डिजिटल नवाचारों से सशक्त हो रहा सुशासन, छत्तीसगढ़ में डिजिटल गवर्नेंस को मिल रही नई रफ्तार
छत्तीसगढ़ सरकार का इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग डिजिटल सुशासन को नई दिशा देने के लिए सेवा सेतु, भारतनेट, एआई मिशन, डिजिटल कनेक्टिविटी और क्लाउड आधारित सेवाओं जैसी कई महत्वपूर्ण पहलें संचालित कर रहा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभाग ने डिजिटल गवर्नेंस, नागरिक सेवाओं और भविष्य की तकनीकी योजनाओं की जानकारी साझा की।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में डिजिटल तकनीक के माध्यम से शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सरल और प्रभावी बनाने की दिशा में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग लगातार महत्वपूर्ण पहल कर रहा है। रायपुर के अटल नगर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभाग के सचिव अंकित आनंद और चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मयंक अग्रवाल ने विभाग की उपलब्धियों, योजनाओं और डिजिटल नवाचारों की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार तकनीक आधारित विकास को बढ़ावा देते हुए नागरिकों तक तेज, पारदर्शी और सुगम सेवाएं पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य में डिजिटल सुशासन को नई दिशा देने के लिए कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है। नागरिक सेवाओं का विस्तार, डिजिटल अधोसंरचना का सुदृढ़ीकरण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और नवाचार आधारित प्रशासनिक व्यवस्था के माध्यम से तकनीक संचालित शासन को नई गति मिली है।
सेवा सेतु पोर्टल राज्य की सबसे बड़ी एकीकृत डिजिटल नागरिक सेवा प्रणाली के रूप में स्थापित हो चुका है। 29 अप्रैल 2026 को इसका उन्नत संस्करण शुरू किया गया था। वर्तमान में इस पोर्टल पर 35 विभागों की 564 सेवाएं उपलब्ध हैं। पिछले ढाई वर्षों में पोर्टल पर 85 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 78 लाख से अधिक का सफलतापूर्वक निराकरण किया जा चुका है। राशन कार्ड, विवाह पंजीयन, नल कनेक्शन सहित अनेक सेवाओं की ऑनलाइन उपलब्धता से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लोगों को घर के नजदीक ही सुविधाएं मिल रही हैं। सेवा सेतु में ऑनलाइन आवेदन, डिजिटल दस्तावेज सत्यापन, क्यूआर कोड आधारित प्रमाणन, एसएमएस एवं व्हाट्सएप सूचना तथा ऑनलाइन भुगतान जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
राज्य सरकार डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देने के लिए वनांचल और आदिवासी क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिविटी का तेजी से विस्तार कर रही है। डिजिटल भारत निधि के अंतर्गत आकांक्षी जिलों, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों और 4जी सैचुरेशन योजना के माध्यम से दूरस्थ गांवों तक मोबाइल नेटवर्क पहुंचाया जा रहा है। जनवरी 2024 से अब तक 1273 मोबाइल टावर शुरू किए जा चुके हैं। भारतनेट फेज-3 परियोजना के तहत ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड नेटवर्क से जोड़ने की योजना भी तेजी से आगे बढ़ रही है। लगभग 3928 करोड़ रुपये की इस परियोजना से ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट, डिजिटल सेवाओं और फाइबर टू द होम कनेक्टिविटी का विस्तार होगा।
युवाओं को भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री आईटी फेलोशिप कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, नया रायपुर के सहयोग से संचालित इस कार्यक्रम के तहत 50 चयनित स्थानीय युवाओं को उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण के साथ विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यानुभव प्रदान किया जा रहा है। इससे राज्य में कुशल आईटी विशेषज्ञों का मजबूत समूह तैयार होगा, जो डिजिटल परिवर्तन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा।
विभाग द्वारा विकसित विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म भी शासन व्यवस्था को मजबूत बना रहे हैं। खनिज ऑनलाइन 2.0 के माध्यम से जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है। एकीकृत अपशिष्ट मॉनिटरिंग एवं प्रबंधन प्रणाली से औद्योगिक अपशिष्ट के परिवहन और निस्तारण की ऑनलाइन निगरानी की जा रही है। वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 में 19 विभागों की 151 सेवाओं का एकीकरण कर निवेशकों को समयबद्ध ऑनलाइन अनुमोदन उपलब्ध कराया जा रहा है। पारस पोर्टल के माध्यम से बड़ी अधोसंरचना परियोजनाओं की समीक्षा की जा रही है, जबकि बस्तर मुन्ने पोर्टल से नक्सल प्रभावित जिलों में विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी की जा रही है। डिजिटल द्वार प्रणाली के जरिए विभागों के बीच सुरक्षित और मानकीकृत डेटा आदान-प्रदान की व्यवस्था भी विकसित की गई है।
भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ एआई मिशन को प्राथमिकता दी है। इस मिशन के माध्यम से युवाओं, विद्यार्थियों, स्टार्टअप और सरकारी अधिकारियों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कौशल विकास और अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा। राज्य में एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और एआई डेटा लैब की स्थापना की जा रही है, जिससे नवाचार और रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे।
स्टार्टअप और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया के बीच 105.3 करोड़ रुपये की लागत से चार सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप स्थापित करने का समझौता किया गया है। इन केंद्रों के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वन एवं औषधीय उत्पाद आधारित मेडटेक, स्मार्ट सिटी समाधान और स्मार्ट कृषि जैसे क्षेत्रों में स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय युवाओं और उद्यमियों के लिए नए अवसर तैयार होंगे।
डिजिटल गवर्नेंस को और अधिक सशक्त बनाने के लिए राज्य सरकार क्लाउड फर्स्ट नीति लागू कर रही है। इस नीति के माध्यम से सुरक्षित क्लाउड सेवाओं, डेटा सुरक्षा और संसाधनों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। विभाग की अनेक परियोजनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान प्राप्त हुआ है। आधार सेवाएं, जीआईएस परियोजना, अटल मॉनिटरिंग पोर्टल, ई-प्रगति पोर्टल, एकीकृत अपशिष्ट मॉनिटरिंग एवं प्रबंधन प्रणाली, वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 तथा कोर्ट केस मॉनिटरिंग सिस्टम को विभिन्न राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि राज्य सरकार का उद्देश्य तकनीक को केवल सुविधा तक सीमित रखना नहीं बल्कि उसे सुशासन, पारदर्शिता, समावेशी विकास और नागरिक सशक्तिकरण का आधार बनाना है। सेवा सेतु, भारतनेट, एआई मिशन, डिजिटल कनेक्टिविटी, स्टार्टअप प्रोत्साहन और क्लाउड आधारित शासन व्यवस्था जैसी पहलें छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी डिजिटल राज्यों में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। आने वाले समय में इन योजनाओं के विस्तार से नागरिकों को और अधिक तेज, सुरक्षित तथा पारदर्शी डिजिटल सेवाएं उपलब्ध होंगी और प्रदेश डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर होगा।