। आयोग ने प्रदेश के सभी कन्या एवं सहशिक्षा विद्यालयों तथा आवासीय बालिका छात्रावासों और आश्रमों में आवश्यक सुविधाओं का सर्वेक्षण कराने और उसके बाद प्राथमिकता के आधार पर सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन उपलब्ध कराने की दिशा में कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही है।
आयोग ने केवल मशीन स्थापित करने तक व्यवस्था को सीमित नहीं रखने पर भी जोर दिया है। अनुशंसा में स्थापित मशीनों की नियमित देखरेख और निरंतर संचालन की जिम्मेदारी संबंधित विद्यालय प्रबंधन तथा छात्रावास अधीक्षक द्वारा सुनिश्चित किए जाने की बात कही गई है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि मशीनें केवल कागजों में स्थापित न रहें, बल्कि छात्राओं को वास्तव में नियमित रूप से उनका लाभ मिल सके।
मासिक धर्म स्वच्छता किशोरियों के स्वास्थ्य और उनके सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता से छात्राओं को स्वच्छता बनाए रखने में मदद मिल सकती है और माहवारी के दौरान होने वाली असुविधाओं को कम किया जा सकता है। आयोग का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें छात्राओं को स्वास्थ्य, स्वच्छता और गरिमा के साथ पढ़ाई जारी रखने के लिए अनुकूल वातावरण मिले।
डॉ. वर्णिका शर्मा की यह अनुशंसा प्रदेश के स्कूलों और बालिका छात्रावासों में किशोरियों के लिए आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में एक पहल के रूप में सामने आई है। आयोग ने संबंधित विभागों से इस दिशा में आवश्यक सर्वेक्षण, व्यवस्था और निगरानी सुनिश्चित करने पर जोर दिया है, ताकि छात्राओं को जरूरत के समय सुरक्षित एवं सम्मानजनक सुविधा उपलब्ध हो सके।